भोपाल: बारिश के मौसम के बीच राजधानी भोपाल में डेंगू को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। जगह-जगह जमा साफ पानी Aedes मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की सलाह है कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें और बुखार जैसे लक्षण सामने आने पर खुद दवा लेने के बजाय जांच और चिकित्सकीय सलाह लें।
बारिश के बाद क्यों बढ़ जाता है डेंगू का खतरा?
डेंगू संक्रमित Aedes aegypti मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर घरों और आसपास रखे कूलर, पानी की टंकी, बाल्टी, गमले, पुराने टायर, कबाड़ और दूसरे छोटे कंटेनरों में जमा पानी में पनप सकते हैं। खास बात यह है कि डेंगू फैलाने वाला मच्छर आमतौर पर दिन के समय ज्यादा सक्रिय रहता है। इसलिए केवल रात में मच्छरदानी लगाना पर्याप्त नहीं है।
घर के आसपास तुरंत करें ये काम
- डेंगू से बचाव के लिए सबसे जरूरी उपाय मच्छरों को पनपने से रोकना है। घर के अंदर और बाहर ऐसी सभी जगहों की जांच करें, जहां पानी जमा हो सकता है।
- कूलर का पानी नियमित रूप से खाली करके उसे साफ करें।
- छत पर रखे पुराने टायर, डिब्बे, बोतल और टूटे बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
- पानी की टंकियों और दूसरे कंटेनरों को ढककर रखें। गमलों की ट्रे और फ्रिज की पानी वाली ट्रे भी नियमित साफ करें।
- कम से कम सप्ताह में एक बार पूरे घर और आसपास ऐसी जगहों की जांच करना उपयोगी है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डेंगू में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, मतली, उल्टी या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण हो सकते हैं।
कई लोगों में संक्रमण हल्का भी हो सकता है, लेकिन कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
बुखार उतरने के बाद भी रहें सावधान
डेंगू में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि गंभीर स्थिति के चेतावनी संकेत कई बार बुखार कम होने के बाद दिखाई दे सकते हैं। तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून, उल्टी या मल में खून, बहुत ज्यादा कमजोरी, बेचैनी, तेजी से सांस लेना या असामान्य सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाएं।
खुद से न लें ये दर्द की दवाएं
डेंगू की आशंका होने पर aspirin और ibuprofen जैसी NSAID दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। बुखार और दर्द के लिए WHO पैरासिटामोल के इस्तेमाल की सलाह देता है, लेकिन इसकी खुराक भी डॉक्टर की सलाह या दवा के निर्देशों के अनुसार ही लें। पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल लेते रहना भी महत्वपूर्ण है। WHO की Dengue Guidance
केवल प्लेटलेट्स देखकर न घबराएं
डेंगू में प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं, लेकिन केवल प्लेटलेट काउंट से बीमारी की गंभीरता तय नहीं होती। डॉक्टर मरीज के लक्षण, ब्लड प्रेशर, हेमेटोक्रिट, रक्तस्राव और दूसरी जांचों को देखकर इलाज तय करते हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर बताए घरेलू नुस्खों के आधार पर इलाज करने या केवल प्लेटलेट संख्या देखकर खुद निर्णय लेने से बचें।
कब कराएं जांच?
तेज बुखार या डेंगू जैसे लक्षण होने पर नजदीकी सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से संपर्क करें। बीमारी के कितने दिन हुए हैं, इसके आधार पर डॉक्टर उपयुक्त जांच तय कर सकते हैं। केंद्र सरकार के National Centre for Vector Borne Diseases Control पर भी डेंगू और मच्छर जनित बीमारियों से बचाव की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है।