बिजली बिल जमा करने की आखिरी तारीख निकल जाने के बाद लगने वाले सरचार्ज को लेकर छत्तीसगढ़ के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। नई व्यवस्था के तहत अब बिल भुगतान में हुई देरी के लिए पूरे महीने का सरचार्ज नहीं देना होगा, बल्कि जितने दिनों की देरी होगी, उसी अवधि के हिसाब से विलंब शुल्क लिया जाएगा। इस बदलाव का सीधा फायदा उन घरेलू, व्यावसायिक और अन्य उपभोक्ताओं को मिलेगा, जो किसी कारण से तय तारीख तक अपना बिजली बिल जमा नहीं कर पाते हैं। प्रदेश में करीब 65 लाख बिजली उपभोक्ता हैं और नई व्यवस्था से बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।
पहले एक दिन की देरी पर भी देना पड़ता था पूरा महीने का सरचार्ज
नई व्यवस्था को समझने से पहले पुराने नियम को जानना जरूरी है। पहले बिजली बिल की अंतिम भुगतान तारीख निकलने के अगले दिन बिल जमा करने पर भी उपभोक्ता से पूरे महीने की अवधि के हिसाब से सरचार्ज लिया जाता था। पुराने प्रावधान के तहत बिजली बिल की राशि पर 1.5 प्रतिशत तक सरचार्ज लग सकता था। यानी अगर किसी उपभोक्ता का बिजली बिल 4 हजार रुपये है और वह सिर्फ एक दिन देर से भुगतान करता है, तो करीब 60 रुपये अतिरिक्त देने पड़ सकते थे। अब नई व्यवस्था में यही गणना बदल गई है।
अब जितने दिन की देरी, उतने दिनों का ही लगेगा शुल्क
नए नियम के मुताबिक बिजली बिल की बकाया राशि पर 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से विलंब शुल्क लिया जाएगा। इसका मतलब यह है कि भुगतान में जितने दिन की देरी होगी, शुल्क भी उसी अवधि के हिसाब से निर्धारित होगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी उपभोक्ता का बिजली बिल 4 हजार रुपये है और वह सिर्फ एक दिन देर से बिल जमा करता है, तो 0.04 प्रतिशत के हिसाब से उसे करीब ₹1.60 अतिरिक्त देने होंगे। वहीं, अगर यही बिल 10 दिन बाद जमा किया जाता है तो विलंब शुल्क भी 10 दिनों की देरी के हिसाब से ही जोड़ा जाएगा। इससे उन उपभोक्ताओं को खास राहत मिलेगी, जिनसे कभी-कभार एक-दो दिन की देरी हो जाती है।
4 हजार के बिल पर पुराने और नए नियम में कितना अंतर?
अगर किसी उपभोक्ता का बिजली बिल 4,000 रुपये है, तो पुराने नियम और नए नियम के बीच अंतर काफी बड़ा है। पुराने नियम के हिसाब से एक दिन की देरी पर करीब 1.5 प्रतिशत यानी ₹60 तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता था। वहीं नई व्यवस्था में एक दिन की देरी पर 0.04 प्रतिशत के हिसाब से करीब ₹1.60 का ही विलंब शुल्क बनेगा। यानी छोटी अवधि की देरी के मामले में उपभोक्ता को पहले की तुलना में काफी कम अतिरिक्त राशि चुकानी होगी।
50 हजार रुपये के बिजली बिल वालों को भी फायदा
नई व्यवस्था का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। अधिक राशि वाले बिजली बिलों पर भी इसका फायदा दिखाई देगा। मान लीजिए किसी उपभोक्ता का बिजली बिल ₹50,000 है। पुराने नियम के अनुसार एक दिन की देरी पर 1.5 प्रतिशत के हिसाब से करीब ₹750 तक अतिरिक्त सरचार्ज लग सकता था। लेकिन नई व्यवस्था में एक दिन की देरी पर 0.04 प्रतिशत की दर से यह राशि करीब ₹20 होगी। इस तरह बड़े बिजली बिल वाले उपभोक्ताओं और व्यावसायिक कनेक्शन धारकों के लिए भी नई व्यवस्था राहत देने वाली साबित हो सकती है।
एडवांस बिजली बिल जमा करने पर अब कम मिलेगी छूट
जहां देर से भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को राहत दी गई है, वहीं एडवांस में बिजली बिल जमा करने पर मिलने वाली छूट में बदलाव किया गया है। पहले उपभोक्ताओं को एडवांस बिजली बिल भुगतान पर 1.25 प्रतिशत तक की छूट मिलती थी। अब इसे घटाकर 0.75 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि आम घरेलू उपभोक्ताओं में एडवांस बिल भुगतान करने का चलन सीमित है, इसलिए इस बदलाव का प्रभाव अपेक्षाकृत कम लोगों पर पड़ने की संभावना है।
65 लाख बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा सीधा असर
छत्तीसगढ़ में करीब 65 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा ऐसे उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें बिल की अंतिम तारीख के आसपास भुगतान करने में किसी कारण से देरी हो जाती है। अब केवल एक या दो दिन की देरी होने पर पूरे महीने का सरचार्ज नहीं देना पड़ेगा। विलंब शुल्क को वास्तविक देरी के दिनों के आधार पर तय किया जाएगा। इससे खास तौर पर उन उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, जो समय पर भुगतान नहीं कर पाने के बाद अगले कुछ दिनों में ही अपना बकाया बिल जमा कर देते हैं।
नए नियम का आसान उदाहरण समझिए
मान लीजिए आपका बिजली बिल ₹4,000 है।
1 दिन की देरी: करीब ₹1.60 विलंब शुल्क
10 दिन की देरी: करीब ₹16 विलंब शुल्क
50 हजार के बिल पर 1 दिन की देरी: करीब ₹20 विलंब शुल्क
हालांकि वास्तविक बिल में अन्य लागू शुल्क और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, इसलिए भुगतान से पहले बिल पर दर्ज अंतिम राशि जरूर जांचनी चाहिए।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
बिजली बिल की भुगतान तारीख निकलने के बाद पूरे महीने का सरचार्ज लगना उन उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनता था, जिन्होंने केवल एक-दो दिन की देरी की हो। नई व्यवस्था में विलंब शुल्क को देरी की वास्तविक अवधि से जोड़ दिया गया है। इससे कम अवधि की देरी पर अचानक बड़ा अतिरिक्त भुगतान करने की स्थिति से राहत मिलेगी। साथ ही, उपभोक्ताओं के लिए बिल की अंतिम तारीख के बाद जल्द से जल्द भुगतान करना भी आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद रहेगा।
बिजली बिल भरते समय इन बातों का रखें ध्यान
नई व्यवस्था के बावजूद उपभोक्ताओं को कोशिश करनी चाहिए कि बिजली बिल का भुगतान निर्धारित अंतिम तारीख के भीतर ही कर दिया जाए। ऑनलाइन भुगतान करते समय ट्रांजैक्शन सफल हुआ या नहीं, इसकी भी पुष्टि कर लें। अगर बिल में कोई गड़बड़ी दिखाई देती है या विलंब शुल्क अपेक्षा से अधिक जुड़ा है, तो संबंधित बिजली वितरण कंपनी के आधिकारिक माध्यम से इसकी जानकारी लेनी चाहिए।