भोपाल, 31 अगस्त 2026 | मध्य प्रदेश की राजनीति में अब Gen Z यानी नई युवा पीढ़ी पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों की नजर है। विधानसभा चुनाव 2028 में अभी समय है, लेकिन दोनों प्रमुख दल युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने की रणनीति पर काम करते दिखाई दे रहे हैं। बीजेपी जहां सोशल मीडिया, Reels और शॉर्ट वीडियो के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस छात्रों के बीच सीधे संवाद और रोजगार-शिक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता देने की तैयारी में है। यानी मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में राजनीतिक मुकाबला केवल रैलियों, सभाओं और पोस्टरों तक सीमित नहीं रहेगा। युवाओं के मोबाइल फोन और कॉलेज कैंपस भी राजनीतिक संवाद के महत्वपूर्ण मंच बन सकते हैं।
BJP का नया फॉर्मूला- भाषण कम, Reels और Short Videos पर जोर
भारतीय जनता पार्टी की रणनीति में सोशल मीडिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है। पार्टी युवाओं तक पहुंचने के लिए लंबे राजनीतिक भाषणों के साथ छोटे और तेजी से शेयर होने वाले डिजिटल कंटेंट के इस्तेमाल पर जोर दे रही है।
ओरछा में हुई बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद सामने आई जानकारी में संगठन की डिजिटल पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय रहने, सरकारी योजनाओं और संगठन की गतिविधियों से जुड़ी सामग्री साझा करने तथा युवाओं से डिजिटल माध्यमों पर संपर्क बढ़ाने के लिए कहा गया है। इसका सीधा लक्ष्य उस युवा वर्ग तक पहुंच बनाना है, जो अपनी जानकारी और मनोरंजन का बड़ा हिस्सा स्मार्टफोन तथा सोशल मीडिया से हासिल करता है।
Reels के जरिए सरकार की योजनाएं पहुंचाने की तैयारी
बीजेपी का फोकस केवल राजनीतिक संदेश देने तक सीमित नहीं है। सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और संगठनात्मक गतिविधियों को भी छोटे वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पेश करने की रणनीति है। इसके लिए पार्टी के जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की व्यक्तिगत सोशल मीडिया मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होगी। नेताओं को अपने अकाउंट सक्रिय रखने और स्थानीय स्तर की गतिविधियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से साझा करने पर जोर दिया जा रहा है। रणनीति यह है कि जिस जानकारी को युवा लंबे भाषण या दस्तावेज में नहीं देखते, उसे कम समय वाले वीडियो और विजुअल कंटेंट में उनके सामने रखा जाए।
कांग्रेस का दांव- छात्रों के बीच सीधे राहुल गांधी
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दूसरी तरफ युवाओं तक पहुंचने के लिए प्रत्यक्ष संवाद को प्रमुख हथियार बनाने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी का 12 सितंबर को इंदौर में छात्रों के साथ प्रस्तावित संवाद इस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक ‘छात्रों की गूंज’ नाम से प्रस्तावित कार्यक्रम में राहुल गांधी विद्यार्थियों से सीधे बातचीत कर सकते हैं। हालांकि कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा, स्थान, प्रतिभागियों की संख्या और राहुल गांधी का विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम जारी होने तक इन विवरणों को प्रस्तावित कार्यक्रम के रूप में ही लिखा जाना चाहिए।
बेरोजगारी और परीक्षाओं के मुद्दे पर कांग्रेस का फोकस
कांग्रेस की युवा रणनीति में बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाएं, शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और कथित भ्रष्टाचार जैसे विषय महत्वपूर्ण रह सकते हैं। पार्टी युवाओं के असंतोष को सीधे संवाद के जरिए समझने और उसे राजनीतिक मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। खासकर सरकारी भर्ती की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों और कॉलेज विद्यार्थियों के सवालों पर कांग्रेस का फोकस बढ़ सकता है। राहुल गांधी का प्रस्तावित छात्र संवाद इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आखिर कौन है Gen Z?
आम तौर पर 1997 से 2012 के आसपास जन्मी पीढ़ी को Gen Z कहा जाता है, हालांकि अलग-अलग संस्थाएं इसकी शुरुआत और अंतिम वर्ष में थोड़ा अंतर रखती हैं। 2026 में इस पीढ़ी के सबसे बड़े सदस्य करीब 29 साल के हो चुके हैं। यानी Gen Z का एक बड़ा हिस्सा अब मतदान की उम्र में है, जबकि सबसे युवा सदस्य अभी किशोरावस्था में हैं। इसलिए राजनीतिक नजरिए से पूरी Gen Z को “वोट बैंक” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। लेकिन इसका बड़ा वयस्क हिस्सा वर्तमान और 2028 के विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण मतदाता समूह होगा।
Gen Z राजनीतिक दलों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
इस पीढ़ी की सबसे बड़ी विशेषता उसका डिजिटल वातावरण में बड़ा होना है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन वीडियो, डिजिटल न्यूज और इंटरनेट आधारित कम्युनिटी इसके लिए सूचना और संवाद के प्रमुख माध्यम हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर Gen Z मतदाता एक जैसी राजनीतिक सोच रखता है। रोजगार, शिक्षा, स्थानीय समस्याएं, आर्थिक स्थिति, सामाजिक पहचान और व्यक्तिगत प्राथमिकताएं उसके मतदान व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं। इसीलिए राजनीतिक दल केवल डिजिटल प्रचार नहीं, बल्कि युवाओं से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर भी अपना एजेंडा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
BJP की Reels बनाम कांग्रेस का Dialogue
मध्य प्रदेश में फिलहाल दोनों दलों की रणनीति में एक दिलचस्प अंतर दिखाई देता है।
बीजेपी की कोशिश है कि “युवा जहां मौजूद है, वहां राजनीतिक संदेश पहुंचाया जाए।” इसलिए सोशल मीडिया, Reels, शॉर्ट वीडियो और नेताओं की डिजिटल सक्रियता पर जोर है।
कांग्रेस की रणनीति में “युवाओं के बीच जाकर उनके सवाल सुनने” की तस्वीर पेश की जा रही है। इसके लिए छात्र संवाद, रोजगार और शिक्षा जैसे विषयों को आगे लाने की तैयारी है।
हालांकि इसे BJP केवल डिजिटल और कांग्रेस केवल ऑफलाइन राजनीति कर रही है, ऐसे पूर्ण विभाजन के रूप में नहीं देखना चाहिए। दोनों दल सोशल मीडिया और जमीनी कार्यक्रमों का इस्तेमाल करते हैं; अंतर फिलहाल उनके प्रमुख राजनीतिक संदेश और अभियान की प्राथमिकताओं में दिखाई दे रहा है।
2028 से पहले युवा वोटर पर क्यों शुरू हुई तैयारी?
मध्य प्रदेश में अगला नियमित विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। तब तक आज के कई किशोर भी पहली बार मतदान करने की उम्र में पहुंच जाएंगे। दूसरी तरफ जो युवा अभी कॉलेज, प्रतियोगी परीक्षा या रोजगार की तलाश में हैं, उनके लिए नौकरी, भर्ती परीक्षा, शिक्षा की गुणवत्ता, स्किल डेवलपमेंट और आर्थिक अवसर सीधे जीवन से जुड़े मुद्दे हैं। ऐसे में दोनों दलों के लिए युवाओं के बीच अभी से राजनीतिक भरोसा तैयार करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
सोशल मीडिया पर बड़ी चुनौती- सिर्फ Views से नहीं मिलेंगे Votes
डिजिटल रणनीति राजनीतिक दलों को लाखों युवाओं तक तेजी से पहुंचने का मौका देती है, लेकिन सोशल मीडिया पर Views, Likes या Followers का चुनावी समर्थन में बदलना तय नहीं होता। Gen Z मतदाता राजनीतिक दावों की तुलना भी ऑनलाइन कर सकता है। रोजगार, परीक्षा, सरकारी योजना या राजनीतिक बयान से जुड़े दावे कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर Fact Check और आलोचना का विषय बन सकते हैं। ऐसे में पार्टियों के लिए चुनौती केवल वायरल कंटेंट तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसा संदेश देना होगा जो युवाओं के वास्तविक अनुभव और प्राथमिकताओं से जुड़ सके।
रोजगार बन सकता है सबसे बड़ा मुद्दा
युवा राजनीति की चर्चा में रोजगार सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में बना रह सकता है। मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाएं और दूसरे सरकारी पदों की भर्ती लगातार युवाओं का ध्यान आकर्षित करती हैं।
इसके साथ निजी क्षेत्र में रोजगार, स्टार्टअप, स्किल ट्रेनिंग और उच्च शिक्षा के बाद नौकरी मिलने जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। बीजेपी सरकार अपनी भर्ती प्रक्रियाओं, स्वरोजगार और युवा योजनाओं को सामने रख सकती है, जबकि कांग्रेस रोजगार की उपलब्धता, परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया की कमियों को मुद्दा बना सकती है।
2028 में कौन जीतेगा Gen Z का भरोसा?
अभी इसका जवाब देना जल्दबाजी होगी। सोशल मीडिया पर ज्यादा मौजूदगी अपने आप वोट में बदलती है और छात्र कार्यक्रम में बड़ी भीड़ चुनावी समर्थन सुनिश्चित करती है—दोनों ही निष्कर्ष बिना चुनावी डेटा के नहीं निकाले जा सकते। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश में युवा मतदाताओं के लिए राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज होने की जमीन तैयार हो रही है। एक तरफ स्क्रीन पर BJP की Reels और Short Videos होंगे, दूसरी तरफ कांग्रेस छात्रों के बीच सीधा संवाद बढ़ाने की कोशिश करेगी। लेकिन आखिरकार युवा मतदाता किसे चुनेंगे, इसका फैसला डिजिटल कंटेंट से आगे रोजगार, शिक्षा, शासन और उनके रोजमर्रा के अनुभवों पर भी निर्भर करेगा।