Monsoon Weather Update: अगस्त के आखिरी दिनों में कमजोर पड़ा मानसून अब सितंबर की शुरुआत के साथ एक बार फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। बंगाल की खाड़ी में एक नए निम्न दबाव वाले क्षेत्र के बनने के संकेत हैं। मौसम सिस्टम के प्रभाव से आने वाले एक से दो दिनों में पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इस सिस्टम का सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल और ओडिशा के साथ बिहार और झारखंड में देखने को मिल सकता है। इन राज्यों में कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी इस मौसम प्रणाली का प्रभाव पहुंचने की संभावना है। वहीं मैदानी इलाकों की बात करें तो दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। यानी सितंबर की शुरुआत देश के कई हिस्सों के लिए बारिश के लिहाज से काफी सक्रिय रहने वाली है।
बंगाल की खाड़ी में बन रहा सिस्टम क्यों है अहम?
बंगाल की खाड़ी में बनने वाला निम्न दबाव का क्षेत्र मानसून के दौरान पूर्वी और मध्य भारत के मौसम को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण सिस्टम माना जाता है। इसके पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने पर कई राज्यों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक इस सिस्टम का असर 1-2 दिनों में दिखाई देना शुरू हो सकता है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा से लेकर झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तक इसके प्रभाव की संभावना है। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति बन सकती है, जिससे स्थानीय स्तर पर जलभराव और अन्य मौसमी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
पश्चिम बंगाल और झारखंड में आज भारी बारिश के आसार
सितंबर की शुरुआत से पहले ही पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ती दिख रही हैं। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार पश्चिम बंगाल और झारखंड के मैदानी क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद 1 सितंबर तक ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी बारिश का प्रभाव देखने को मिल सकता है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और नए मौसम सिस्टम के चलते इन क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
MP और छत्तीसगढ़ में भी दिखेगा असर
बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम का प्रभाव पूर्वी और मध्य भारत तक पहुंच सकता है। इसी वजह से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। सितंबर के शुरुआती दिनों में दोनों राज्यों के मौसम पर इस सिस्टम की नजर रहेगी। खासतौर पर पूर्वी और आसपास के क्षेत्रों में बारिश का प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है। पहले से मानसूनी गतिविधियों के कारण मध्य भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है। ऐसे में नए सिस्टम से एक बार फिर बारिश का दौर मजबूत हो सकता है।
दिल्ली-NCR से पंजाब और हरियाणा तक बदलेगा मौसम
पूर्वी और मध्य भारत के बाद इस मौसम प्रणाली का असर उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकता है। सितंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली, पूर्वी हरियाणा, पूर्वी पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है। हालांकि इसका असर पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में समान नहीं रहेगा। पश्चिमी पंजाब, पश्चिमी हरियाणा और राजस्थान के बड़े हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना जताई गई है।
राजस्थान और गुजरात के पश्चिमी हिस्सों को राहत के आसार कम
जहां देश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में बारिश बढ़ने की संभावना है, वहीं पश्चिमी भारत के कई इलाके अभी भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। पश्चिमी पंजाब, पश्चिमी हरियाणा, पश्चिमी और मध्य राजस्थान तथा गुजरात के बड़े हिस्सों में सितंबर की शुरुआत में भी मुख्य रूप से शुष्क मौसम रहने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में पहले से बारिश की कमी बनी हुई है। ऐसे में मानसून के नए सिस्टम का ज्यादा प्रभाव नहीं पहुंचने पर यहां सूखे जैसी परिस्थितियों में तत्काल बड़ा सुधार होने की संभावना कम है।
एक ही राज्य में कहीं बारिश, कहीं सूखे जैसे हालात
इस मानसून सीजन की एक खास तस्वीर यह भी रही है कि कई राज्यों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। एक ही राज्य के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हुई, जबकि दूसरे क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रही। राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों के पश्चिमी हिस्सों में बारिश की कमी का असर दिखाई दे रहा है, जबकि मध्य भारत के कई इलाकों में मानसून अपेक्षाकृत सक्रिय रहा। सितंबर के पहले सप्ताह में भी यह असमानता बनी रहने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी का नया सिस्टम पूर्वी और मध्य भारत को ज्यादा प्रभावित कर सकता है, जबकि पश्चिमी हिस्सों को इससे सीमित राहत मिलने की उम्मीद है।
तीन महीने में देश में कितनी हुई बारिश?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के आंकड़ों के मुताबिक मानसून सीजन के शुरुआती तीन महीनों में देश में सामान्य से 14 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि मौसम विभाग इस स्थिति को सामान्य बारिश की श्रेणी में मानता है। देश के करीब 56 फीसदी भूभाग में सामान्य बारिश दर्ज की गई, जबकि लगभग 44 फीसदी क्षेत्र में बारिश सामान्य से कम रही। क्षेत्रीय स्तर पर बारिश की स्थिति में काफी अंतर देखने को मिला है।
नॉर्थ ईस्ट में 26 फीसदी कम बारिश
पूर्वोत्तर भारत में सामान्य तौर पर बारिश का स्तर देश के दूसरे हिस्सों की तुलना में ज्यादा रहता है। इस साल यहां सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश में कमी के बावजूद पूर्वोत्तर भारत में हुई कुल बारिश देश के कई दूसरे हिस्सों की तुलना में अधिक रही है। इसका कारण इस क्षेत्र का सामान्य रूप से ज्यादा बारिश वाला जलवायु पैटर्न है। इसके विपरीत मध्य भारत में इस मानसून सीजन के दौरान बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है।
सितंबर में फिर एक्टिव होगा मानसून
अगस्त के अंतिम दिनों में मानसून की गतिविधियों में कुछ कमजोरी देखने को मिली थी। अब सितंबर की शुरुआत में मानसून के फिर सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। बंगाल की खाड़ी में बनने वाला निम्न दबाव इस बदलाव का एक अहम कारण हो सकता है। इसके प्रभाव से पूर्वी भारत से लेकर मध्य भारत तक बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक सितंबर के पहले सप्ताह में कई राज्यों में मानसून की सक्रियता देखने को मिल सकती है।
अल नीनो का खतरा क्यों बढ़ा रहा चिंता?
मानसून के बीच अल नीनो को लेकर भी चिंता बनी हुई है। प्रशांत महासागर के समुद्री सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से बनने वाली जलवायु स्थिति को अल नीनो कहा जाता है। इसका प्रभाव वैश्विक मौसम पैटर्न पर पड़ सकता है और भारत में मानसून कमजोर होने की आशंका बढ़ सकती है। हालांकि इस साल अब तक अल नीनो की आशंका के बावजूद भारत में मानसून पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। 2023 में भी अल नीनो की स्थिति के बावजूद जून से सितंबर के पूरे मानसून सीजन में बारिश सामान्य से केवल 5.3 फीसदी कम रही थी। इस साल भी शुरुआती अनुमान सामान्य मानसून का था, लेकिन आगे बनने वाली समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां मानसून की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।
सात दशकों का सबसे ताकतवर अल नीनो?
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के अनुमानों के मुताबिक इस साल बनने वाला अल नीनो पिछले करीब सात दशकों में सबसे मजबूत घटनाक्रमों में से एक हो सकता है। पूर्वानुमान के मुताबिक सितंबर तक इसके प्रभाव में तेजी आने और साल के अंत तक इसके चरम पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो इसका असर वैश्विक मौसम परिस्थितियों के साथ-साथ भारत के मानसून पर भी पड़ सकता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव कितना होगा, यह आगे की समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
क्या सितंबर में मानसून का प्रदर्शन बदलेगा?
फिलहाल सितंबर की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी का सिस्टम मानसून को फिर से सक्रिय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इससे पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश बढ़ने की उम्मीद है। दूसरी ओर पश्चिमी भारत के जिन इलाकों में बारिश की कमी बनी हुई है, वहां इस सिस्टम से बहुत बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। आने वाले दिनों में मानसून की दिशा, बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम और प्रशांत महासागर की परिस्थितियां मौसम के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।