Ram Mandir Trust CEO: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिल गया है। भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया है। बुधवार, 2 सितंबर 2026 को हुई ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई। जितेंद्र मिश्रा इसी साल अप्रैल में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। करीब 38 वर्षों के सैन्य करियर में उन्होंने फाइटर पायलट, कॉम्बैट इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट समेत कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड की कमान भी संभाली थी।
पहली बार राम मंदिर ट्रस्ट में CEO पद पर नियुक्ति
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक संस्थागत बनाने की दिशा में CEO की नियुक्ति को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया है। उनके चयन के लिए आवेदन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग और मूल्यांकन किया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम चरण में तीन नामों पर विचार किया गया और उनमें से मिश्रा के नाम का चयन किया गया। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े निर्माण, दर्शन व्यवस्था, प्रशासन और विभिन्न गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
38 साल तक वायुसेना में दी सेवा
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का भारतीय वायुसेना में लंबा और महत्वपूर्ण करियर रहा है। उन्होंने करीब 38 वर्षों तक वायुसेना में सेवा दी। अपने सैन्य करियर के दौरान वह-
फाइटर पायलट रहे
कॉम्बैट इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम किया
टेस्ट पायलट की भूमिका निभाई
महत्वपूर्ण सैन्य कमानों में जिम्मेदारियां संभालीं
रिपोर्टों के मुताबिक उनके पास 3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।
ऑपरेशन सिंदूर में संभाली थी वेस्टर्न एयर कमांड की कमान
जितेंद्र मिश्रा की प्रोफाइल की एक खास बात उनका हालिया सैन्य अनुभव भी है। रिपोर्टों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड का नेतृत्व किया था। इसके अलावा 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर में भी उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। इससे पहले वह मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमान उड़ा चुके हैं।
देवरिया से ताल्लुक रखते हैं जितेंद्र मिश्रा
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से संबंध रखते हैं। उन्होंने NDA खड़कवासला से प्रशिक्षण प्राप्त किया और इसके बाद भारतीय वायुसेना में लंबी सेवा की। सैन्य क्षेत्र में उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए अब उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक जिम्मेदारी से जोड़ा गया है।
हजारों आवेदनों के बाद हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 5,500 से अधिक आवेदन आए थे, जिनमें से चयन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों की योग्यता और प्रशासनिक क्षमता के साथ अन्य पहलुओं का भी मूल्यांकन किया गया। अंतिम चरण में तीन नामों पर विचार हुआ और जितेंद्र मिश्रा को CEO की जिम्मेदारी सौंपी गई।
CEO के तौर पर क्या होगी जितेंद्र मिश्रा की जिम्मेदारी?
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पद पर रहते हुए जितेंद्र मिश्रा के सामने मंदिर और ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक कार्यों के बेहतर संचालन की जिम्मेदारी होगी। उनके काम के प्रमुख क्षेत्रों में मंदिर से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, कानूनी मामलों और विभिन्न संस्थागत गतिविधियों के समन्वय जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। ट्रस्ट की गतिविधियों का विस्तार होने के साथ प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय और निगरानी की जरूरत भी बढ़ रही है। ऐसे में CEO के पद को ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
CEO चयन के लिए बनाई गई थी तीन सदस्यीय कमेटी
CEO के चयन की प्रक्रिया के लिए ट्रस्ट की ओर से एक कमेटी बनाई गई थी। इसमें रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल थे। इसी चयन प्रक्रिया के बाद अंतिम रूप से जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनी।
मंदिर प्रबंधन को मिलेगा नया प्रशासनिक ढांचा
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO की नियुक्ति को मंदिर प्रशासन के लिए एक नए चरण के रूप में देखा जा रहा है। CEO के माध्यम से ट्रस्ट की अलग-अलग गतिविधियों के बीच समन्वय स्थापित करने और प्रशासनिक कार्यों को एक केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। जितेंद्र मिश्रा का सैन्य प्रशासन और नेतृत्व का लंबा अनुभव इस नई जिम्मेदारी में उनके लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।