नई दिल्ली - देश में अंडों की बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे लोगों की खरीदारी की आदतों पर दिखाई देने लगा है। लोकलसर्किल्स के एक सर्वे के मुताबिक, अंडे खरीदने वाले करीब 48 प्रतिशत परिवारों ने कीमत बढ़ने के बाद या तो अंडों की मात्रा कम कर दी है या पहले की तुलना में कम बार खरीदारी कर रहे हैं। वहीं, 10 प्रतिशत परिवारों ने सस्ते विकल्प तलाशने या अंडे खरीदने के लिए दूसरे स्रोतों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
84% परिवारों ने महसूस की कीमत में बढ़ोतरी
सर्वे में शामिल परिवारों से पिछले छह महीनों के दौरान अंडों की कीमत में हुए बदलाव के बारे में पूछा गया। इसमें कुल 84 प्रतिशत लोगों ने किसी न किसी स्तर पर अंडों की कीमत बढ़ने की बात कही। वहीं, 22 प्रतिशत परिवारों के मुताबिक कीमतों में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा 31 प्रतिशत परिवारों ने अंडों के दाम में 10 से 25 प्रतिशत और इतने ही यानी 31 प्रतिशत परिवारों ने 25 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि महसूस की।
62% परिवारों ने बताई 10 से 50% तक की बढ़ोतरी
सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, 62 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि पिछले छह महीनों में अंडों की कीमत 10 से 50 प्रतिशत तक बढ़ी है। इनमें 31 प्रतिशत परिवारों ने 10-25 प्रतिशत और 31 प्रतिशत ने 25-50 प्रतिशत तक दाम बढ़ने की जानकारी दी। इसका सीधा असर उन परिवारों के बजट पर पड़ा है, जिनके रोजमर्रा के भोजन में अंडे नियमित रूप से शामिल हैं।
महंगाई के बीच खरीदारी का तरीका बदला
अंडों के दाम बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में परिवारों ने अपनी खरीदारी का तरीका बदल दिया है। करीब आधे अंडा खरीदने वाले परिवारों ने मात्रा या खरीदारी की आवृत्ति कम की है। कुछ परिवारों ने कीमत का बोझ कम करने के लिए सस्ते विकल्प या अलग-अलग स्रोतों से अंडे खरीदना शुरू किया है। सर्वे के आंकड़े संकेत देते हैं कि खाद्य महंगाई सिर्फ कीमत बढ़ने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों और रोजमर्रा के बजट पर भी पड़ता है।