Rajasthan Nikay Chunav: राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर नामांकन वापसी के अंतिम दिन गुरुवार को कई शहरों में राजनीतिक माहौल गर्म रहा। प्रत्याशियों के नाम वापस लेने को लेकर कहीं भाजपा और आरएलपी कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई, तो कहीं प्रत्याशी के अचानक गायब होने से हड़कंप मच गया। नाथद्वारा में भाजपा प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने की खबर सामने आते ही दोनों प्रमुख दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। वहीं बाड़मेर में आरएलपी प्रत्याशी को नाम वापसी के लिए एसडीएम कार्यालय के भीतर ले जाने को लेकर विवाद हुआ। फतहनगर-सनवाड़ में कांग्रेस प्रत्याशी और उनके पति के कुछ समय के लिए गायब होने पर पार्टी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। इन घटनाओं ने नाम वापसी के आखिरी दिन निकाय चुनाव की सियासत को खासा गर्म कर दिया।
नाम वापसी के अंतिम दिन क्यों बढ़ा राजनीतिक तनाव?
निकाय चुनाव में नाम वापसी का आखिरी दिन प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम माना जाता है। इस दिन कई उम्मीदवार चुनावी मैदान से हटने का फैसला करते हैं, जिससे मुकाबले का पूरा समीकरण बदल सकता है। राजस्थान के अलग-अलग शहरों में भी गुरुवार को इसी दौरान राजनीतिक दलों के बीच खींचतान देखने को मिली। कई जगह प्रत्याशियों के नाम वापस लेने को लेकर समर्थक सक्रिय नजर आए और कुछ मामलों में स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
उदयपुर: कांग्रेस प्रत्याशी के गायब होने से मचा हड़कंप
फतहनगर-सनवाड़ नगरपालिका के वार्ड नंबर 20 में नामांकन वापसी के अंतिम दिन कांग्रेस प्रत्याशी रेखा वैष्णव और उनके पति के अचानक गायब होने की खबर से राजनीतिक हलचल तेज हो गई। बाद में दोनों वापस लौट आए। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर दबाव बनाने और कथित अपहरण का आरोप लगाया। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोप राजनीतिक दल की ओर से हैं। घटना को लेकर सामने आए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच या आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट होगी।
बाड़मेर में एसडीएम कार्यालय के बाहर धक्का-मुक्की
बाड़मेर नगर परिषद के वार्ड नंबर 43 में आरएलपी प्रत्याशी धर्माराम प्रजापत के नामांकन वापस लेने को लेकर भाजपा और आरएलपी कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हो गया। जानकारी के मुताबिक, धर्माराम प्रजापत नामांकन वापस लेने के लिए एसडीएम कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष स्वरूप सिंह उन्हें कार्यालय के अंदर ले जाने लगे। आरएलपी समर्थकों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच करीब पांच मिनट तक खींचतान और धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने की कोशिश की। बाद में भाजपा पदाधिकारी धर्माराम प्रजापत को कार्यालय के भीतर ले गए और उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। धर्माराम ने चुनाव से हटने के पीछे परिवार और जनता का साथ नहीं मिलने की बात कही। उन्होंने भाजपा को समर्थन देने का भी निर्णय बताया।
नाथद्वारा में भाजपा प्रत्याशी को कार्यकर्ताओं ने घेरा
राजसमंद जिले के नाथद्वारा में भी नाम वापसी के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। वार्ड नंबर 23 से भाजपा प्रत्याशी दिनेश प्रजापत नामांकन वापस लेने के लिए उपखंड कार्यालय पहुंचे थे। जैसे ही भाजपा कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने प्रत्याशी को घेर लिया। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। दोनों दलों के समर्थकों के आमने-सामने आने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मामला बढ़ता देख पुलिस ने दिनेश प्रजापत को अपने साथ ले लिया। बताया गया कि देर शाम तक उनके परिजन भी संबंधित कार्यालय में मौजूद रहे।
टोंक में वार्ड-2 का चुनाव ही नहीं होगा
टोंक परिषद के वार्ड नंबर 2 में मामला राजनीतिक विवाद से आगे बढ़कर चुनाव बहिष्कार तक पहुंच गया। परिसीमन के दौरान ग्राम पंचायत डारडाहिंद को वार्ड नंबर 2 में शामिल किया गया था। इसके विरोध में गांव में पहले से आंदोलन चल रहा था। इस वार्ड से कांग्रेस ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था, जबकि भाजपा और कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी के अंतिम दिन भाजपा प्रत्याशी सुनीता के अलावा निर्दलीय उम्मीदवार गायत्री चौधरी, विमला और सुमन ने भी अपने नाम वापस ले लिए। सभी प्रमुख उम्मीदवारों के मैदान से हटने के बाद वार्ड नंबर 2 में मतदान नहीं होगा।
नाम वापसी ने बदले कई वार्डों के चुनावी समीकरण
राजस्थान निकाय चुनाव में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही कई वार्डों में मुकाबले की तस्वीर बदल गई है। कहीं प्रत्याशियों के चुनाव मैदान से हटने के बाद सीधा मुकाबला बन गया, तो कहीं राजनीतिक दलों के बीच समर्थन और विरोध को लेकर नए समीकरण सामने आए। बाड़मेर और नाथद्वारा जैसे मामलों ने नाम वापसी की प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दलों की सक्रियता को भी सामने ला दिया। वहीं टोंक के वार्ड नंबर 2 में सभी प्रमुख उम्मीदवारों के नाम वापस लेने से चुनाव ही नहीं होने की स्थिति बन गई।
आरोपों के बीच अब चुनावी मुकाबले पर नजर
नाम वापसी का चरण पूरा होने के बाद अब राजनीतिक दलों का पूरा फोकस चुनाव प्रचार और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर रहेगा। हालांकि, नामांकन वापसी के दौरान सामने आए विवादों का असर स्थानीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां प्रत्याशियों के हटने या समर्थन बदलने से राजनीतिक समीकरण प्रभावित हुए हैं। अब देखना होगा कि चुनाव के अंतिम चरण में ये बदले हुए समीकरण किस दल और प्रत्याशी के पक्ष में जाते हैं।