नई दिल्ली : भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। इंडियन सुपर लीग (ISL) का नया सीजन आगामी 10 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है, जो अगले साल मई महीने तक चलेगा। पिछले सीजन में प्रसारण (ब्रॉडकास्ट) को लेकर हुई समस्याओं और एफएसडीएल (FSDL) के हटने के बाद इस बार ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) और क्लबों का गठबंधन संयुक्त मॉडल के तहत इसका आयोजन कर रहा है। लीग को सुचारू रूप से चलाने के लिए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की गई है। इस बार कुल 13 टीमें पारंपरिक होम-अवे फॉर्मेट में कुल 163 मैच खेलेंगी।
टीवी के साथ-साथ आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी देख सकेंगे लाइव मैच
पिछले सीजन में प्रसारण को लेकर आई दिक्कतों से सबक लेते हुए इस बार प्रशंसकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है।अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) और आयोजकों की ओर से जानकारी दी गई है कि इस सीजन के मैचों का सीधा प्रसारण (Live Broadcast) टेलीविजन पर 'जी स्पोर्ट्स' (Zee Sports) चैनल पर किया जाएगा। इसके अलावा, खेल प्रेमियों की सुलभ पहुंच के लिए आईएसएल के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी सभी मैचों का सीधा प्रसारण उपलब्ध रहेगा।
जरूरी फीस न जमा करने पर डायमंड हार्बर एफसी बाहर, होगी डिमोट
प्रारंभिक योजना के अनुसार इस बार आईएसएल में 14 टीमों को हिस्सा लेना था, लेकिन आखिरी वक्त में कोलकाता की 'डायमंड हार्बर एफसी' (Diamond Harbour FC) को बाहर का रास्ता देखना पड़ा है।एआईएफएफ के अनुसार, क्लब अंतिम समय तक भागीदारी के लिए आवश्यक राशि जमा करने में विफल रहा। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि डायमंड हार्बर एफसी को रेलीगेशन (Relegation) के नियमों में कोई छूट नहीं दी जाएगी। उन्हें लीग तालिका में सबसे नीचे माना जाएगा और अगले सीजन में उन्हें सेकंड डिवीजन लीग में खेलना होगा।
163 मैचों का रोमांच, होम-अवे फॉर्मेट और प्लेऑफ का शेड्यूल
लीग का आयोजन पूरी तरह से पुराने और पारंपरिक फॉर्मेट पर होगा:
- कुल टीमें: 13
- कुल मुकाबले: 163 मैच
- टूर्नामेंट का स्वरूप: पारंपरिक होम-अवे फॉर्मेट
- शील्ड और कप विजेता: लीग चरण के अंत में तालिका में शीर्ष पर रहने वाली टीम को 'शील्ड चैंपियन' घोषित किया जाएगा। इसके बाद शीर्ष 6 टीमों के बीच 'आईएसएल कप' (ISL Cup) ट्रॉफी के लिए प्लेऑफ मुकाबले खेले जाएंगे।
पिछले सीजन की नाकामी से सीख लेकर बनाई गई संयुक्त रणनीति
उल्लेखनीय है कि पिछले सीजन में एफएसडीएल के अचानक हटने के कारण एआईएफएफ को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। उस समय स्थिति को संभालने के लिए केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया से हस्तक्षेप की गुहार लगानी पड़ी थी और अंततः टूर्नामेंट को सिंगल लेग फॉर्मेट में आयोजित करना पड़ा था।उस नाकामी और अव्यवस्था से सबक लेते हुए इस बार महासंघ और क्लबों ने शुरुआत से ही सतर्कता बरती है, ताकि देश की इस सबसे बड़ी फुटबॉल प्रतियोगिता का सफल संचालन हो सके।