लखनऊ - उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी के एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता और एमएलसी लाल बिहारी यादव का बयान चर्चा में आ गया है। शिक्षक सम्मेलन के दौरान दिए गए उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर बहस शुरू हो गई है।
शिक्षक सम्मेलन में दिया बयान
आजमगढ़ के नेहरू हॉल में समाजवादी पार्टी की ओर से शिक्षक गोष्ठी का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में पार्टी नेताओं और शिक्षकों की मौजूदगी में आगामी चुनाव को लेकर संगठन को मजबूत करने और पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन की बात कही गई। इसी दौरान लाल बिहारी यादव ने कार्यकर्ताओं और शिक्षकों से पार्टी नेतृत्व के फैसले के साथ खड़े रहने की अपील की। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव किसी उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारते हैं, तो पार्टी समर्थकों को उसी के पक्ष में मतदान करना चाहिए।
‘कुत्ते के गले में घंटी...’ वाली टिप्पणी
लाल बिहारी यादव ने अपनी बात समझाने के लिए बेहद तीखे उदाहरण का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव किसी कुत्ते के गले में घंटी बांधकर भी चुनाव मैदान में भेज दें, तब भी पार्टी कार्यकर्ताओं को उसी को वोट देना चाहिए। उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से शेयर होने लगा। बयान को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे पार्टी नेतृत्व के प्रति निष्ठा जताने का तरीका बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे राजनीतिक मर्यादा से जुड़ा विवादित बयान मान रहे हैं।
पार्टी और नेतृत्व के प्रति एकजुटता का संदेश
लाल बिहारी यादव के बयान का संदर्भ पार्टी के संगठन और नेतृत्व के फैसले को प्राथमिकता देने की अपील से जुड़ा बताया जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार के बजाय पार्टी और उसके नेतृत्व के निर्णय के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए। हालांकि, जिस अंदाज में उन्होंने अपनी बात रखी, वही अब विवाद की मुख्य वजह बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद उनके बयान को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
चुनाव से पहले बढ़ रही सियासी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो चुका है। सपा जहां संगठन को मजबूत करने और अपने समर्थक वर्ग के बीच सक्रियता बढ़ाने में जुटी है, वहीं विपक्षी दल भी उसके नेताओं के बयानों को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लाल बिहारी यादव का बयान भी इसी राजनीतिक माहौल में सामने आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस टिप्पणी को लेकर दूसरे दलों की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना बनी हुई है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई चर्चा
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ही इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बयान आजमगढ़ में आयोजित शिक्षक गोष्ठी के दौरान दिया गया था और इसके बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हुईं। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी या खुद लाल बिहारी यादव इस बयान को लेकर कोई विस्तृत सफाई देते हैं या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि चुनावी तैयारियों के बीच उनका यह बयान यूपी की सियासत में एक नया चर्चा का विषय बन गया है।