भोपाल, 31 अगस्त 2026 | भोपाल में रहवासी इलाकों में नियमों के विपरीत चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम आज, सोमवार से बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। अंतिम 24 घंटे का नोटिस मिलने के बावजूद गतिविधियां बंद नहीं करने वाले करीब 130 प्रतिष्ठान और प्रॉपर्टी पहले चरण में कार्रवाई के दायरे में हैं। नगर निगम की टीम पुलिस की मौजूदगी में होटल, रेस्टोरेंट, जिम, फैक्ट्री, गोदाम, पब-बार, मैरिज हॉल और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करेगी। नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार रहवासी क्षेत्रों में कथित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अब तक 8,264 नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से करीब 130 प्रॉपर्टी को अंतिम 24 घंटे के नोटिस दिए गए हैं। नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार सीलिंग या कारोबार बंद कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
24 घंटे का अल्टीमेटम खत्म, आज से कार्रवाई
नगर निगम ने रविवार को संबंधित प्रतिष्ठानों पर अंतिम 24 घंटे के नोटिस चस्पा किए थे। सोमवार से निगम की अलग-अलग टीमें मैदानी कार्रवाई करेंगी। नगर निगम का फोकस ऐसे प्रतिष्ठानों पर है, जहां भूमि उपयोग आवासीय है लेकिन परिसर का इस्तेमाल होटल, दुकान, कार्यालय या दूसरी कमर्शियल गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। प्रत्येक संपत्ति की स्थिति उसके रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर जांची जाएगी।
150 नगर निगम कर्मचारी उतरेंगे मैदान में
आज होने वाले अभियान के लिए नगर निगम ने बड़े स्तर पर तैयारी की है। करीब 150 निगम कर्मचारियों को भोपाल की छह विधानसभा क्षेत्रों में कार्रवाई के लिए लगाया जाना है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की भी मदद ली जाएगी। नवीनतम जानकारी के अनुसार नगर निगम ने 11 पुलिस थानों से पुलिसकर्मियों की मांग की है। इसलिए शुरुआती सूचना में सामने आई “छह थानों का पुलिस बल” वाली संख्या अब नवीनतम तैयारी से बदल चुकी है।
गौतम नगर का होटल पहले ही सील
नगर निगम की कार्रवाई में वार्ड-58 के गौतम नगर स्थित एक आवासीय भवन में संचालित होटल को पहले ही सील किया जा चुका है। इसके अलावा शहर के दूसरे इलाकों में भी नोटिस चस्पा किए गए हैं। नगर निगम अब अंतिम नोटिस की अवधि पूरी होने और संबंधित प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रहा है।
8,264 प्रतिष्ठानों को जारी किए गए नोटिस
नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद शहर में सर्वे और नोटिस की कार्रवाई तेज की थी। ताजा रिकॉर्ड के मुताबिक आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से संबंधित 8,264 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। नगर निगम के रिकॉर्ड में भोपाल में करीब 62 हजार कमर्शियल गतिविधियों का उल्लेख है। एक पूर्व रिपोर्ट में निगम अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया था कि इनमें लगभग दो हजार गतिविधियां ही संबंधित लैंड यूज नियमों के अनुरूप हैं। हालांकि किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठान को अवैध मानने से पहले उसके दस्तावेज और लागू नियमों की अलग से जांच जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई
मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही कार्रवाई से जुड़ा है। 5 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति के आधार पर कार्रवाई रोकने के फैसले पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को फिलहाल स्थगित रखा, जिसके जरिए नगर निगम की कार्रवाई रोकी गई थी। अदालत ने साफ किया कि उसके निर्देशों के तहत चल रही प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत पर भी सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती
सुनवाई के दौरान कुछ प्रभावित पक्षों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत का मुद्दा भी सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके निर्देश संबंधित पक्षों पर लागू रहेंगे और समानांतर आदेशों के जरिए न्यायालय की निगरानी में चल रही प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि भोपाल की हर दुकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्वतः अवैध घोषित हो गया है। प्रत्येक संपत्ति की वैधानिक स्थिति उसके लैंड यूज, अनुमति और अन्य लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई
इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होनी है। भोपाल नगर निगम को अदालत के सामने अनुपालन से जुड़ी रिपोर्ट पेश करनी है। यही वजह है कि निगम ने नोटिस की जांच और मैदानी कार्रवाई तेज कर दी है। आने वाले करीब दो सप्ताह नगर निगम के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इस दौरान कितने प्रतिष्ठान स्वयं व्यावसायिक गतिविधियां बंद करते हैं और कितनी प्रॉपर्टी पर निगम को सीलिंग करनी पड़ती है, इसकी तस्वीर स्पष्ट होगी।
क्यों हो रही रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों पर कार्रवाई?
नगर निगम का कहना है कि आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित संपत्तियों में नियमों के विपरीत बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां चलने से स्थानीय व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे क्षेत्रों में दुकानों, होटल, कार्यालय, मैरिज हॉल और अन्य प्रतिष्ठानों के कारण वाहनों की संख्या और पार्किंग की समस्या बढ़ सकती है। शोर, भीड़ और यातायात के कारण स्थानीय निवासियों को परेशानी होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। लेकिन किसी प्रतिष्ठान पर कार्रवाई का कानूनी आधार केवल असुविधा नहीं, बल्कि उस संपत्ति पर लागू लैंड यूज और नगर निगम के संबंधित नियम होंगे।
व्यापारियों की बढ़ सकती है परेशानी
कार्रवाई का सबसे सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जिन्हें अंतिम 24 घंटे का नोटिस दिया गया है। प्रतिष्ठान सील होने पर उनका कारोबार तत्काल प्रभावित हो सकता है। वहीं शहर के दूसरे व्यापारियों की नजर भी नगर निगम के अगले कदम पर है, क्योंकि 8 हजार से ज्यादा नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं। आज की कार्रवाई के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि नगर निगम किस श्रेणी के प्रतिष्ठानों को प्राथमिकता देता है और दस्तावेजों की जांच के बाद कितने मामलों में सीलिंग की जाती है।