MP District Judge Retirement Age: मध्य प्रदेश में जिला न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जिला न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 62 साल किए जाने के प्रस्ताव पर मध्य प्रदेश सरकार ने सहमति जता दी है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रही उस कार्यवाही से जुड़ा है, जिसमें देशभर में जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने के प्रस्ताव पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का रुख जाना जा रहा है। 1 सितंबर 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अपने संबंधित हाई कोर्ट से परामर्श कर व्यावहारिक निर्णय लेने को कहा। मध्य प्रदेश में फिलहाल जिला न्यायालय के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 61 साल है। ऐसे में 62 साल करने की सहमति राज्य के न्यायिक अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
MP सरकार ने 62 साल की उम्र के प्रस्ताव पर जताई सहमति
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जिला न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 62 साल किए जाने के प्रस्ताव पर सहमति मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले राज्य में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 वर्ष थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2025 के आदेश के बाद बढ़ाकर 61 वर्ष किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड और हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, 20 नवंबर 2025 के आदेश में मध्य प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष की गई थी। अब 62 वर्ष करने का प्रस्ताव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को हाई कोर्ट से परामर्श के दिए निर्देश
1 सितंबर 2026 को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मुद्दे पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से विचार करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक सूची में भी इस पीठ की 1 सितंबर की सुनवाई दर्ज है। कोर्ट ने राज्यों से अपने अधिकार क्षेत्र वाले हाई कोर्ट से परामर्श करने और करीब दो सप्ताह के भीतर स्वतंत्र एवं व्यावहारिक फैसला लेने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है।
तमिलनाडु और तेलंगाना भी बढ़ोतरी के पक्ष में
मध्य प्रदेश के अलावा तमिलनाडु और तेलंगाना की ओर से भी रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने को लेकर सकारात्मक रुख सामने आने की जानकारी है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि अधिकांश हाई कोर्ट जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र बढ़ाने के पक्ष में हैं, हालांकि कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अभी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचे हैं। इसका मतलब है कि पूरे देश में जिला न्यायपालिका की सेवानिवृत्ति उम्र को लेकर एक समान व्यवस्था बनाने की दिशा में चर्चा आगे बढ़ रही है।
कुछ राज्यों ने आर्थिक बोझ का उठाया मुद्दा
सुनवाई के दौरान कुछ राज्यों ने रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर आपत्ति जताई। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने आर्थिक बोझ का तर्क रखा, जबकि नगालैंड ने अपने राज्य के सरकारी कर्मचारियों की 58 वर्ष की सेवानिवृत्ति उम्र का हवाला दिया। रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और यह रेखांकित किया कि न्यायिक अधिकारियों की सेवा की तुलना सामान्य सरकारी कर्मचारियों से सीधे नहीं की जा सकती, क्योंकि वे आम तौर पर अपेक्षाकृत अधिक उम्र में न्यायिक सेवा में प्रवेश करते हैं।
SC ने कहा- न्यायिक अधिकारियों की स्थिति अलग
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में न्यायिक अधिकारियों को सामान्य सरकारी कर्मचारियों से अलग श्रेणी के रूप में देखने पर जोर दिया गया। कोर्ट के सामने यह भी तर्क आया कि न्यायिक अधिकारी अक्सर अपनी सेवा में अपेक्षाकृत देर से प्रवेश करते हैं। ऐसे में उनकी सेवानिवृत्ति उम्र को सामान्य सरकारी कर्मचारियों की उम्र के आधार पर तय करना उचित नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट राज्यों से 62 वर्ष की उम्र के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने को कह रहा है।
MP में पहले 60 से बढ़कर 61 साल हुई थी Retirement Age
मध्य प्रदेश के लिए यह मुद्दा नया नहीं है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष की थी। इस फैसले की पृष्ठभूमि में जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया और अन्य राज्यों में दिए गए समान लाभ का संदर्भ था। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 20 नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट आदेश से MP में यह उम्र 61 वर्ष हुई। अब 62 वर्ष की उम्र को लेकर अगला फैसला व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रक्रिया से जुड़ा है।
17 सितंबर को फिर होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने हाई कोर्ट से परामर्श के बाद अपना रुख स्पष्ट करना है। 17 सितंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में यह सामने आ सकता है कि कितने राज्यों ने 62 वर्ष की सेवानिवृत्ति उम्र के प्रस्ताव पर सहमति दी और कितने राज्य अभी असमंजस में हैं। मध्य प्रदेश की ओर से सहमति मिलने के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि आगे इस प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।