अयोध्या। उत्तरप्रदेश के अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान से जुड़े विवाद की जांच तेज हो गई है। योगी सरकार द्वारा गठित एसआईटी टीम ने सोमवार को मंदिर परिसर में करीब 8 घंटे तक गहन जांच-पड़ताल की। टीम दोपहर 2:50 बजे मंदिर परिसर पहुंची और रात लगभग 10:30 बजे वहां से बाहर निकली।
दान पात्र और CCTV रिकॉर्ड की जांच
जांच के दौरान एसआईटी ने दान पात्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का विस्तृत निरीक्षण किया। साथ ही नकदी निकासी और काउंटिंग प्रक्रिया की भी मौके पर जांच की गई। टीम ने मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय में पहुंचकर विभिन्न दस्तावेजों की भी पड़ताल शुरू की।
42 लोगों से हुई पूछताछ
एसआईटी ने इस मामले में मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक कर्मियों और अन्य संबंधित लोगों सहित लगभग 42 लोगों से पूछताछ की है। इसके अलावा बड़ी संख्या में सेवादारों को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया। जांच टीम 2021 से जुड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच कर रही है।
कई खामियां मिलने पर जताई नाराजगी
जांच के दौरान कुछ प्रक्रियात्मक खामियां सामने आने पर एसआईटी ने नाराजगी भी जताई है। इसके साथ ही जिम्मेदारियों के निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, अभी तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
दिल्ली से भी पहुंची जांच टीम
सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली से भी एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को अयोध्या भेजा गया है, जो अलग से जानकारी एकत्र कर रहे हैं। एसआईटी की टीम उनसे भी समन्वय कर रही है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में जांच
एसआईटी में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरन एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन शामिल हैं। टीम ने जांच शुरू करने से पहले लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की थी।
ट्रस्ट ने दिया सख्ती का भरोसा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और अन्य सदस्यों से भी पूछताछ की तैयारी है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने कहा है कि मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और पूरी पारदर्शिता के साथ जांच आगे बढ़ेगी।