वृंदावन, 4 सितंबर 2026 | ब्रजभूमि में आज कान्हा के जन्म की धूम है। वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। शुक्रवार रात ठाकुरजी का पंचामृत से महाभिषेक होगा। इसके बाद उन्हें जरी और नगों से सजी खास पीले रंग की नई पोशाक पहनाकर बाल स्वरूप में दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। इस जन्मोत्सव की सबसे खास बात साल में सिर्फ एक बार होने वाली मंगला आरती है। नवीनतम हाई पावर कमेटी की व्यवस्था के मुताबिक मध्यरात्रि के बाद मंगला आरती के विशेष दर्शन के लिए केवल 600 पासधारी श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।
रात 11:45 बजे मंदिर में प्रवेश करेंगे सेवायत
ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के सेवायत एवं हाई पावर कमेटी के सदस्य हिमांशु गोस्वामी के मुताबिक रात करीब 11:45 बजे सेवायत गोस्वामी मंदिर में प्रवेश करेंगे। इसके बाद ठाकुरजी की जन्मोत्सव वाली विशेष सेवा शुरू होगी।
मध्यरात्रि में ठाकुरजी का महाभिषेक किया जाएगा। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और जल का इस्तेमाल मंदिर की परंपरा का हिस्सा है। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट भी जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में होने वाले महाभिषेक का उल्लेख करती है।
करीब 20 मिनट चलेगा महाभिषेक
सेवायतों के अनुसार जन्माष्टमी पर रात करीब 12 बजे ठाकुरजी का विशेष महाभिषेक शुरू होगा, जो लगभग 20 मिनट तक चलेगा। बांके बिहारी मंदिर में ऐसा विशेष महाभिषेक साल में प्रमुख अवसरों पर ही किया जाता है। जन्माष्टमी के बाद ठाकुरजी का बाल स्वरूप में श्रृंगार होगा।
नई पीली पोशाक में दर्शन देंगे बांके बिहारी
इस बार ठाकुरजी के लिए दिल्ली के कारीगरों ने बेहद खास पीले रंग की पोशाक तैयार की है। जरी के कपड़े पर जरदोजी और नगों का काम किया गया है। जन्माष्टमी और नंदोत्सव के लिए कुल तीन नई पोशाकें तैयार कराई गई हैं। इन्हें तैयार करने में करीब एक दर्जन कारीगरों को ढाई महीने लगे और तीनों पोशाकों की कुल कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है।
साल में सिर्फ जन्माष्टमी पर होती है मंगला आरती
बांके बिहारी मंदिर की परंपरा दूसरे मंदिरों से काफी अलग है। यहां सामान्य दिनों में सुबह मंगला आरती नहीं की जाती। मंदिर की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक जन्माष्टमी ही ऐसा अवसर है जब साल में एक बार मंगला आरती होती है। इसी वजह से देशभर से श्रद्धालु इस दुर्लभ आरती के दर्शन के लिए वृंदावन पहुंचते हैं।
सिर्फ 600 भक्तों को मिलेगी मंगला आरती में एंट्री
भारी भीड़ को देखते हुए इस बार मंगला आरती के दौरान प्रवेश सीमित रखा गया है। हाई पावर कमेटी की ओर से 600 विशेष पास जारी किए जाने की व्यवस्था है। बिना अधिकृत पास के किसी श्रद्धालु को मंगला आरती के दौरान मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं मिलेगा। सेवायत और उनके यजमान भी निर्धारित पास व्यवस्था के दायरे में रहेंगे।
1:45 बजे दर्शन, मंगला आरती के समय पर ये नया अपडेट
शुरुआती व्यवस्थाओं में मंगला आरती का समय रात 1:45 बजे बताया गया था। हालांकि 3 सितंबर को हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार से जुड़ी ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि 1:45 बजे विशेष दर्शन खुलेंगे और करीब 1:55 बजे मंगला आरती शुरू होगी। इसलिए मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए 1:45 बजे को प्रवेश/दर्शन की प्रमुख समय-सीमा मानते हुए मौके पर प्रशासन और मंदिर कमेटी की अंतिम घोषणा का पालन करना सबसे सही रहेगा।
पहली बार Live देख सकेंगे मंगला आरती
इस बार एक और खास व्यवस्था की जा रही है। भारी भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं से मंदिर पहुंचने के बजाय मंगला आरती का लाइव प्रसारण देखने की अपील की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक मंगला आरती के सीधे प्रसारण की व्यवस्था की जा रही है, ताकि सीमित प्रवेश के बावजूद ज्यादा से ज्यादा भक्त घर बैठे ठाकुरजी के दर्शन कर सकें।
सुबह तक होंगे विशेष दर्शन
मंगला आरती के बाद भी ठाकुरजी के विशेष दर्शन भोर तक जारी रहेंगे। नवीनतम व्यवस्थाओं में सुबह करीब 5 से 6 बजे तक विशेष दर्शन की बात कही गई है, जबकि पहले जारी स्थानीय कार्यक्रम में करीब 5:30 बजे पट बंद होने का उल्लेख था। इसके बाद मंदिर निर्धारित दैनिक समय के अनुसार फिर खुलेगा।
5 सितंबर को मनेगा नंदोत्सव
जन्माष्टमी के अगले दिन यानी शनिवार, 5 सितंबर को नंदोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक नंदोत्सव में ठाकुरजी जगमोहन में विराजमान रहते हैं। मंदिर परिसर में बधाई गीत गाए जाते हैं और मिठाई, फल, कपड़े, खिलौने व दूसरी वस्तुएं प्रसाद स्वरूप बांटने की परंपरा है।
क्यों इतनी खास है वृंदावन की जन्माष्टमी?
बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी केवल श्रीकृष्ण जन्म का पर्व नहीं, बल्कि मंदिर की सबसे दुर्लभ सेवाओं में से एक को देखने का अवसर भी है। सामान्य दिनों में जिस ठाकुरजी को सुबह जल्दी नहीं जगाया जाता, वही जन्माष्टमी की रात बाल स्वरूप में विशेष श्रृंगार के बाद भक्तों को दर्शन देते हैं और साल की एकमात्र मंगला आरती होती है। यही वजह है कि 4 और 5 सितंबर की यह रात वृंदावन के भक्तों के लिए बेहद खास मानी जाती है।