Bhopal Master Plan: राजधानी भोपाल के लंबे समय से अटके नए मास्टर प्लान को लेकर अब तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रस्तावित मास्टर प्लान के मसौदे को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर उनके सुझाव और राय लेने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि सितंबर में जन्माष्टमी के आसपास नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी किया जा सकता है।
नए मास्टर प्लान से भोपाल के विकास को मिलेगी नई दिशा
राजधानी के नए मास्टर प्लान को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें वर्ष 2047 तक भोपाल की संभावित आबादी और शहर के विस्तार को आधार बनाया गया है। योजना में केवल आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों का निर्धारण ही नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली परिवहन और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों को भी शामिल किया गया है। इसमें सड़क नेटवर्क, ट्रांसपोर्ट सिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी शहरी सुविधाओं के विस्तार को लेकर भी प्रावधान किए जाने हैं।
जन्माष्टमी के आसपास सामने आ सकता है ड्राफ्ट
नए मास्टर प्लान को लेकर सबसे अहम अपडेट यह है कि इसका प्रस्तावित ड्राफ्ट सितंबर में जन्माष्टमी के आसपास जारी किए जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा और सुझाव लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के बाद राजधानी के भविष्य के विकास, भूमि उपयोग और विभिन्न क्षेत्रों के नियोजन को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
2005 में खत्म हो गई थी पुराने मास्टर प्लान की अवधि
भोपाल के वर्तमान मास्टर प्लान का इतिहास भी इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। राजधानी का पिछला मास्टर प्लान 1995 में जारी किया गया था, जिसकी निर्धारित अवधि वर्ष 2005 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद शहर के विकास और भूमि उपयोग से संबंधित कई फैसले अलग-अलग नियोजन प्रक्रियाओं के माध्यम से लिए जाते रहे। ऐसे में नए मास्टर प्लान की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
2008 से चल रही थी नए प्लान की कवायद
भोपाल के नए मास्टर प्लान को तैयार करने की प्रक्रिया कोई नई पहल नहीं है। इसके लिए 2008 से ही कवायद शुरू हो गई थी, लेकिन कई कारणों से इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। इस दौरान राजधानी के विकास और आसपास के क्षेत्रों को लेकर कई प्रस्ताव सामने आए। मेट्रोपॉलिटन रीजन से संबंधित प्रस्तावों के कारण भी मास्टर प्लान की प्रक्रिया प्रभावित हुई। अब मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद वर्षों से लंबित इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश तेज हो गई है।
2047 तक बढ़ती आबादी को ध्यान में रखकर प्लानिंग
नए मास्टर प्लान की सबसे बड़ी खासियत इसका भविष्य केंद्रित होना है। योजना में वर्ष 2047 तक भोपाल के संभावित विस्तार और आबादी को ध्यान में रखा गया है। शहर के बढ़ते आकार के साथ आवास, कारोबार, सड़क, परिवहन और दूसरी नागरिक सुविधाओं की मांग भी बढ़ेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए नए प्लान में शहरी विकास के लिए व्यापक ढांचा तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
जनप्रतिनिधियों से ली जाएगी राय
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा और उनके सुझाव लेने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य मास्टर प्लान को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर बनाने का बताया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों की राय के बाद प्रस्तावित ड्राफ्ट को आगे की प्रक्रिया में ले जाया जाएगा।
वर्षों से इंतजार कर रही राजधानी को मिलेगी नई योजना?
भोपाल के नए मास्टर प्लान को लेकर करीब डेढ़ दशक से ज्यादा समय से प्रक्रिया चल रही है। पुराने मास्टर प्लान की अवधि समाप्त होने के बाद भी नया प्लान अंतिम रूप नहीं ले सका। अब मुख्यमंत्री की मंजूरी और सितंबर में ड्राफ्ट जारी होने की संभावित समयसीमा से राजधानी के नियोजित विकास को लेकर नई उम्मीद जगी है। आने वाले समय में ड्राफ्ट जारी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि भोपाल के अलग-अलग क्षेत्रों में भूमि उपयोग, सड़क नेटवर्क, आवासीय विस्तार और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर क्या बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।