नई दिल्ली. Central Drugs Standard Control Organization की मार्च 2026 की रिपोर्ट ने देश में दवा गुणवत्ता की स्थिति को लेकर चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, देशभर से लिए गए सैंपलों में 168 दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो गईं। इनमें सबसे अधिक संख्या हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की है, जो सीधे तौर पर लाखों मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है।
केंद्रीय और राज्य लैब्स में फेल सैंपल
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय प्रयोगशालाओं में जांचे गए 48 दवा सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि राज्य स्तरीय ड्रग टेस्टिंग लैब्स में 120 सैंपल फेल पाए गए। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि समस्या केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देशव्यापी स्तर पर फैली हुई है।
एक दवा पूरी तरह नकली, बड़ा खुलासा
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक दवा पूरी तरह नकली पाई गई। यह सैंपल बिहार से जुड़ा हुआ था, जिसे किसी अन्य कंपनी के ब्रांड नाम का दुरुपयोग कर तैयार किया गया था। इस घटना ने दवा आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
NSQ का मतलब और इसका प्रभाव
‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) का अर्थ है कि दवा अपने तय मानकों जैसे घुलनशीलता, सक्रिय तत्व की मात्रा (assay) या एकरूपता में कमी रखती है। ऐसी दवाएं मरीज पर अपेक्षित असर नहीं दिखा पातीं या कभी-कभी नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति उपचार की प्रभावशीलता को सीधे प्रभावित करती है।
रोजमर्रा की दवाएं भी शामिल
इस रिपोर्ट में शामिल दवाएं केवल सीमित उपयोग वाली नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली हैं। इनमें Clopidogrel जैसी दिल के मरीजों के लिए जरूरी दवा, Terbutaline जो अस्थमा में दी जाती है, और Ambroxol तथा Bromhexine जैसी कफ निकालने वाली दवाएं शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या आम जनजीवन से जुड़ी हुई है।
हर महीने होती है निगरानी, कार्रवाई जारी
CDSCO द्वारा हर महीने इस तरह की जांच की जाती है, ताकि बाजार में बिक रही दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। नियामक संस्था के अनुसार, इस मामले में जांच जारी है और दोषी कंपनियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दवा खरीदते समय सतर्कता बेहद जरूरी
इस पूरे मामले के बाद विशेषज्ञों ने आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। दवा खरीदते समय डॉक्टर की सलाह लेना, विश्वसनीय मेडिकल स्टोर से ही दवा लेना और पैकेजिंग व बैच नंबर की जांच करना बेहद जरूरी है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी एक बैच के फेल होने का मतलब पूरी दवा का खराब होना नहीं होता।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जरूरी सुधार
यह घटना देश में दवा गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पारदर्शिता, कड़ी निगरानी और सख्त दंडात्मक कार्रवाई के जरिए ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।