मां का स्वरुप
माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, इनका रंग काला है और ये अपने विशाल बालों को फैलाए हुए हैं। लेकिन माता अपने भक्तों को शुभफल प्रदान करती हैं। माता कालरात्रि के तीन नेत्र हैं और इनकी चार भुजाएं हैं। सिंह के कंधे पर सवार मां कालरात्रि का विकराल रूप अद्भुत हैं। उनके गले में मुंड माला रहती है। देवी कालरात्रि दाहिने हाथ की वरमुद्रा से वर देती हैं। उनके नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है, बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और नीचे वाले हाथ में लोहे की कटार है। माता माथे पर चन्द्रमा का मुकुट धारण किए हुए हैं।पूजा विधि
सुबह सूर्योदय से पूर्व उठें स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ सुथरे वस्त्र धारण करें।
इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें और गंगा जल का छिड़काव करें।
मां कालरात्रि का चित्र या तस्वीर स्थापित करें।
मां को रातरानी के पुष्प, रोली, फूल माला, अक्षत अर्पित करें।
धूप और दीपक प्रज्जवलित करें।
मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाएं।
मां कालरात्रि की आरती करें।
दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
इस मंत्र का करें जाप
इस मंत्र का करें जाप एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥