उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी बारिश का सिलसिला अब थमने लगा है। मौसम साफ होने के साथ ही प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल गया है। सोमवार सुबह वाराणसी, गोरखपुर और देवरिया समेत कई शहरों में घना कोहरा देखने को मिला। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ धूप निकलने से लोगों को राहत मिली। लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दो से तीन दिनों में प्रदेश के न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। इससे सुबह और रात के समय ठंड का असर बढ़ने की संभावना है।
बारिश थमने के बाद साफ रहेगा मौसम
प्रदेश में लगातार तीन दिनों तक हुई बारिश के बाद अब मौसम सामान्य होने की ओर बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, चक्रवाती तूफान अर्णब के अवशेष कमजोर होकर निष्प्रभावी हो चुके हैं। इसके चलते उत्तर प्रदेश में व्यापक बारिश का दौर समाप्त हो गया है। आने वाले कुछ दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। वहीं, चक्रवाती तूफान मुरासू का भी उत्तर प्रदेश के मौसम पर कोई खास प्रभाव पड़ने का अनुमान नहीं है।
सुबह कोहरा, दिन में धूप और रात में बढ़ेगी ठंड
बारिश के बाद मौसम में आए बदलाव का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार सुबह वाराणसी, गोरखपुर और देवरिया सहित 10 से अधिक शहरों में कोहरे की चादर देखने को मिली। सुबह के समय दृश्यता कम रहने से लोगों को आवाजाही में परेशानी हो सकती है। हालांकि, दिन के दौरान धूप निकलने से तापमान में बढ़ोतरी और मौसम में राहत महसूस की जा रही है। लेकिन अगले दो से तीन दिनों में न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री तक नीचे जा सकता है। ऐसे में दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ने के साथ सुबह-शाम हल्की ठंड महसूस होने लगेगी।
पूर्वी और पश्चिमी यूपी के मौसम में दिखेगा अंतर
नवंबर महीने के लिए मौसम विभाग ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और तापमान को लेकर अलग-अलग अनुमान जताया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान लगाया गया है। तापमान की बात करें तो पूर्वांचल में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे कुछ नीचे रह सकता है। इसके विपरीत पश्चिमी यूपी में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। यानी आने वाले दिनों में प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में मौसम की स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी।
रबी की बुवाई से पहले किसान रखें इन बातों का ध्यान
मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। इस समय किसान गेहूं, चना, मटर और सरसों जैसी रबी फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी है। खासकर पूर्वांचल के निचले इलाकों में बारिश का पानी जमा होने से नई फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। जिन खेतों में बारिश के कारण पहले से पर्याप्त नमी मौजूद है, वहां किसानों को फिलहाल अतिरिक्त सिंचाई करने से बचना चाहिए। बुवाई और सिंचाई का फैसला खेत की मिट्टी में मौजूद नमी और स्थानीय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर करना बेहतर होगा।
फसल नुकसान पर योगी सरकार सख्त, अधिकारियों को दिए निर्देश
बारिश और चक्रवाती तूफान अर्णब के प्रभाव से जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है, उनके लिए राज्य सरकार ने राहत प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में फसल क्षति का वास्तविक आकलन कराने के लिए खुद फील्ड में उतरने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रभावित किसानों को मुआवजा देने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही, जिन किसानों की फसलों को निर्धारित मुआवजे के दायरे से अधिक नुकसान हुआ है, उन्हें राहत पहुंचाने के लिए भी जरूरी कदम उठाए जाएं।
किसानों और आम लोगों के लिए क्या है सलाह?
मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को सुबह और रात के समय सावधानी बरतने की जरूरत है। कोहरे के दौरान वाहन चलाते समय कम गति रखें और पर्याप्त दूरी बनाए रखें। वहीं, किसानों को खेतों में जलभराव से बचाव के साथ बुवाई और सिंचाई का काम मौसम की स्थिति देखकर करना चाहिए। फिलहाल बारिश से राहत जरूर मिली है, लेकिन तापमान में गिरावट के साथ प्रदेश में ठंड की शुरुआत का असर महसूस होने लगा है।