चित्रकूट, 31 अगस्त 2026 | उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। रविवार शाम पानी घटने के बाद राहत महसूस कर रहे रामघाट और आसपास के लोगों की चिंता सोमवार सुबह फिर बढ़ गई। सुबह करीब 5:30 बजे नदी का जलस्तर 128.900 मीटर दर्ज किया गया और पानी लगातार ऊपर चढ़ रहा था। प्रारंभिक स्थानीय जानकारी के मुताबिक नदी के जलस्तर में करीब आधे घंटे में 15 सेंटीमीटर तक की वृद्धि देखी गई। तेजी से बढ़ते पानी को देखते हुए प्रशासन फिर अलर्ट मोड पर आ गया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।
रामघाट पर फिर बढ़ा पानी, प्रशासन सतर्क
मंदाकिनी में पानी बढ़ने का असर सबसे पहले रामघाट और आसपास के निचले क्षेत्रों में दिखाई देने की आशंका है। प्रशासन ने घाट और नदी किनारे के क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों को नदी के करीब न जाने और बढ़ते पानी के बीच घाट या जलमग्न रास्तों को पार करने की कोशिश नहीं करने की सलाह दी जा रही है। हाल की भीषण बाढ़ को देखते हुए प्रशासन किसी भी जोखिम से बचने की कोशिश कर रहा है।
शनिवार को 135.200 मीटर तक पहुंचा था पानी
चित्रकूट में शनिवार को मंदाकिनी ने बेहद विकराल रूप ले लिया था। स्थानीय रिकॉर्ड के मुताबिक नदी का जलस्तर 135.200 मीटर तक पहुंच गया था। इसे पिछले करीब 23 वर्षों की सबसे गंभीर बाढ़ की स्थितियों में बताया जा रहा है। तेज बहाव के कारण रामघाट और नदी से सटे कई इलाकों में पानी भर गया था। घर, दुकानें, आश्रम और धार्मिक स्थल भी प्रभावित हुए।
40 गांव और बस्तियां हुईं प्रभावित
बाढ़ का प्रभाव केवल रामघाट तक सीमित नहीं रहा। चित्रकूट के आसपास करीब 40 गांवों और बस्तियों पर इसका असर पड़ा है। स्थानीय प्रशासन के आकलन के अनुसार करीब पांच हजार लोग अलग-अलग स्थानों पर बाढ़ से प्रभावित या फंसे थे। कई जगह सड़क संपर्क टूटने और पानी का बहाव तेज होने के कारण सामान्य संसाधनों से लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो गया था।
वायुसेना से लेकर NDRF-SDRF तक उतरीं बचाव में
हालात गंभीर होने के बाद राहत और बचाव अभियान में स्थानीय प्रशासन के साथ NDRF और SDRF की टीमों को लगाया गया। बेहद संवेदनशील और पानी से घिरे क्षेत्रों में बचाव के लिए वायुसेना की सहायता भी ली गई। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन, पेयजल और दूसरी जरूरी सामग्री पहुंचाने का काम किया गया।
पानी उतरते ही शुरू हुआ तलाशी अभियान
रविवार को पानी कम होने के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन और तलाशी अभियान शुरू किया। जिन मकानों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों में बाढ़ का पानी घुसा था, वहां जांच की जा रही है।
मलबा और कीचड़ जमा होने के कारण कई स्थानों पर सामान्य गतिविधियां अभी पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई हैं। बिजली, पेयजल और संपर्क मार्ग जैसी सुविधाओं की स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है।
जिंदगी पटरी पर लौट ही रही थी, फिर बढ़ने लगी नदी
रविवार को नदी का पानी कम होने के बाद रामघाट क्षेत्र में सफाई और सामान्य गतिविधियां धीरे-धीरे शुरू हो गई थीं। दुकानदार और स्थानीय लोग बाढ़ के बाद जमा मलबे को हटाने में लगे थे। लेकिन सोमवार तड़के जलस्तर में दोबारा तेजी आने की सूचना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल की बाढ़ के कारण नदी किनारे की जमीन और कई कमजोर संरचनाएं पहले से प्रभावित हैं।
लोगों को इन बातों का रखना होगा ध्यान
मंदाकिनी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी और घाट से सुरक्षित दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी है। बाढ़ का पानी देखने के लिए पुल, घाट या किनारे पर भीड़ लगाने से बचें। जलमग्न सड़क या पुलिया पर पानी कम दिखाई देने पर भी उसे पार न करें। नदी किनारे रहने वाले लोग जरूरी दस्तावेज, दवाएं, मोबाइल फोन और आवश्यक सामान तैयार रखें। प्रशासन की ओर से स्थान खाली करने का निर्देश मिले तो तत्काल सुरक्षित जगह पर जाएं।