मथुरा: भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव भव्य तरीके से मनाया जाएगा। जन्मोत्सव को लेकर श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की मध्यरात्रि में होने वाले मुख्य आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को 'गौ रक्षा-राष्ट्र रक्षा' के संकल्प को समर्पित किया गया है। जन्मोत्सव से एक दिन पहले गुरुवार शाम भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पोशाक और दिव्य श्रृंगार के दर्शन भक्तों को कराए गए। इस दौरान पूरा परिसर 'जय श्रीकृष्ण' के जयकारों से गूंज उठा।
200 किलो चांदी से सजा गर्भगृह
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के लिए जन्मस्थान परिसर की सजावट को इस बार विशेष रूप दिया गया है। गर्भगृह की भव्य सजावट में करीब 200 किलोग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया है। चांदी से की गई यह सजावट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। जन्मोत्सव की मध्यरात्रि में होने वाले मुख्य आयोजन के लिए भगवान के विशेष श्रृंगार, पूजा और दर्शन की सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
पंचरत्नी पोशाक में दर्शन देंगे लड्डू गोपाल
जन्मोत्सव की रात भगवान श्रीकृष्ण कलहंस पुष्प-बंगले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इस दौरान लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर के सचिव कपिल शर्मा के अनुसार, भगवान को पंचरत्नी पोशाक धारण कराई जाएगी। यह पोशाक समुद्र मंथन से प्राप्त रत्नों की भावना पर आधारित है। भगवान के सिर पर रत्नों से सजा आकर्षक मुकुट भी सुशोभित होगा। भगवान की पोशाक और मुकुट को ब्रज के कुशल कारीगरों ने तैयार किया है। इन्हें बनाने में कारीगरों ने कई महीनों तक मेहनत की है।
विशेष पोशाक के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु
जन्मोत्सव से पहले भगवान की विशेष पोशाक और श्रृंगार के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंचे। दिव्य श्रृंगार के दर्शन कर भक्त भाव-विभोर नजर आए। मंदिर परिसर में लगातार 'जय श्रीकृष्ण' के जयकारे गूंजते रहे। मथुरा में जन्मोत्सव के मुख्य आयोजन को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और जनसुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को बिना परेशानी भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन हो सकें।
आधी रात गूंजेगा 'नंद के आनंद भयो'
अब श्रद्धालुओं को उस पावन घड़ी का इंतजार है, जब 4 सितंबर की मध्यरात्रि श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा। जन्म के समय मंदिर परिसर 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' के जयघोष से गूंज उठेगा। 200 किलो चांदी से सजा गर्भगृह, भव्य सजावट और पंचरत्नी पोशाक में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन इस बार जन्मोत्सव को बेहद खास बनाने वाले हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन के साक्षी बनने के लिए तैयार हैं।