Everest Masala Ban: अगर आपके किचन में पैकेट वाले मसालों का इस्तेमाल होता है, तो एवरेस्ट से जुड़ी यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने मशहूर मसाला ब्रांड Everest की एक कंपाउंडेड हींग के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच के दौरान संबंधित उत्पाद तय गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया गया, जिसके बाद उसकी बिक्री पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई। यह मामला अचानक सामने नहीं आया, बल्कि एक उपभोक्ता की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच से जुड़ा है। शिकायत मिलने के बाद बाजार में उपलब्ध प्रमुख हींग ब्रांड्स के सैंपल लिए गए और उनकी गुणवत्ता की जांच की गई। जांच में Everest की कंपाउंडेड हींग के सैंपल को लेकर मानकों में कमी सामने आई। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। FSSAI की कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि Everest के सभी मसालों पर बैन लगा दिया गया है। बिक्री पर रोक संबंधित कंपाउंडेड हींग उत्पाद से जुड़ी है। आइए जानते हैं कि जांच में क्या सामने आया, किन अन्य Everest मसालों का नाम जांच में आया और उपभोक्ताओं को इस पूरे मामले में क्या सावधानी बरतनी चाहिए।
Everest की कंपाउंडेड हींग में क्या कमी मिली?
FSSAI की गुणवत्ता जांच में Everest की कंपाउंडेड हींग को लेकर मुख्य सवाल उसकी संरचना में मौजूद वास्तविक हींग की मात्रा से जुड़ा है। नियमों के अनुसार कंपाउंडेड हींग में वास्तविक हींग से संबंधित एक निर्धारित मात्रा का होना जरूरी है। इसके लिए कम से कम 5 प्रतिशत अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट का मानक बताया गया है। जांच के दौरान संबंधित Everest Hing के सैंपल में यह मात्रा 0 से 3 प्रतिशत के बीच पाई गई। यानी जिन सैंपल की जांच हुई, उनमें निर्धारित मानक के मुकाबले अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट की मात्रा कम मिली। इसी गुणवत्ता संबंधी कमी के आधार पर संबंधित कंपाउंडेड हींग की बिक्री पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई।
सिर्फ गुणवत्ता ही नहीं, लेबलिंग पर भी उठे सवाल
FSSAI की कार्रवाई केवल उत्पाद की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रही। जांच के दौरान संबंधित हींग की लेबलिंग को लेकर भी सवाल सामने आए। किसी भी पैकेटबंद खाद्य उत्पाद के लेबल पर दी गई जानकारी खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप होना जरूरी है। उपभोक्ता उत्पाद की सामग्री, मात्रा और दूसरी जरूरी जानकारी मुख्य रूप से पैकेट के लेबल के जरिए ही समझता है। ऐसे में यदि लेबल पर दी गई जानकारी निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है, तो खाद्य नियामक संबंधित कंपनी से जवाब मांग सकता है और सुधार के निर्देश दे सकता है। इस मामले में भी कंपनी को जरूरी सुधार करने और सामने आई कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
Egg Curry Masala और Chicken Masala भी जांच के दायरे में क्यों आए?
Everest की कंपाउंडेड हींग के अलावा कंपनी के कुछ अन्य मसाला उत्पाद भी जांच के दायरे में आए हैं।
इनमें मुख्य रूप से:
Everest Egg Curry Masala
Everest Chicken Masala
Everest Garam Masala शामिल हैं।
इन उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों से जुड़े सवाल सामने आने की बात कही गई है और कंपनी से इस संबंध में जवाब मांगा गया है। लेकिन यहां एक बड़ा अंतर समझना जरूरी है। इन मसालों के जांच के दायरे में आने का मतलब यह नहीं है कि इन सभी उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बिक्री रोक की कार्रवाई संबंधित कंपाउंडेड हींग से जुड़ी है।
क्या Everest के सभी मसालों पर लगा है बैन?
यह इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। नहीं, Everest के पूरे ब्रांड पर बैन की बात सही नहीं है। FSSAI की कार्रवाई संबंधित कंपाउंडेड हींग उत्पाद के खिलाफ है। दूसरी ओर Egg Curry Masala, Chicken Masala और Garam Masala जैसे उत्पादों का नाम जांच या नियमों से जुड़े सवालों के संदर्भ में सामने आया है। इसलिए उपभोक्ताओं को Everest के हर मसाले को प्रतिबंधित या असुरक्षित मानने की जरूरत नहीं है। किसी खाद्य उत्पाद के संबंध में कार्रवाई हुई है तो यह देखना जरूरी है कि नियामक का आदेश किस खास उत्पाद, बैच या श्रेणी से संबंधित है।
अगर घर में Everest की हींग रखी है तो क्या करें?
अगर आपके घर में Everest की कंपाउंडेड हींग रखी है, तो सबसे पहले उसके पैकेट पर लिखे उत्पाद का नाम और दूसरी जानकारी ध्यान से जांचें। क्योंकि कार्रवाई संबंधित कंपाउंडेड हींग पर हुई है, इसलिए Everest के हर मसाले को लेकर एक जैसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पैकेटबंद खाद्य सामग्री खरीदते समय उपभोक्ताओं को लेबल, उत्पाद की जानकारी, पैकिंग और गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए। किसी नियामक कार्रवाई की खबर सामने आने पर भी सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि कार्रवाई पूरे ब्रांड पर है या किसी खास उत्पाद पर।
FSSAI ने कंपनी को क्या निर्देश दिए?
जांच में कमियां सामने आने के बाद कंपनी को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्पादन प्रक्रिया में सुधार के साथ संबंधित उत्पाद को लेकर जरूरी कदम उठाने की बात कही गई है। बाजार में मौजूद प्रभावित उत्पाद को वापस मंगाने की सलाह भी दी गई है। अब कंपनी के सामने जांच में सामने आई कमियों को दूर करने और निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है सबसे जरूरी बात?
इस पूरे मामले से उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि खाद्य उत्पाद खरीदते समय सिर्फ ब्रांड का नाम देखकर ही निर्णय नहीं लेना चाहिए। पैकेट पर मौजूद उत्पाद की जानकारी, लेबल और दूसरी जरूरी डिटेल्स को ध्यान से देखना चाहिए। वहीं किसी खाद्य उत्पाद पर नियामक कार्रवाई की खबर सामने आने पर यह भी जांचना जरूरी है कि प्रतिबंध या कार्रवाई किस विशिष्ट उत्पाद पर हुई है। Everest के मामले में भी यही अंतर महत्वपूर्ण है। संबंधित कंपाउंडेड हींग पर कार्रवाई हुई है, जबकि अन्य उत्पादों को लेकर जांच और जवाब की प्रक्रिया का उल्लेख है।