मदर्स डे सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि उस निस्वार्थ प्रेम को सम्मान देने का दिन है, जिसे शब्दों में बांधना मुश्किल होता है। हिंदी सिनेमा और टेलीविजन जगत में कई ऐसी अभिनेत्रियां रहीं, जिन्होंने मां के किरदार को इतनी जीवंतता से निभाया कि दर्शकों ने उन्हें केवल कलाकार नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं का हिस्सा मान लिया। उनकी आंखों की ममता, चेहरे की चिंता और बच्चों के लिए समर्पण ने करोड़ों लोगों को भावुक किया।
रीमा लागू: मुस्कान में बसती थी मां की ममता
रीमा लागू का नाम लेते ही एक स्नेहमयी मां की छवि सामने उभर आती है। उन्होंने मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन, हम साथ साथ हैं और कुछ कुछ होता है जैसी फिल्मों में मां के किरदार को नई पहचान दी। उनकी सहज मुस्कान और बच्चों के प्रति चिंता दर्शकों को अपनी मां की याद दिला देती थी। वर्ष 2017 में उनके निधन के बाद भी लोग उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे प्यारी ऑनस्क्रीन मां के रूप में याद करते हैं।
राखी गुलज़ार: आंखों में दिखती थी भावनाओं की गहराई
राखी गुलज़ार ने अपने अभिनय से मां के किरदार में गहरी संवेदनाएं भर दीं। करण अर्जुन और शक्ति जैसी फिल्मों में उनके निभाए किरदार आज भी लोगों को भावुक कर देते हैं। उनकी संवाद अदायगी और आंखों में छलकती पीड़ा ने हर दृश्य को बेहद प्रभावशाली बना दिया। फिल्मों से दूरी बनाने के बावजूद उनके निभाए किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं।
जया बच्चन: सादगी में छिपी मां की ताकत
जया बच्चन ने हमेशा अपने शांत और प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। कभी खुशी कभी ग़म, फिजा और कल हो ना हो जैसी फिल्मों में उन्होंने मां के किरदार को गरिमा और भावनात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत किया। उनकी सादगी और संवेदनशील अभिनय ने उन्हें पर्दे की सबसे विश्वसनीय मांओं में शामिल कर दिया।
अरुणा ईरानी: ममता और मजबूती का अनोखा मेल
अरुणा ईरानी ने 80 और 90 के दशक में मां के किरदार को अलग पहचान दी। बेटा, राजाबाबू और सुहाग जैसी फिल्मों में उन्होंने कभी सख्त तो कभी भावुक मां का किरदार निभाकर दर्शकों को प्रभावित किया। उनके अभिनय में अपनापन और आत्मविश्वास दोनों की झलक दिखाई देती थी।
निरूपा रॉय: हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार मां
निरूपा रॉय को हिंदी फिल्मों की सबसे प्रतिष्ठित ऑनस्क्रीन मां माना जाता है। खासकर अमिताभ बच्चन की मां के रूप में उनकी छवि बेहद लोकप्रिय हुई। दीवार, अमर अकबर एंथनी और मुकद्दर का सिकंदर जैसी फिल्मों में उनके निभाए किरदार आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास का अहम हिस्सा माने जाते हैं। उनकी भावुक अदाकारी ने मां के किरदार को नई ऊंचाई और सम्मान दिलाया।
बदलते दौर में भी अमर हैं ये किरदार
समय के साथ फिल्मों की कहानियां और प्रस्तुति जरूर बदली, लेकिन मां के किरदार की आत्मा वही रही। इन अभिनेत्रियों ने अपने अभिनय से यह साबित किया कि मां केवल परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि भावनाओं की सबसे मजबूत डोर होती है। मदर्स डे पर इनके निभाए किरदार आज भी लोगों को अपनी मां के प्रेम, संघर्ष और त्याग की याद दिलाते हैं।