Nepal Flood Update: नेपाल में भोटेकोशी नदी की विनाशकारी बाढ़ के 10 दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान पूरी तरह थमा नहीं है। आपदा के बाद अब तक 1,259 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5,300 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं। अब तक 12,038 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। वहीं, बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी राहत, बचाव और शवों की तलाश में जुटे हुए हैं। इस मुश्किल वक्त में भारत की ओर से नेपाल को लगातार मानवीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। गुरुवार रात दो C-130J विमानों के जरिए करीब 21.5 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंचाई गई।
21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में तैनात
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 21,402 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। इनमें शामिल टीमें अलग-अलग मोर्चों पर काम कर रही हैं। कहीं लापता लोगों की तलाश की जा रही है, तो कहीं राहत सामग्री पहुंचाने और बरामद शवों के प्रबंधन का काम चल रहा है। आपदा के कई दिन गुजर जाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का पता नहीं चल पाने के कारण सर्च ऑपरेशन लगातार जारी रखा गया है।
चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद
बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों में शवों की तलाश भी जारी है। अब तक चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। बरामद शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है। प्रशासन और बचाव टीमें एक तरफ लापता लोगों की तलाश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर बरामद शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास भी किया जा रहा है।
भारत ने भेजी राहत की छठी और सातवीं खेप
नेपाल में राहत अभियान के बीच भारत ने एक बार फिर मदद पहुंचाई है। गुरुवार रात भारत से भेजे गए छठे और सातवें राहत विमान काठमांडू पहुंचे। दोनों C-130J विमानों में कुल करीब 21.5 टन मानवीय सहायता थी। इसमें मेडिकल उपकरणों के अलावा फोरेंसिक किट और अन्य जरूरी सामान शामिल था। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने इसे रसुवा फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के राहत और बचाव प्रयासों में भारत के लगातार सहयोग का हिस्सा बताया।
26 अगस्त से लगातार नेपाल की मदद कर रहा भारत
भारत ने नेपाल में बाढ़ के बाद 26 अगस्त से राहत अभियान के तहत सहायता भेजना शुरू किया था। पहले विमान के जरिए करीब 10 टन राहत सामग्री भेजी गई थी। इसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं। इसके बाद 27 अगस्त को करीब 37.5 टन, तीसरे विमान से 10 टन और 30 अगस्त को चौथे विमान से 11 टन राहत सामग्री भेजी गई। चौथी खेप में सर्च एंड रेस्क्यू उपकरणों के साथ DNA विश्लेषण में सहायता के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी भेजी गई थी। वहीं 2 सितंबर को भेजे गए पांचवें राहत विमान में 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और करीब 5.5 टन जरूरी दवाइयां शामिल थीं।
बाढ़ की वजहों को समझने में जुटे विशेषज्ञ
भोटेकोशी आपदा के कारणों का पता लगाने के लिए नेपाल में विशेषज्ञों की टीमें अध्ययन कर रही हैं। जलवायु वैज्ञानिकों के साथ पर्वतीय और हिमनद विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अचानक आई इस विनाशकारी बाढ़ के पीछे प्राकृतिक परिस्थितियों की क्या भूमिका रही और जलवायु परिवर्तन का कितना प्रभाव हो सकता है। इस अध्ययन के जरिए भविष्य में ऐसी आपदाओं के जोखिम को समझने और उससे निपटने की तैयारियों को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
नेपाल में राहत सामग्री के वितरण के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था
नेपाल सरकार ने राहत सामग्री के वितरण को व्यवस्थित करने के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है। इसके साथ ही लोगों से मिलने वाली आर्थिक सहायता को प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में जमा कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों तक मदद को व्यवस्थित तरीके से पहुंचाया जा सके।
UN में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठा सकते हैं PM बालेन
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में जलवायु परिवर्तन और पर्वतीय क्षेत्रों पर इसके असर का मुद्दा उठा सकते हैं। रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद शाह ने महासभा में शामिल होने की इच्छा जताई है। इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने न्यूयॉर्क दौरे की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पहले प्रधानमंत्री शाह के महासभा में शामिल नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद कैबिनेट ने विदेश मंत्री शिशिर खनाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया था। अब बाढ़ और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की संभावना ने इस दौरे को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
आगे की चुनौती लापता लोगों की तलाश और पुनर्वास की
नेपाल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती हजारों लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और बाढ़ से तबाह हुए क्षेत्रों को दोबारा सामान्य स्थिति में लाना है। वहीं भारत समेत विभिन्न स्तरों से मिल रही मानवीय सहायता राहत अभियान को मजबूती दे रही है। आने वाले दिनों में विशेषज्ञों की जांच से आपदा के कारणों और भविष्य के जोखिमों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।