इंदौर: जिले में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के लिए चलाए गए दस्तक अभियान के दौरान लापरवाही सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। डिजिटल सर्वे सिस्टम में बच्चों की स्क्रीनिंग से जुड़ी जानकारी गलत दर्ज करने के मामले में 20 एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभाग ने संबंधित एएनएम के तीन दिन का वेतन काटने के आदेश दिए हैं। साथ ही उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान डिजिटल सिस्टम में दर्ज की गई जानकारियों में गड़बड़ी सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक, स्क्रीनिंग के दौरान बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सही तरीके से दर्ज करना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसी डेटा के आधार पर जरूरतमंद बच्चों की पहचान कर उन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए रेफर किया जाता है।
0 से 5 साल तक के बच्चों की हुई स्क्रीनिंग
दस्तक अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग की गई। अभियान 14 जुलाई से 31 अगस्त तक चलाया गया। इस दौरान जिले में 3.5 लाख से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया था।
स्वास्थ्यकर्मियों ने घर-घर जाकर और आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों की जांच की। स्क्रीनिंग के बाद बच्चों से संबंधित स्वास्थ्य जानकारी डिजिटल सर्वे सिस्टम में दर्ज की गई। इसी डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान और आवश्यक होने पर उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों तक रेफर किया जाना था।
गलत एंट्री से प्रभावित हो सकती है बच्चों की पहचान
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल सर्वे में गलत जानकारी दर्ज होने से बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति का सही आकलन प्रभावित हो सकता है। खासतौर पर कुपोषण और एनीमिया जैसे मामलों की पहचान में परेशानी आने की आशंका है।
यदि किसी बच्चे की जांच के बाद उसकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति के बजाय गलत जानकारी डिजिटल सिस्टम में दर्ज हो जाए, तो आगे की स्क्रीनिंग, निगरानी और रेफरल प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग ने डेटा एंट्री में लापरवाही को गंभीरता से लिया है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की ANM पर कार्रवाई
जांच में सामने आई गड़बड़ियों के बाद शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कार्यरत 20 ANM के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर उनसे लापरवाही को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बच्चों की स्क्रीनिंग के दौरान दर्ज की जाने वाली जानकारी में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य संबंधी डेटा की सटीकता सीधे बच्चों की आगे की चिकित्सा सहायता से जुड़ी हुई है।
तीन दिन का वेतन कटेगा, सुधार नहीं हुआ तो वेतनवृद्धि भी रुकेगी
लापरवाही के मामले में संबंधित 20 ANM के तीन दिन के वेतन में कटौती के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा उन्हें कार्यशैली में सुधार करने की चेतावनी भी दी गई है।
विभाग ने साफ संकेत दिया है कि यदि भविष्य में कामकाज में सुधार नहीं हुआ और इस तरह की लापरवाही दोबारा सामने आई, तो दो वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
DPMS टूल में सामने आई गड़बड़ी
यह कार्रवाई डीपीएमएस (DPMS) टूल में दर्ज जानकारी की समीक्षा के दौरान सामने आई गड़बड़ियों के आधार पर की गई है। सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी के निर्देश पर मामले की समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने डिजिटल सिस्टम में दर्ज आंकड़ों की जांच के दौरान कुछ एंट्री को निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं पाया। इसके बाद संबंधित ANM की जिम्मेदारी तय करते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
डेटा की शुद्धता पर स्वास्थ्य विभाग का जोर
दस्तक अभियान का उद्देश्य छोटे बच्चों में बीमारियों और पोषण संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान करना है। ऐसे में केवल बड़ी संख्या में स्क्रीनिंग पूरी करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच के बाद सही और पूरी जानकारी डिजिटल सिस्टम में दर्ज करना भी अभियान का अहम हिस्सा है।
स्वास्थ्य विभाग अब फील्ड स्तर पर दर्ज किए जा रहे डेटा की निगरानी और समीक्षा पर अधिक जोर दे रहा है, ताकि किसी बच्चे की स्वास्थ्य समस्या केवल गलत डिजिटल एंट्री के कारण नजरअंदाज न हो। विभाग ने कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में स्क्रीनिंग और डेटा एंट्री के दौरान पूरी सावधानी बरती जाए।