कोलकाता डेस्क: हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाले कार्तिक मास को लेकर श्रद्धालुओं में आस्था और उत्साह का माहौल है। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा के अवसर पर कार्तिक स्नान की शुरुआत हो रही है। वहीं, उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की शुरुआत मंगलवार, 27 अक्टूबर से मानी जाएगी। इस पवित्र महीने में भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी सेवा, सुबह स्नान, दान और दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है।
कार्तिक मास में स्नान और दान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में सूर्योदय से पहले स्नान करना और जरूरतमंदों को दान देना पुण्यकारी माना जाता है। श्रद्धालु इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं। गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों के घाटों पर भी इस अवधि में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना रहती है।
घर और मंदिर में दीपदान की परंपरा
कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु शाम के समय घर, मंदिर और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाते हैं। कई स्थानों पर नदी और सरोवर के किनारे भी दीपदान किया जाता है। मान्यता है कि दीप प्रज्वलित करना शुभता, सकारात्मकता और आध्यात्मिक प्रकाश का प्रतीक है।
तुलसी पूजा और भगवान विष्णु की आराधना
कार्तिक मास को भगवान विष्णु की उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान तुलसी के पौधे की पूजा, दीपक जलाने और धार्मिक नियमों का पालन करने की परंपरा है। कई श्रद्धालु नियमित पूजा-पाठ के साथ सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय माना गया है।
कार्तिक मास 2026 कब तक रहेगा?
उत्तर भारत की पूर्णिमांत परंपरा के अनुसार, कार्तिक मास 27 अक्टूबर से शुरू होकर 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा। वहीं, अमांत पंचांग का पालन करने वाले गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में कार्तिक मास 10 नवंबर से 8 दिसंबर तक माना जाएगा। इसलिए कार्तिक मास की तारीख क्षेत्रीय पंचांग और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
कार्तिक पूर्णिमा पर होगा महीने का समापन
24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस अवसर पर स्नान, दान और दीपदान का विशेष धार्मिक महत्व रहेगा। कई स्थानों पर इस दिन देव दीपावली से जुड़े आयोजन भी होंगे। श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करेंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास आत्मसंयम, सेवा, भक्ति और सात्विक जीवनशैली अपनाने का अवसर है। हालांकि, पूजा-विधि और तिथियों के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग का पालन करना उचित रहेगा।