उज्जैन, 3 सितंबर 2026 | देशभर में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी, लेकिन उज्जैन में इस पर्व का रंग कुछ खास है। यहां मंगलनाथ रोड पर स्थित महर्षि सांदीपनि आश्रम को धार्मिक परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली माना जाता है। मान्यता है कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण अपने बड़े भाई बलराम के साथ यहां गुरु सांदीपनि से शिक्षा लेने आए थे और यहीं उनकी सुदामा से मित्रता भी हुई। उज्जैन जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी भी सांदीपनि आश्रम को श्रीकृष्ण और सुदामा की शिक्षास्थली के रूप में दर्ज करती है। अब जन्माष्टमी को लेकर इसी पौराणिक शिक्षास्थली को खास तरीके से सजाया जा रहा है। 4 सितंबर को श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा के साथ गुरु सांदीपनि और गुरु माता का विशेष श्रृंगार होगा। जन्मोत्सव के लिए नीले मखमली वस्त्र तैयार किए गए हैं, जिन पर मोती, रेशमी धागे और जरदोजी का काम किया गया है।
64 दिनों में 64 कलाएं सीखने की है मान्यता
सांदीपनि आश्रम से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध धार्मिक मान्यताओं में श्रीकृष्ण की असाधारण शिक्षा का प्रसंग है। आश्रम की परंपरा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि के सान्निध्य में बेहद कम समय में वेद, शास्त्र, पुराण, विभिन्न विद्याओं और कलाओं का ज्ञान अर्जित किया। स्थानीय धार्मिक परंपरा में इसे 64 दिनों में 64 कलाओं का ज्ञान प्राप्त करने के रूप में बताया जाता है।
कुछ परंपरागत विवरणों में चार वेद, छह शास्त्र, 18 पुराण और विभिन्न विद्याओं के अध्ययन का भी उल्लेख मिलता है। हालांकि इन संख्याओं और दिनवार विवरण को धार्मिक-पौराणिक मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए, आधुनिक ऐतिहासिक अभिलेख के रूप में नहीं।
यहीं हुई थी कृष्ण और सुदामा की मित्रता
सांदीपनि आश्रम केवल श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली के रूप में ही नहीं, बल्कि कृष्ण-सुदामा की मित्रता से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है।
उज्जैन जिले की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार श्रीकृष्ण और सुदामा ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी। आश्रम परिसर में आज भी श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा और गुरु सांदीपनि से जुड़ी प्रतिमाएं और धार्मिक स्थल मौजूद हैं।
नारायणा धाम से भी जुड़ी है दोस्ती की कहानी
उज्जैन से कुछ दूरी पर महिदपुर क्षेत्र का नारायणा धाम भी कृष्ण और सुदामा की मित्रता से जुड़ी परंपराओं के कारण जाना जाता है। स्थानीय मान्यता है कि गुरु के आदेश पर श्रीकृष्ण और सुदामा लकड़ियां लेने निकले थे और इस दौरान नारायणा क्षेत्र में उन्होंने समय बिताया था। इसी प्रसंग को कृष्ण-सुदामा की मित्रता की प्रचलित कथाओं से जोड़ा जाता है। इस जन्माष्टमी पर नारायणा धाम में भी कृष्ण-सुदामा के इन्हीं प्रसंगों को नृत्य-नाटिका और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए मंच पर उतारा जा रहा है।
नीले मखमली वस्त्रों में होंगे कृष्ण-बलराम-सुदामा
इस बार जन्माष्टमी पर सांदीपनि आश्रम में भगवान के श्रृंगार को खास बनाया गया है। श्रीकृष्ण, बलराम, सुदामा, गुरु सांदीपनि और गुरु माता के लिए नीले रंग के मखमली वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं। इन पर मोतियों, रेशमी धागों और जरदोजी का काम किया गया है। सजावट का सामान सूरत, जयपुर और कोलकाता से मंगाए जाने की जानकारी है। जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु इसी विशेष स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे।
लड्डू गोपाल के लिए सफेद-गुलाबी पोशाक
जन्मोत्सव की आधी रात पालने में विराजने वाले लड्डू गोपाल के लिए अलग पोशाक तैयार की गई है। लड्डू गोपाल को सफेद और गुलाबी रंग के विशेष वस्त्र पहनाए जाएंगे। इसके साथ मुकुट, हार और दूसरी श्रृंगार सामग्री भी तैयार की जा रही है। मंदिर प्रबंधन के मुताबिक 3 सितंबर तक श्रृंगार से जुड़ी तैयारियां पूरी करने का लक्ष्य रखा गया था।
सांदीपनि आश्रम में तीन दिन का श्रीकृष्ण पर्व
जन्माष्टमी के साथ सांदीपनि आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक तीन दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन भी चल रहा है। कार्यक्रम रोज शाम 4 बजे शुरू हो रहा है। इसमें भजन गायन, लोकगायन और श्रीकृष्ण से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम रखे गए हैं। 4 सितंबर को गुरु सांदीपनि से श्रीकृष्ण की शिक्षा और 64 कलाओं की धार्मिक परंपरा पर आधारित विशेष नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।
अंकपात से भी जुड़ी है अनोखी मान्यता
आश्रम के पास का क्षेत्र अंकपात कहलाता है। जिला प्रशासन के आधिकारिक विवरण के मुताबिक यहां एक पत्थर पर 1 से 100 तक अंक पाए जाते हैं, जिन्हें परंपरा में गुरु सांदीपनि से जोड़ा जाता है। एक मान्यता यह भी है कि श्रीकृष्ण अपनी लेखन पट्टी यहां धोया करते थे और इसी कारण क्षेत्र को अंकपात नाम मिला।
गोमती कुंड भी आश्रम की पहचान
सांदीपनि आश्रम परिसर में स्थित गोमती कुंड भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। जिला प्रशासन के अनुसार पुराणों में वर्णित इस कुंड को प्राचीन समय में आश्रम की जलापूर्ति से जोड़ा जाता है। कुंड के पास स्थित नंदी प्रतिमा को शुंग काल से संबंधित बताया गया है। यानी सांदीपनि आश्रम केवल धार्मिक आस्था का स्थल नहीं, बल्कि उज्जैन की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है।
जन्माष्टमी पर सुबह से रात तक दर्शन
4 सितंबर को जन्माष्टमी के अवसर पर सांदीपनि आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना और आरती की तैयारी है। श्रद्धालु सुबह से रात तक दर्शन कर सकेंगे और जन्मोत्सव के कार्यक्रमों में शामिल हो पाएंगे। श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली होने के कारण जन्माष्टमी के दिन यहां उज्जैन के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की भी विशेष मौजूदगी रहती है।
उज्जैन में इसलिए खास है जन्माष्टमी
महाकाल की नगरी उज्जैन को आमतौर पर भगवान शिव से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस शहर का श्रीकृष्ण से भी गहरा धार्मिक संबंध है। सांदीपनि आश्रम उनकी शिक्षा से, नारायणा धाम सुदामा के साथ उनकी मित्रता की परंपरा से और गोपाल मंदिर कृष्ण भक्ति से जुड़ा प्रमुख स्थल है। यही वजह है कि जन्माष्टमी पर उज्जैन में महाकाल की नगरी के साथ ‘कृष्ण की शिक्षास्थली’ का स्वरूप भी दिखाई देता है।