Alwar BJP Resigns: राजस्थान के अलवर में नगर निगम वार्ड सदस्य चुनाव के लिए बीजेपी की ओर से टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। टिकट नहीं मिलने से नाराज कुछ नेताओं ने पद और पार्टी की सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, जबकि कुछ ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। सोमवार को दिनभर ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए। कहीं टिकट के दावेदार ने खुद नामांकन दाखिल किया, तो कहीं टिकट कटने के बाद परिवार के सदस्य ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक दी।
बीजेपी प्रवक्ता नरेश धानावत ने दिया इस्तीफा
बीजेपी प्रवक्ता नरेश धानावत ने वार्ड-16 से पार्टी टिकट की मांग की थी। टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने नाराजगी जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। धानावत ने अपना इस्तीफा बीजेपी जिलाध्यक्ष को भेज दिया है। इसके साथ ही उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भी दाखिल कर दिया है। टिकट वितरण के बाद पार्टी के एक प्रवक्ता का इस तरह चुनाव मैदान में उतरना बीजेपी के लिए स्थानीय स्तर पर चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
अविनाश खंडेलवाल का टिकट कटा तो भाई ने भरा निर्दलीय नामांकन
अलवर में टिकट को लेकर नाराजगी का एक और मामला सामने आया है। पिछले नगर निगम चुनाव में वार्ड-18 से अविनाश खंडेलवाल निर्दलीय पार्षद चुने गए थे। बताया गया कि इस बार उन्हें बीजेपी की ओर से टिकट देने का आश्वासन मिला था। इसी आधार पर उन्होंने नामांकन कराया, लेकिन अंतिम समय में उनका टिकट काट दिया गया। इसके बाद अविनाश खंडेलवाल के भाई आशीष ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया। अविनाश का कहना है कि उनके वार्ड से बीजेपी ने अनिल चौधरी को टिकट दिया है, जिन्हें वह बिल्कुल नया चेहरा बता रहे हैं। टिकट कटने के बाद उन्होंने पार्टी के फैसले पर नाराजगी जताई है।
जितेंद्र राठौड़ को मनाने में पार्टी सफल, महेश निहालवानी अब भी नाराज
टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी सिर्फ प्रत्याशियों तक सीमित नहीं रही। मंडल स्तर के पदाधिकारियों में भी असंतोष देखने को मिला। श्री विवेकानंद मंडल के अध्यक्ष जितेंद्र राठौड़ की नाराजगी को पार्टी ने दूर कर लिया है। वहीं श्री केशव मंडल के अध्यक्ष महेश निहालवानी की नाराजगी अभी बरकरार बताई जा रही है। महेश निहालवानी का कहना है कि वह अपने फैसले पर अडिग रहेंगे। ऐसे में स्थानीय चुनाव से पहले संगठन के भीतर मतभेद का मुद्दा बीजेपी के लिए चुनौती बनता नजर आ रहा है।
वार्ड-21 के टिकट को लेकर कई कार्यकर्ताओं ने भेजा इस्तीफा
वार्ड-21 अनारक्षित महिला सीट के लिए आरक्षित है। यहां बीजेपी की ओर से उम्मीदवार चयन को लेकर भी विरोध सामने आया है। टिकट वितरण से नाराज वार्ड के कई लोगों ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा जिलाध्यक्ष को भेजने की जानकारी दी है। इस्तीफा देने वालों में सुमन गुप्ता, ओमप्रकाश, नरेश, हरिमोहन, सीमा जैन, अजय, रामू, अशोक कुमार, रामचंद्र, पुष्पा, प्रेम शर्मा और कविता समेत कई नाम बताए गए हैं। पार्टी के भीतर एक साथ कई लोगों के इस्तीफे की बात सामने आने से स्थानीय संगठन में टिकट वितरण को लेकर असंतोष की तस्वीर और स्पष्ट हुई है।
घनश्याम दत्त गुप्ता भी निर्दलीय मैदान में
बीजेपी के श्री माधव मंडल के मंत्री घनश्याम दत्त गुप्ता ने भी पार्टी के फैसले से नाराज होकर अपने पद और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। घनश्याम दत्त गुप्ता ने दावा किया कि वह 1984 से बीजेपी से जुड़े हुए हैं। उनके मुताबिक, वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने उन्हें खुद चुनाव के लिए नामांकन करने को कहा था, लेकिन बाद में टिकट किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया गया। गुप्ता ने टिकट पाने वाले व्यक्ति के कांग्रेस से संबंध होने का आरोप भी लगाया है। हालांकि यह उनका दावा है। उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है।
टिकट बंटवारे ने बढ़ाई बीजेपी की मुश्किलें
अलवर नगर निगम चुनाव से पहले टिकट वितरण के बाद जिस तरह से नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आ रही है, उससे बीजेपी के सामने अपने ही बागी उम्मीदवारों को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ पार्टी आधिकारिक प्रत्याशियों को चुनाव जिताने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर टिकट के दावेदार या उनके समर्थक निर्दलीय उम्मीदवारों के तौर पर मैदान में उतर रहे हैं। ऐसे में चुनावी मुकाबले में बीजेपी के वोटों के बंटवारे की संभावना भी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
बीजेपी जिलाध्यक्ष बोले- कोई नाराज नहीं
वहीं पार्टी के भीतर बगावत और इस्तीफों की खबरों के बीच बीजेपी जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने नाराजगी की बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी का कोई नेता नाराज नहीं है और किसी को मनाने की जरूरत भी नहीं पड़ी है। जिलाध्यक्ष के मुताबिक सभी नेता और कार्यकर्ता मिलकर बीजेपी के आधिकारिक उम्मीदवार को चुनाव जिताने के लिए काम करेंगे। ऐसे में एक ओर जहां पार्टी नेतृत्व एकजुटता का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर टिकट कटने के बाद नेताओं के इस्तीफे और निर्दलीय नामांकन स्थानीय स्तर पर अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा, चुनावी नतीजों पर रहेगी नजर
अलवर नगर निगम वार्ड चुनाव में टिकट वितरण के बाद सामने आया यह विरोध आने वाले दिनों में कितना बढ़ता है, यह देखना अहम होगा। अगर बीजेपी के बागी नेता निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में बने रहते हैं, तो कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है। ऐसे में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती बढ़ सकती है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि बीजेपी नेतृत्व नाराज नेताओं को वापस पार्टी के साथ जोड़ पाता है या बगावत का यह सिलसिला चुनाव तक जारी रहता है।