हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का पर्व अत्यंत पवित्र और श्रद्धा से मनाया जाता है। यह पर्व मां गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा करने से व्यक्ति को दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस दिन गंगा नदी और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।
कब है गंगा दशहरा 2026?
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 25 मई 2026 को प्रातः 4:30 बजे शुरू होगी और 26 मई को सुबह 5:10 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर गंगा दशहरा का पर्व 25 मई 2026 को मनाया जाएगा।
गंगा दशहरा का शुभ मुहूर्त
गंगा दशहरा पर स्नान और दान के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।
ब्रह्म मुहूर्त:
25 मई, प्रातः 4:30 बजे से 5:30 बजे तक
अमृत चौघड़िया:
प्रातः 5:25 बजे से 7:08 बजे तक
शुभ चौघड़िया:
प्रातः 8:51 बजे से 10:34 बजे तक
गंगा स्नान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा के दिन स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस अवसर पर “दशविध स्नान” का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं। इनमें शरीर से किए गए तीन पाप, वाणी से जुड़े चार पाप और मन से किए गए तीन पाप शामिल माने जाते हैं। इसी कारण गंगा दशहरा को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व भी कहा जाता है।
गंगा दशहरा पर करें दान-पुण्य
गंगा दशहरा के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धा अनुसार जल, अन्न, फल, वस्त्र और पूजा सामग्री का दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा घी, नमक, तेल, शक्कर और स्वर्ण का दान भी पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।
क्यों खास माना जाता है गंगा दशहरा?
पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा धरती पर आईं और उनके पूर्वजों का उद्धार किया। इसी वजह से यह दिन आस्था, तप, स्नान और पुण्य कर्मों के लिए बेहद शुभ माना जाता है।