ग्वालियर, 4 सितंबर 2026 | कान्हा के जन्मोत्सव पर आज ग्वालियर का ऐतिहासिक गोपाल मंदिर एक बार फिर रियासतकालीन वैभव में नजर आएगा। फूलबाग स्थित मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण का शृंगार सोने, हीरे, पन्ने, मोती, माणिक और पुखराज से जड़े उन बेशकीमती आभूषणों से किया जाएगा, जिनकी मौजूदा अनुमानित कीमत ₹120 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। इन दुर्लभ आभूषणों के दर्शन के लिए आज बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना है। नगर निगम की तैयारियों के मुताबिक जन्माष्टमी महोत्सव दोपहर से भव्य रूप में शुरू होगा। मंदिर को फूलों, रोशनी और रंगोली से सजाया जा रहा है, जबकि भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
बैंक के लॉकर से निकलेगा राधा-कृष्ण का 'खजाना'
राधा-कृष्ण के ये ऐतिहासिक आभूषण सामान्य दिनों में मंदिर में नहीं रखे जाते। सुरक्षा कारणों से इन्हें Central Bank of India के लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है। आज सुबह करीब 10 बजे नगर निगम आयुक्त की ओर से गठित समिति बैंक पहुंचेगी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत लॉकर खोला जाएगा और आभूषणों को कड़ी सुरक्षा में गोपाल मंदिर लाया जाएगा। मंदिर पहुंचने के बाद गहनों की सफाई और जांच होगी, जिसके बाद इन्हीं से भगवान राधा-कृष्ण का राजसी शृंगार किया जाएगा।
62 मोती और 55 पन्नों वाला हार सबसे खास
भगवान के खजाने में कई ऐतिहासिक आभूषण हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सात लड़ियों वाले हार की होती है। इस हार में 62 असली मोती और 55 पन्ने जड़े बताए जाते हैं। इसकी मौजूदा अनुमानित कीमत करीब ₹35 करोड़ आंकी गई है। इसके अलावा रत्नों से जड़े मुकुट की कीमत करीब ₹25 करोड़ और सोने के एक मुकुट की कीमत करीब ₹1.25 करोड़ बताई जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण के आभूषणों में पुखराज, माणिक और पन्ने जैसे कीमती रत्न शामिल हैं।
राधारानी के मुकुट पर भी टिकेंगी निगाहें
जन्माष्टमी पर राधारानी का शृंगार भी बेहद खास रहेगा। उनके लिए करीब तीन तोला वजन का रत्नजड़ित मुकुट रखा गया है। इसके अलावा हार, कंगन, नथ और दूसरे रियासतकालीन आभूषण भी शृंगार का हिस्सा बनते हैं। जन्माष्टमी के दिन ही भक्तों को इन दुर्लभ गहनों से सजे राधा-कृष्ण के दर्शन का विशेष अवसर मिलता है।
सिंधिया राजघराने से जुड़ा है आभूषणों का इतिहास
ग्वालियर के गोपाल मंदिर और इसके आभूषणों का इतिहास सिंधिया राजघराने से जुड़ा है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक फूलबाग स्थित गोपाल मंदिर की स्थापना 1921 में तत्कालीन ग्वालियर शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने कराई थी। भगवान के लिए पूजा के चांदी के बर्तन और रत्नजड़ित सोने के आभूषण भी सिंधिया राजपरिवार की ओर से तैयार कराए गए थे। आभूषणों में सोने का मुकुट, सोने की बांसुरी, मोतियों-पन्नों के हार, नथ, कंठी, कड़े और पूजा में इस्तेमाल होने वाली सोने-चांदी की कई वस्तुएं शामिल हैं।
आज ही क्यों खुलता है करोड़ों का खजाना?
सुरक्षा को देखते हुए इन बेशकीमती आभूषणों को सालभर बैंक लॉकर में रखा जाता है। जन्माष्टमी जैसे खास अवसर पर निर्धारित प्रक्रिया और अधिकारियों की मौजूदगी में इन्हें निकाला जाता है। पुरानी रिपोर्टों के मुताबिक 2007 से नगर निगम ने जन्माष्टमी पर इन्हीं ऐतिहासिक गहनों से राधा-कृष्ण का शृंगार कराने की परंपरा को नियमित रूप से फिर शुरू किया। इसी वजह से ग्वालियर में जन्माष्टमी का यह दर्शन सामान्य मंदिर उत्सव से अलग पहचान रखता है।
डेढ़ लाख भक्तों के पहुंचने का अनुमान
इस बार गोपाल मंदिर में करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। इतनी बड़ी भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और आसपास विशेष व्यवस्था की जा रही है। श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन कराने के लिए LED स्क्रीन लगाई जाएंगी, जिन पर मंदिर के अंदर के लाइव दर्शन दिखाए जाएंगे।
CCTV और पुलिस के पहरे में होगा पूरा मंदिर
करोड़ों रुपए के आभूषण और भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रहेगी। पुलिस बल तैनात रहेगा और CCTV कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के रास्ते अलग-अलग रखने की तैयारी है, ताकि मंदिर के भीतर दबाव न बढ़े और दर्शन की व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
फूल बंगला, रंगोली और रोशनी से सजेगा मंदिर
जन्माष्टमी के लिए गोपाल मंदिर को आकर्षक लाइटिंग से सजाया जा रहा है। मंदिर परिसर में फूल बंगला और विशेष रंगोली भी तैयार की जाएगी। राधा-कृष्ण का राजसी शृंगार पूरा होने के बाद मंदिर में जन्माष्टमी उत्सव पूरे वैभव के साथ चलेगा। नगर निगम की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक मुख्य उत्सव दोपहर 12 बजे से आयोजित किया जाना है।
100, 110 या 120 करोड़... गहनों की कीमत अलग-अलग क्यों?
इन आभूषणों की कीमत को लेकर अलग-अलग वर्षों में अलग आंकड़े सामने आते रहे हैं। 2025 की रिपोर्टों में इनकी अनुमानित कीमत ₹100 से ₹110 करोड़ के आसपास बताई गई थी, जबकि 2026 की ताजा रिपोर्ट में मौजूदा बाजार भाव के आधार पर इनकी कीमत ₹120 करोड़ से अधिक आंकी जा रही है। इसलिए ₹120 करोड़ को किसी आधिकारिक नीलामी मूल्य के बजाय मौजूदा अनुमानित बाजार मूल्य के रूप में लिखना ज्यादा सही होगा।
आज ग्वालियर में दिखेगा आस्था और राजसी परंपरा का संगम
जन्माष्टमी के दिन गोपाल मंदिर में सिर्फ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव ही नहीं मनाया जाता, बल्कि ग्वालियर की रियासतकालीन विरासत भी एक बार फिर जीवंत हो उठती है। एक ओर करोड़ों रुपए के प्राचीन आभूषणों में सजे राधा-कृष्ण होंगे तो दूसरी ओर फूलों, रोशनी और भक्ति के बीच हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन करेंगे। यही परंपरा ग्वालियर की जन्माष्टमी को प्रदेश के दूसरे आयोजनों से अलग बनाती है।