भोपाल, 31 अगस्त 2026 | मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत की खबर है। सरकारी सेवा से रिटायर होने वाले कर्मचारियों के सामान्य नवीन पेंशन प्रकरणों के निराकरण के लिए अब अधिकतम 15 कार्य दिवस की समय-सीमा तय की गई है। तय समय में प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। वित्त विभाग ने राज्य केंद्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल के माध्यम से ऑनलाइन आने वाले पेंशन प्रकरणों के लिए Creator, Verifier और Approver स्तर पर अलग-अलग समय-सीमा निर्धारित की है। इसका उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन शुरू होने में होने वाली अनावश्यक देरी को कम करना है।
सामान्य पेंशन केस के लिए 15 कार्य दिवस
नई व्यवस्था के तहत सामान्य नवीन पेंशन प्रकरण के लिए तीनों स्तरों को पांच-पांच कार्य दिवस दिए गए हैं। सबसे पहले Creator स्तर पर प्रकरण की प्रक्रिया पांच कार्य दिवस में पूरी करनी होगी। इसके बाद Verifier को पांच कार्य दिवस और अंतिम मंजूरी के लिए Approver को भी पांच कार्य दिवस मिलेंगे। इस तरह सामान्य नवीन पेंशन प्रकरण की पूरी प्रक्रिया के लिए कुल 15 कार्य दिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
Revised Pension के लिए सिर्फ 10 दिन
सरकार ने पुनरीक्षित यानी Revised Pension से जुड़े मामलों के लिए इससे भी कम समय निर्धारित किया है। ऐसे प्रकरणों में Creator को चार कार्य दिवस में अपनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। Verifier और Approver को तीन-तीन कार्य दिवस मिलेंगे। यानी पुनरीक्षित पेंशन प्रकरण को कुल 10 कार्य दिवस में निपटाना होगा। इस व्यवस्था से उन पेंशनर्स को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी पेंशन किसी वेतन संशोधन, पात्रता या अन्य कारण से दोबारा निर्धारित की जानी है।
वेतन निर्धारण के मामले 11 दिन में
वेतन निर्धारण से जुड़े प्रकरणों के लिए कुल 11 कार्य दिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है। Creator स्तर पर पांच कार्य दिवस, Verifier के लिए तीन और Approver के लिए तीन कार्य दिवस तय किए गए हैं। वेतन निर्धारण में देरी का असर कर्मचारी की अंतिम पेंशन और दूसरे सेवानिवृत्ति लाभों पर पड़ सकता है। ऐसे में विभाग ने इस प्रक्रिया को भी समयबद्ध किया है।
लंबित मामलों के बाद सरकार हुई सख्त
नई व्यवस्था लागू करने के पीछे विभिन्न कार्यालयों में लंबे समय से लंबित पेंशन मामलों को एक प्रमुख वजह बताया गया है। समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई मामलों में अलग-अलग स्तर पर प्रकरण समय पर आगे नहीं बढ़ाए जा रहे थे। इससे रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन शुरू होने या उसमें संशोधन होने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। इसी स्थिति को देखते हुए वित्त विभाग ने हर स्तर पर स्पष्ट समय-सीमा तय करने का निर्णय लिया है।
समय पर फाइल आगे नहीं बढ़ाई तो तय होगी जवाबदेही
नई व्यवस्था की महत्वपूर्ण बात यह है कि पेंशन प्रकरण केवल ऑनलाइन भेज देना पर्याप्त नहीं होगा। Creator, Verifier और Approver को अपने हिस्से का काम निर्धारित अवधि में पूरा करना होगा। किस स्तर पर प्रकरण लंबित है, इसकी ऑनलाइन प्रक्रिया में पहचान की जा सकेगी। तय समय में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा जा सकता है और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
रिटायर कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?
पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उनके प्रकरण को अलग-अलग कार्यालयों में लंबे समय तक लंबित रखने की गुंजाइश कम होगी। समयबद्ध प्रक्रिया से नए पेंशन मामलों के साथ Revised Pension और Pay Fixation के मामलों में भी तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि 15 दिन की समय-सीमा सामान्य नवीन पेंशन प्रकरण के लिए है। सभी प्रकार के पेंशन मामलों को 15 दिन में निपटाने की बात कहना सही नहीं होगा, क्योंकि पुनरीक्षित पेंशन के लिए 10 और वेतन निर्धारण के लिए 11 कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं।
ऑनलाइन सिस्टम से पता चलेगा कहां अटका प्रकरण
केंद्रीकृत ऑनलाइन पेंशन प्रोसेसिंग व्यवस्था का एक उद्देश्य यह भी है कि पेंशन प्रकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। फाइल किस स्तर पर लंबित है और संबंधित अधिकारी ने निर्धारित अवधि में कार्रवाई की या नहीं, इसकी निगरानी आसान होगी। इससे पेंशनर्स को कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
पेंशनर्स को क्या करना चाहिए?
रिटायर होने वाले कर्मचारियों को भी अपने दस्तावेज समय पर पूरे रखने होंगे। सेवा पुस्तिका, बैंक खाते की जानकारी, पहचान संबंधी दस्तावेज और पेंशन के लिए आवश्यक अन्य रिकॉर्ड में त्रुटि होने पर प्रकरण में अतिरिक्त समय लग सकता है। यदि किसी कर्मचारी का प्रकरण निर्धारित अवधि से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो वह संबंधित विभाग या पेंशन कार्यालय से उसके वर्तमान स्टेटस की जानकारी ले सकता है।