नई दिल्ली - भारत के पूर्व क्रिकेटर और 1983 विश्व कप विजेता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए चुनी गई टीम पर सवाल उठाए हैं। श्रीकांत का मानना है कि आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार सीरीज में मिली हार के बाद भारतीय चयनकर्ताओं ने नए खिलाड़ियों को मौका देने के बजाय सुरक्षित विकल्प चुनना बेहतर समझा।
हार के बाद बदल गया सेलेक्शन का रवैया
भारत को आयरलैंड के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल सीरीज में 0-2 से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ भी टीम इंडिया 0-4 से सीरीज गंवा बैठी। श्रीकांत के मुताबिक इन नतीजों का असर चयनकर्ताओं के फैसले पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू सीरीज युवा खिलाड़ियों और नए विकल्पों को आजमाने के लिए शानदार मौका थी। ऐसी सीरीज में प्रयोग करने से टीम को भविष्य के लिए नए खिलाड़ी तैयार करने में मदद मिल सकती थी।
‘सेलेक्टर्स ने डर की वजह से चुनी मजबूत टीम’
श्रीकांत ने आरोप लगाया कि हालिया हार के दबाव में चयनकर्ताओं ने जोखिम लेने से परहेज किया। उनका कहना है कि अफगानिस्तान जैसी टीम के खिलाफ नए खिलाड़ियों को लगातार मौके दिए जा सकते थे, लेकिन इसके बजाय भारत ने लगभग अपनी मजबूत टीम ही मैदान में उतारने का फैसला किया। पूर्व क्रिकेटर ने इसे डर से लिया गया फैसला बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिम्बाब्वे सीरीज में नियमित खिलाड़ियों से अलग विकल्पों को आजमाने के बाद चयनकर्ता इतनी जल्दी अनुभवी खिलाड़ियों की ओर क्यों लौट आए।
श्रेयस अय्यर को मिली कप्तानी
BCCI की चयन समिति ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए 15 सदस्यीय टीम का ऐलान किया है। श्रेयस अय्यर को टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि तिलक वर्मा उपकप्तान होंगे। टीम में जसप्रीत बुमराह, संजू सैमसन, ईशान किशन, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, शिवम दुबे और वरुण चक्रवर्ती जैसे अनुभवी नाम भी शामिल हैं।
वैभव सूर्यवंशी को फिर मिला मौका
टीम में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी भी अपनी जगह बनाए रखने में सफल रहे हैं। जिम्बाब्वे सीरीज में उनके प्रदर्शन को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन्हें एक और अंतरराष्ट्रीय सीरीज में खुद को साबित करने का अवसर दिया है। श्रीकांत के मुताबिक, यही वह समय था जब टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं को भविष्य के खिलाड़ियों को ज्यादा मौके देने चाहिए थे। उनका मानना है कि लगातार मजबूत टीम के साथ उतरने से प्रयोग करने का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है।
‘हार के बाद की हताशा दिखाता है फैसला’
श्रीकांत ने चयनकर्ताओं के फैसले को आयरलैंड और इंग्लैंड में मिली हार के बाद की हताशा से जोड़ते हुए कहा कि टीम का चयन इंग्लैंड दौरे के लिए चुनी गई टीम से काफी मिलता-जुलता नजर आ रहा है। उनके मुताबिक, हार के बाद टीम में बदलाव करने के बजाय अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा बढ़ाना एक तरह से सुरक्षित रास्ता चुनने जैसा है। अब देखना होगा कि अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में यह रणनीति टीम इंडिया के लिए कितनी प्रभावी साबित होती है।