MP Nagar Nikay Chunav 2027: मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों की चर्चा के साथ ही ग्वालियर नगर निगम के वार्डों का मौजूदा गणित राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। नगर निगम के 66 वार्डों में मतदाताओं की संख्या में इतना बड़ा अंतर है कि सबसे बड़े और सबसे छोटे वार्ड के बीच करीब पांच गुना का फर्क दिखाई देता है। परिसीमन को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से मिले संकेतों के बाद नगर निगम स्तर पर आंकड़ों की पड़ताल और प्रारंभिक होमवर्क शुरू होने की बात सामने आई है। हालांकि जनगणना को लेकर तकनीकी और कानूनी पेच के चलते अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वार्डों की सीमाओं में कितना बदलाव होगा।
परिसीमन की चर्चा से क्यों बदल रहा है चुनावी गणित?
ग्वालियर नगर निगम में लंबे समय से वार्ड सीमाओं के नए सिरे से निर्धारण की प्रक्रिया नहीं हुई है। इसका असर मौजूदा वार्डों में मतदाताओं की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है। एक ओर कुछ वार्डों में 25 हजार से ज्यादा मतदाता हैं, वहीं कुछ वार्ड ऐसे भी हैं जहां मतदाताओं की संख्या 10 हजार से कम है। यही असमानता अब परिसीमन की संभावनाओं को लेकर चर्चा का प्रमुख कारण बन रही है। यदि वार्डों की सीमाओं में बदलाव होता है और एक इलाके को दूसरे वार्ड में जोड़ा या हटाया जाता है, तो इसका सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
जनगणना बनी परिसीमन के रास्ते की बड़ी अड़चन
नए परिसीमन को लेकर सबसे बड़ा सवाल जनगणना से जुड़ा है। नियमानुसार परिसीमन की प्रक्रिया राष्ट्रीय जनगणना के आंकड़ों के आधार पर की जाती है। फिलहाल फरवरी-मार्च 2027 में जनगणना पूरी होने का प्रस्ताव बताया जा रहा है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले वार्ड सीमाओं में बड़ा बदलाव करने पर कानूनी और प्रशासनिक पेच खड़ा होने की आशंका भी बनी हुई है। इसी वजह से नगर निगम के स्तर पर तैयारियां और आंकड़ों की समीक्षा तो चल रही है, लेकिन अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है।
भोपाल से मिले संकेतों के बाद निगम ने शुरू की डेटा स्क्रूटनी
बताया जा रहा है कि शासन स्तर से ज्यादा मतदाताओं वाले वार्डों के बोझ को कम करने और छोटे वार्डों में संख्या को संतुलित करने के संबंध में दिशा-निर्देश मिले हैं। इसके तहत बड़े वार्डों के कुछ मोहल्लों को आसपास के छोटे वार्डों में शामिल किए जाने की संभावनाओं पर आंकड़ों की जांच की जा रही है। अगर यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो कई मौजूदा वार्डों की सीमाएं और वहां के चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
दावेदारों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
परिसीमन की चर्चा ने उन नेताओं की चिंता बढ़ा दी है जो लंबे समय से अपने वार्ड में चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। किसी बड़े वार्ड में हजारों अतिरिक्त मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए अधिक संसाधन, कार्यकर्ताओं और समय की जरूरत होती है। वहीं अगर परिसीमन के दौरान मोहल्लों की सीमाएं बदल गईं तो नेताओं द्वारा बनाए गए मौजूदा संपर्क और राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि संभावित प्रत्याशी अब वार्डों की सीमाओं और मतदाता संख्या से जुड़ी हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।
ग्वालियर के वार्डों में 5 गुना तक वोटरों का अंतर
मौजूदा आंकड़ों में ग्वालियर नगर निगम के सबसे अधिक और सबसे कम मतदाता वाले वार्डों के बीच बड़ा अंतर सामने आता है।
सबसे ज्यादा मतदाताओं वाले वार्ड
वार्ड 18 तिलक वार्ड — 36,824 मतदाता
वार्ड 5 तामेश्वर — 27,720 मतदाता
वार्ड 52 जगजीवन — 27,091 मतदाता
वार्ड 65 गिरवाई — 25,744 मतदाता
वार्ड 19 महाराणा प्रताप — 25,117 मतदाता
इन आंकड़ों के मुताबिक कुछ बड़े वार्डों में मतदाताओं की संख्या 25 हजार से भी अधिक है।
सबसे कम मतदाताओं वाले वार्ड
वार्ड 40 ढोली बुआ मठ — 7,330 मतदाता
वार्ड 42 संत झूलेलाल — 7,372 मतदाता
वार्ड 59 हरिसिंह — 7,704 मतदाता
वार्ड 66 नौगांव — 8,265 मतदाता
वार्ड 50 मंसूर शाह दाता — 8,296 मतदाता
इस तरह सबसे अधिक मतदाताओं वाले वार्ड और सबसे कम मतदाताओं वाले वार्ड के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
36 हजार बनाम 7 हजार वोटर ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
वार्ड 18 में जहां 36,824 मतदाता बताए गए हैं, वहीं वार्ड 40 में यह संख्या 7,330 है। यानी दोनों के बीच मतदाताओं की संख्या में कई गुना का अंतर है। ऐसे में यदि परिसीमन के जरिए वार्डों की आबादी और मतदाता संख्या को संतुलित करने की कोशिश होती है तो कई संभावित प्रत्याशियों के लिए चुनावी मैदान का मौजूदा समीकरण बदल सकता है।
10 से ज्यादा वार्डों में 10 हजार से भी कम मतदाता
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ग्वालियर नगर निगम में कई वार्ड ऐसे हैं जहां मतदाताओं की संख्या 10 हजार से कम है। दूसरी ओर कुछ वार्डों में यह संख्या 25 हजार से ऊपर पहुंच चुकी है। यही असमानता परिसीमन की जरूरत को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का आधार बन रही है। हालांकि अंतिम फैसला होने से पहले वार्डवार आंकड़ों, सीमाओं और संबंधित क्षेत्रों की स्थिति का विस्तृत परीक्षण किया जाना बाकी है।
राजनीतिक दलों से भी ली जाएगी राय
नगर निगम स्तर पर प्रारंभिक तैयारियां और आंकड़ों का विश्लेषण जारी है। अपर आयुक्त प्रदीप तोमर के मुताबिक आगे सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। उनकी राय और सहमति के बाद परिसीमन से संबंधित प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर आगे भेजे जाने की बात कही गई है। इससे साफ है कि फिलहाल प्रक्रिया शुरुआती स्तर पर है और आने वाले समय में होने वाली बैठकों के बाद ही वार्डों की सीमाओं को लेकर स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी।
क्या परिसीमन से बदलेंगे 2027 के चुनावी समीकरण?
ग्वालियर नगर निगम के मौजूदा मतदाता आंकड़े यह संकेत जरूर दे रहे हैं कि वार्डों के आकार और मतदाता संख्या में काफी अंतर है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगामी नगरीय निकाय चुनाव से पहले इस असंतुलन को दूर करने के लिए किस स्तर तक बदलाव किया जाता है। अगर परिसीमन आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल वार्ड की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संभावित प्रत्याशियों की दावेदारी, राजनीतिक समीकरण और चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल निगाहें नगर निगम की आगामी बैठकों और परिसीमन को लेकर सामने आने वाले आधिकारिक प्रस्ताव पर टिकी हैं।