New Delhi | केंद्र सरकार ने वाहन निर्माताओं के लिए Corporate Average Fuel Economy (CAFE-3) के नए नियम अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियम अप्रैल 2027 से मार्च 2032 तक लागू रहेंगे। सरकार ने अंतिम नियमों में 909 किलोग्राम तक वजन वाली छोटी पेट्रोल कारों के लिए प्रस्तावित अलग रियायत को हटा दिया है। हालांकि, नियमों में उत्सर्जन लक्ष्य तय करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूले में बदलाव किया गया है। इससे हल्के वाहनों के बेड़े को कुछ राहत मिल सकती है, जबकि भारी वाहनों के बेड़े के लिए उत्सर्जन लक्ष्य पहले की तुलना में अधिक कड़े किए गए हैं।
छोटी पेट्रोल कारों की अलग छूट हटाई गई
पिछले साल सरकार ने 909 किलोग्राम तक वजन वाली पेट्रोल कारों के लिए प्रति किलोमीटर 3 ग्राम CO2 की अलग छूट का प्रस्ताव रखा था। कई प्रमुख वाहन निर्माताओं ने इस प्रावधान का विरोध किया था। अंतिम CAFE-3 नियमों में 909 किलोग्राम से कम वजन वाली कारों के लिए अलग से यह छूट नहीं रखी गई है। इसके बजाय सरकार ने पूरे वाहन बेड़े के कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य की गणना करने वाले फॉर्मूले में बदलाव किया है।
रेफरेंस वाहन का वजन बढ़ाया गया
CAFE-3 के सितंबर 2025 के ड्राफ्ट में रेफरेंस वाहन का वजन 1,170 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम किया गया था। अंतिम नियमों में सालाना वजन समायोजन को भी सीमित रखा गया है। इस फॉर्मूले में बदलाव का असर वाहन के वजन के आधार पर तय होने वाले उत्सर्जन लक्ष्य पर पड़ेगा। हल्के वाहनों के लिए कुछ राहत का प्रावधान दिखाई देता है, जबकि भारी वाहनों के निर्माताओं को अपेक्षाकृत कम CO2 उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करना होगा।
909 किलो की कार के लिए लक्ष्य में बदलाव
अंतिम फॉर्मूले के अनुसार वित्त वर्ष 2028 में 909 किलोग्राम वजन वाली कार के लिए उत्सर्जन लक्ष्य करीब 82.8 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर रहेगा। सितंबर 2025 के ड्राफ्ट में यह लक्ष्य करीब 76 ग्राम प्रति किलोमीटर था। वहीं, 2,500 किलोग्राम वजन वाले वाहन के लिए अंतिम फॉर्मूले में उत्सर्जन लक्ष्य करीब 142.4 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर रखा गया है। पुराने फॉर्मूले में यह आंकड़ा करीब 151.4 ग्राम प्रति किलोमीटर था। इस तरह फाइनल नियमों में वाहन के वजन के हिसाब से उत्सर्जन लक्ष्य तय करने के तरीके में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।
EV को मिलेगा 3 गुना सुपर-क्रेडिट
CAFE-3 नियमों में स्वच्छ ईंधन और कम उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सुपर-क्रेडिट सिस्टम भी रखा गया है। नियमों के तहत किसी वाहन निर्माता के फ्लीट प्रदर्शन की गणना करते समय एक Battery Electric Vehicle (BEV) को तीन वाहनों के बराबर माना जाएगा। इससे ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बेचने वाले निर्माताओं को अपने औसत फ्लीट उत्सर्जन लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिल सकती है। Range-Extended Electric Vehicles (REEV) को भी 3 गुना फैक्टर दिया गया है।
हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भी क्रेडिट
नए नियमों में अलग-अलग तकनीकों के लिए अलग सुपर-क्रेडिट फैक्टर तय किए गए हैं।
- Battery Electric Vehicle (BEV): 3x
- Range-Extended EV (REEV): 3x
- Flex-fuel Plug-in Hybrid: 2.5x
- Strong Hybrid: 1.6x
- Flex-fuel Vehicle: 1.1x
- इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहन निर्माताओं को कम उत्सर्जन वाली तकनीकों को अपने पोर्टफोलियो में बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
क्रेडिट-डेबिट सिस्टम भी लागू
CAFE-3 के तहत Credit-Debit System भी शुरू किया गया है। जो वाहन निर्माता निर्धारित उत्सर्जन लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हें क्रेडिट मिलेंगे। वहीं, जो निर्माता अपने निर्धारित उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएंगे, उनके खाते में डेबिट जमा होगा। इस व्यवस्था के जरिए कंपनियों के पूरे फ्लीट के औसत उत्सर्जन प्रदर्शन को नियमों के दायरे में रखा जाएगा।
ऑटो कंपनियों पर क्या होगा असर?
CAFE-3 नियमों से वाहन निर्माताओं के लिए फ्लीट प्लानिंग और पावरट्रेन रणनीति महत्वपूर्ण हो जाएगी। कंपनियों को पेट्रोल और डीजल वाहनों के साथ-साथ EV, हाइब्रिड और अन्य कम-उत्सर्जन तकनीकों के अनुपात पर भी ध्यान देना होगा। नए नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे और मार्च 2032 तक प्रभावी रहेंगे। इस अवधि में वाहन निर्माताओं के औसत फ्लीट उत्सर्जन को निर्धारित मानकों के भीतर रखने की जिम्मेदारी होगी।