Jaipur: राजस्थान चुनाव आते ही सियासत में उथल-पूथल (Rajasthan News) का दौर शुरू हो गया है। ऐसा ही एक मामला सामने आया जब कांग्रेस विधायक वीरेंद्र सिंह की पत्नी डॉ. रीटा सिंह ने दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी (JJP) जॉइन कर सबको चौंका दिया है। बता दें कि उन्हें पार्टी की प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष का पद दिया गया है। रीटा सिंह ने नई पार्टी जॉइन करते ही उसी दांतारामगढ़ सीट से अपनी दावेदारी जताई है, जहां से उनके पति विधायक हैं। अगर कांग्रेस वीरेंद्र सिंह को टिकट देकर चुनाव लड़वाती है तो उनका सामना अपनी पत्नी से ही होगा। अब सवाल यह है कि पिछले कई दशकों से शेखावाटी में दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व पीसीसी अध्यक्ष चौधरी नारायण सिंह की बहू ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? क्या वह पति के सामने चुनावी ताल ठोकेंगी? कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब उन्होंने एक इंटरव्यू में दिए।
रिटा ने अचानक ये बड़ा फैसला क्यों?
जब रिटा सिंह से ये सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि- ये सवाल आना ही था। सबकुछ अचानक नहीं हुआ है। पिछले 5 साल में ऐसी परिस्थितियां बनी हैं। सीकर जिले में मेरा जो जिला प्रमुख का कार्यकाल रहा है, मैंने जो कार्य किए, उसी आधार पर कार्यकर्ताओं और मेरे शुभचिंतकों से विचार के बाद फैसला लिया है। तब जाकर हरियाणा में मजबूत कैडर की जननायक जनता पार्टी को चुना है।
रिटा ने अपने परिवार से अनबन पर कही ये बात
रिटा सिंह से उनके परिवार से अनबन के बारें में सवाल किया गया (Rajasthan News) तो उन्होंने कहा कि- ये तो निश्चित है कि मेरे ससुर जी आदरणीय चौधरी साहब ने मुझे राजनीति में पहला मौका दिया। पूरी जिंदगी मैं उनकी आभारी रहूंगी। दिल से उनका शुक्रिया करूंगी क्योंकि पहला पायदान उनका रहा है। उनका ऐसा नेचर है कि उन्होंने खुला मैदान दे दिया है। घोडे़ दे दिए। कहा कि जाओ अब काम करो। अच्छा तो ये होता कि परिवार का सानिध्य मिलता। हम उसी तरह से काम करते। उनकी सोच रही है कि ए्क मौका दे दिया है, अब काम करो। उसी हिसाब से आगे बढ़ चुकी हूं। खुद को फैसला लेना पड़ा। कोई गिला-शिकवा नहीं है। भविष्य बताएगा क्या होगा। मुझे कोई पछतावा या किसी से कोई शिकायत नहीं है। ये मेरा फैसला था, मुझे ही आगे लड़ना होगा। आपको बता दें कि रीटा के ससुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री नारायण सिंह दांतारामगढ़ सीट से कई बार विधायक रहे।
क्या पति के सामने चुनाव लड़ेगी रिटा?
रिटा सिंह ने पति के सामने चुनाव लड़ने को लेकर कहा कि- मेरे परिवार की पृष्ठभूमि दांतारामगढ़ से है। किसी कारणवश से मुझे पिछले चुनाव में टिकट से वंचित रखा गया। कांग्रेस पार्टी ने जो फैसला किया खैर वो परिवार से ही जुड़ा था। जो हुआ, सो हुआ। अब आगे तैयारी तो दांतारामगढ़ से ही रहेगी। वहीं से ही चुनाव लड़ने का फैसला किया है। जहां तक पति के सामने चुनाव लड़ने की बात है, सभी ये पूछ रहे हैं, लेकिन किसी को तो पहल करनी होगी। पूरी तरह से बदलाव करने के लिए आगे आना होता है। बदलाव जरूरी है। भविष्य में क्या रहेगा, मुझे नहीं पता है। अगर ऐसी परिस्थिति बनती है तो देखा जाएगा।
परिवार कई दशकों से कांग्रेस से जुड़ा है, आपके पति भी इसी सीट से विधायक हैं, तो क्या इसे बगावत समझें?
डॉ. रीटा सिंह ने बगावत से जुड़े सवाल पर कहा कि- मेरे पार्टी जॉइन करते ही लोगों की काफी प्रतिक्रियाएं आई हैं। मैं पूरी तरह से बगावत नहीं कहूंगी। मैंने जो कार्य किए हैं, उसे सभी ने देखा है। लोगों के मन में विचार है कि मुझे सेवा का मौका मिलना चाहिए। काफी लोगों ने प्रेशर भी बनाया कि आगे बढ़कर भागीदारी निभानी चाहिए। राजनीति में एक मौका जरूर मिलता है, तो मुझे सही समय पर मौका मिला है। इसीलिए ये ठोस कदम उठाना पड़ा।
नई पार्टी जॉइन करने पर क्या रिएक्शन आया?
नई पार्टी जॉइन करने के रिएक्शन पर डॉ. रीटा सिंह (Rajasthan News) ने कहा कि- जिस दिन से मैंने जेजेपी को जॉइन किया है लगातार दोस्तों और कार्यकर्ताओं के फोन और मैसेज आ रहे हैं। मेरे फैसले से काफी खुश हैं। शायद कोई दबी हुई बात थी जो मिलकर शुभकामनाएं दे रहे हैं। कोई नेगेटिव मैसेज नहीं है। कहते हैं कि जब एक पूरी कायनात मिल जाती है तो आपके साथ अच्छा होता है। मैंने अपने दिल की बात सुनी है। जो अच्छा लगा वही किया है। सभी पूरी तरह से फैसले से खुश है। शायद सभी चेंजेज देखना भी चाह रहे थे।
सीकर में दांतारामगढ़ के अलावा और भी सीटें हैं, जहां से पति विधायक वहीं से चुनाव क्यों?
डॉ. रीटा सिंह ने इसके जवाब में कहा कि- मैं जिला प्रमुख थी तो पूरा कार्यक्षेत्र सीकर जिला ही था। हर विधानसभा में लोगों से वन टू वन जुड़ाव रहा था। कार्यकर्ताओं से संपर्क रहा था। पंचायत चुनाव आए तो काफी लोगों ने कहा कि हमारे यहां से चुनाव लड़ लो। सभी जगहों पर लोगों से संपर्क था। कई सीटों से ऑफर भी मिले थे। पूरा सीकर मेरा अपना है। मुझे सीकर से बहुत प्यार मिला है। ऐसी कोई बात नहीं है।
आप पिछली बार भी दांतारामगढ़ से चुनाव लड़ने वाली थीं, कौनसे दबाव में फैसला बदला?
बता दें कि पिछली बार भी डॉ. रीटा सिंह दांतारामगढ़ (Rajasthan News) से चुनाव लड़ने वाली थीं लेकिन उन्होंने अपना फैसला बदल दिया था, इसे लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि- कांग्रेस आलाकमान ने भी फैसला लिया था कि मुझे चुनाव लड़वाया जाएगा, लेकिन ऐन वक्त पर फैसला बदल दिया गया। पिछली बार परिस्थिति ही ऐसी बनी थी। चूंकि परिवार से ही जुड़ा फैसला था। इसलिए थोड़ा बैक हो गए। उसके बाद भी मैं लगातार लोगों के संपर्क में रही हूं। केवल दांतारामगढ़ ही नहीं, पूरे सीकर जिले में लोगों के पास आना-जाना था। मेरे कार्यक्षेत्र को मैंने कभी नहीं छोड़ा।
पायलट और गहलोत की पार्टी क्यों नही की जॉइन
पायलट समर्थक हैं तो उनकी पार्टी जॉइन क्यों नहीं की? जब रिटा सिंह से ये सवाल किया गया कि तो उन्होंने कहा कि- मैंने गहलोत साहब, पायलट साहब दोनों के साथ काम किया है। प्रदेश सचिव भी रही हूं। परिवार भी कांग्रेस से जुड़ा था। करीब 30 सालों से कांग्रेस से जुड़ी रही हूं। डॉ. हरिसिंह लोकसभा चुनावों के दौरान एक बार घर पधारे थे। उन्हें चाय बना कर पिलाई तो बोले कि ये भी बहुत बड़ी सेवा है। इतने लोग आते हैं सभी को चाय पिला कर अपना धर्म निभाती रही। सेवाभाव से हमेशा कांग्रेस से जुड़ी रही हूं। मैंने हमेशा पार्टी के लिए मेहनत भी की। मुझे सच में पता नहीं, लेकिन उन्होंने कभी मौका नहीं दिया। मुझे पता नहीं क्यों?
जेजेपी का हरियाणा में बीजेपी से गठबंधन है, क्या राजस्थान में भी रहेगा?
डॉ. रीटा सिंह : हरियाणा में पार्टी का गठबंधन है,लेकिन राजस्थान (Rajasthan News) को लेकर क्या रणनीति रहेगी ये तो आलाकमान ही तय करेंगे। दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला मिलकर पार्टी को आगे बढ़ा रहे हैं। दोनों युवा हैं। कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं। अभी युवाओं को लेकर पार्टी में भी अच्छा माहौल है। रणनीति के तहत ही राजस्थान में आगे प्लान बनेगा। पार्टी मीटिंग होंगी। हम भी अपने सुझाव रखेंगे कि कहा गठबंधन होना है या नहीं। कैसे चुनाव लड़ना है, हम अपनी बात रखेंगे। फाइनल उनको ही करना है। राजस्थान को लेकर जो भी सुझाव मांगे जाएंगे, हम जरूर देंगे। जो भी फैसला होगा, अच्छा रहेगा।
भाजपा से गठबंधन नहीं होता है तो क्या सभी सीटों पर चुनाव लड़ा जाएगा?
भाजपा से गठबंधन नहीं होता है तो क्या सभी सीटों पर चुनाव लड़ा जाएगा? इसका जवाब देते हुए डॉ. रीटा सिंह ने कहा कि- मुझे लगता है कि हम राजस्थान में आए हैं। पार्टी अभी नई है, लेकिन पार्टी बहुत अच्छे तरीके से आगे बढ़ रही है। हरियाणा और राजस्थान का लगभग एक जैसा ही कल्चर है। खास तौर पर दोनों राज्यों के बॉर्डर के आसपास। भाषा भी एक जैसी है।
आपकी अब आगे की क्या रणनीति रहेगी?
आगे की रणनीति को लेकर डॉ. रीटा सिंह ने बताया कि- पार्टी ने बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी है। सीकर में मैं जिला प्रमुख रही हूं। समय-समय पर जनता के बड़े मुद्दे उठाए हैं। लोगों की मदद की है। 2013 में बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं अभियान से शुरुआत की थी। महिलाओं के लिए हमेशा तैयार रही हूं। उनकी आवाज उठाई है। अब आगे टीम तैयार करेंगे। ऐसी महिलाओं को पार्टी से जोडेंगे जो हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगी।
कुछ ऐसा रहा रिटा सिंह का राजनीतिक जीवन
रीटा सिंह ने पहली बार 1995 में पंचायत समिति का दांतारामगढ़ (Rajasthan News) से ही चुनाव लड़ा और बड़ी जीत दर्ज की थी। तब उन्होंने प्रधान की दावेदारी भी जताई थी, लेकिन दो वोटों से वह हार गई थीं। इसके बाद वीरेंद्र सिंह इसी सीट से अगले तीन चुनाव लड़े। तीनों ही बार जीते और प्रधान बने। 2004 में रीटा सिंह ने फिर से दांतारामगढ़ से पंचायत समिति का चुनाव लड़ा था। उन्होंने फिर से प्रधान के लिए दावेदारी की। इस बार भी वे प्रधान नहीं बन सकीं। दो वोटों से रह गईं और इस बार भी प्रेमलता ही प्रधान बनीं। 2010 में उन्होंने जिला परिषद का चुनाव लड़ा और इस बार वे जिला प्रमुख बनने में कामयाब हुईं। वे वर्ष 2015 तक सीकर की जिला प्रमुख रहीं। वर्ष 2014 में सचिन पायलट के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रहने के दौरान प्रदेश सचिव का पद संभाला। वर्ष 2018 में उनके पति वीरेंद्र सिंह दांतारामगढ़ से चुनाव जीत कर विधायक बने।
दार्जिलिंग से हुई शिक्षा, परिवार के चाय का बाग
रीटा सिंह ने पीएचड़ी कर रखी है। वे बताती हैं कि दार्जिलिंग से ही पूरी शिक्षा की थी। पिता स्व.मंगल सिंह के दार्जिलिंग में चाय बागान थे। वे दो बहनें और एक भाई हैं। भाई राजसिंह चौधरी मुंबई में एक्टर-डायरेक्टर हैं। फिल्मों को फाइनेंस भी करते हैं। बहन नीटा सिंह भी मुंबई में इंटीरियर डिजाइनर है। उन्होंने परिवार की प्रेरणा से राजनीति को चुना है।
हरियाणा में BJP गठबंधन, अब राजस्थान में एंट्री
इंडियन नेशनल लोकदल से अलग होकर दुष्यंत चौटाला ने 9 सितंबर 2018 को जननायक जनता पार्टी बनाई थी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र और अजय सिंह चौटाला के बेटे दुष्यंत चौटाला की पार्टी पहली बार चुनाव में उतरी और धमाकेदार एंट्री की। दुष्यंत सहित पार्टी के 10 विधायक जीते। भाजपा को समर्थन देकर गठबंधन सरकार बनाने वाले दुष्यंत चौटाला को उपमुख्यमंत्री बनाया गया।
दुष्यंत चौटाला भी चुनाव से पहले कर चुके राजस्थान के कई दौरे
अब जेजेपी की नजर राजस्थान की कई सीटों पर है। दुष्यंत चौटाला चुनाव से पहले राजस्थान के कई दौरे कर चुके हैं। जेजेपी का फोकस उन सीटों पर ज्यादा है, जो हरियाणा बॉर्डर से लगती हैं और बीजेपी वहां कमजोर है। हरियाणा से सटे श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अलवर, झुंझुनूं, सीकर सहित कई जिलों में 15 से 20 सीटों पर फोकस कर रही है। जाट बेल्ट होने के कारण नागौर पर इसका फोकस है। पहले इन जिलों की कुछ सीटों पर चौटाला परिवार की इनेलो पार्टी का भी दबदबा रहा है।