बेंगलुरु: आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले में कथित जल्दबाजी में अंतिम संस्कार से जुड़े नए मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पानीहाटी नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन और तृणमूल कांग्रेस नेता सोमनाथ दे को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया है। वह इस मामले में दर्ज नई एफआईआर में नामजद तीन आरोपियों में से एक थे और गिरफ्तारी के बाद से फरार बताए जा रहे थे। पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर खरदह थाने में दर्ज नई एफआईआर में सोमनाथ दे के अलावा पूर्व टीएमसी विधायक निर्मल घोष और पीड़िता के पड़ोसी संजिब मुखर्जी को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तीनों ने कथित तौर पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में भूमिका निभाई और सबूतों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से शव का जल्द अंतिम संस्कार कराया गया।
बेंगलुरु में बदल रहा था ठिकाना
पुलिस के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने के बाद सोमनाथ दे गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार था। जांच टीम ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए उसकी गतिविधियों पर नजर रखी और बेंगलुरु में उसका पता लगाया। इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड के जरिए पश्चिम बंगाल लाने और बैरकपुर जिला अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है। इसके बाद जांच अधिकारी उससे पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत की मांग कर सकते हैं।
जल्दबाजी में अंतिम संस्कार को लेकर क्या है आरोप?
नई एफआईआर का मुख्य केंद्र अगस्त 2024 में आरजी कर पीड़िता के शव का पानीहाटी श्मशान घाट में कथित रूप से जल्द अंतिम संस्कार किया जाना है। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जल्दबाजी की गई और इससे संभावित साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका पैदा हुई। पुलिस ने भी श्मशान घाट की उस दिन की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि शव को अन्य शवों से पहले अंतिम संस्कार के लिए क्यों ले जाया गया और संबंधित दस्तावेजों पर किन लोगों ने हस्ताक्षर किए थे।
एफआईआर में तीन नाम, दो पहले ही गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को नामजद किया था। इनमें पूर्व पानीहाटी विधायक निर्मल घोष, पूर्व नगरपालिका पार्षद संजीब मुखर्जी और सोमनाथ दे शामिल हैं। निर्मल घोष को अगस्त में ओडिशा के बालासोर से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद संजीब मुखर्जी को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सोमनाथ दे की गिरफ्तारी के बाद अब तीनों नामजद आरोपी पुलिस की कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर?
खरदह थाने में दर्ज नई एफआईआर में आपराधिक साजिश, सबूत मिटाने या गायब करने, गलत रिकॉर्ड तैयार करने, गलत तरीके से रोकने समेत कई प्रावधान लगाए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक एफआईआर में सार्वजनिक पद के दुरुपयोग और शव के अंतिम संस्कार से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। हालांकि, इन धाराओं में मामला दर्ज होना आरोपों की जांच की शुरुआत है। आरोप साबित होना अभी बाकी है और अदालत में मामले की आगे की सुनवाई तथा जांच के आधार पर ही जिम्मेदारी तय होगी।
अब सोमनाथ दे से होगी पूछताछ
सोमनाथ दे की गिरफ्तारी के बाद जांचकर्ताओं के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि 9 अगस्त 2024 को पीड़िता के शव को पानीहाटी श्मशान घाट ले जाने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका थी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि उस समय किन अधिकारियों, स्थानीय नेताओं और अन्य लोगों के साथ उनकी बातचीत हुई थी और श्मशान घाट से जुड़े दस्तावेज किस तरह तैयार किए गए। जांच एजेंसियां फोन रिकॉर्ड, दस्तावेजों और उस दिन मौजूद लोगों के बयानों को भी जांच का हिस्सा बना सकती हैं।
आरजी कर मामले में फिर तेज हुई जांच
आरजी कर मामले में यह नया घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब पीड़िता के परिवार की शिकायत के बाद अंतिम संस्कार की परिस्थितियों की दोबारा जांच शुरू की गई है। पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में कोई नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं और यदि हुआ तो इसके लिए कौन जिम्मेदार था। सोमनाथ दे की गिरफ्तारी के साथ इस नई जांच में अब तीनों नामजद आरोपियों की भूमिका की पड़ताल संभव होगी। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।