वाराणसी- उत्तर प्रदेश के वाराणसी में देश का पहला अर्बन पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे लगभग बनकर तैयार हो गया है। करीब ₹800 करोड़ की लागत से विकसित यह महत्वाकांक्षी परियोजना देव दीपावली 2026 (24 नवंबर) के आसपास आम लोगों के लिए शुरू की जा सकती है। यह रोपवे वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया चौक तक मात्र 16 मिनट में यात्रियों को पहुंचाएगा, जबकि यही सफर सड़क मार्ग से ट्रैफिक जाम के कारण सामान्यतः 45 मिनट या उससे अधिक समय में पूरा होता है। इस परियोजना के शुरू होने के बाद वाराणसी देश का पहला और दुनिया का तीसरा शहर बन जाएगा, जहां रोपवे का उपयोग नियमित शहरी सार्वजनिक परिवहन के रूप में किया जाएगा।
ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत, रोजाना 96 हजार यात्रियों को होगा फायदा
करीब 3.85 किलोमीटर लंबे इस अर्बन रोपवे को शहर के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के ऊपर से बनाया गया है। वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) का दावा है कि इसके शुरू होने से इन इलाकों में सड़क यातायात का दबाव करीब 40 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। रोपवे की दोनों दिशाओं में हर घंटे लगभग 6,000 यात्रियों को ले जाने की क्षमता होगी। एक दिशा में प्रति घंटे 3,000 यात्री यात्रा कर सकेंगे। अनुमान है कि प्रतिदिन करीब 96 हजार लोग इस आधुनिक परिवहन सुविधा का लाभ उठाएंगे, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
पांच स्टेशनों से होकर गुजरेगा रोपवे, कैंट से सीधे गोदौलिया तक कनेक्टिविटी
इस परियोजना के तहत कुल पांच स्टेशन बनाए गए हैं। पहला स्टेशन वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन होगा, जिसे मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया गया है। यहां यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं, डिजिटल क्लॉक रूम और मिनी रिफ्रेशिंग रूम मिलेंगे। दूसरा स्टेशन काशी विद्यापीठ, तीसरा रथयात्रा, चौथा गिरजाघर (तकनीकी टर्निंग स्टेशन) और अंतिम स्टेशन गोदौलिया चौक होगा। गोदौलिया स्टेशन से काशी विश्वनाथ मंदिर और दशाश्वमेध घाट की दूरी महज 400 मीटर रह जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
सिर्फ ₹10 में मिलेगा एसी केबिन का सफर, दूरी के हिसाब से तय होगा किराया
रोपवे सेवा को आम जनता की पहुंच में रखने के लिए इसका किराया बेहद किफायती रखा गया है। आधिकारिक किराया सूची के अनुसार न्यूनतम टिकट ₹10 से शुरू होगा। यह किराया स्टेशन की दूरी के अनुसार बढ़ेगा। उदाहरण के तौर पर कैंट से काशी विद्यापीठ तक का किराया ₹10 होगा, जबकि कैंट से गोदौलिया तक पूरे सफर के लिए यात्रियों को केवल ₹50 चुकाने होंगे। वर्तमान में इसी दूरी के लिए ऑटो और ई-रिक्शा लगभग ₹30 से ₹40 प्रति यात्री लेते हैं और ट्रैफिक जाम के कारण यात्रा में काफी समय भी लगता है। रोपवे से समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
आंधी और खराब मौसम में भी सुरक्षित रहेगा संचालन
रोपवे परियोजना को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि सामान्य आंधी और मौसम में भी इसका संचालन प्रभावित न हो। अत्याधुनिक तकनीक, मजबूत केबल सिस्टम और स्वचालित सुरक्षा व्यवस्था यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव देंगे। इसके अलावा कंट्रोल सेंटर से पूरे कॉरिडोर की लगातार निगरानी की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
दुनिया के चुनिंदा शहरों की सूची में शामिल होगा वाराणसी
इस परियोजना के शुरू होने के बाद वाराणसी दुनिया के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा जहां रोपवे का उपयोग सार्वजनिक परिवहन के रूप में किया जाता है। वर्तमान में बोलीविया के ला पाज और मेक्सिको सिटी में इस तरह की शहरी रोपवे व्यवस्था संचालित है। अब वाराणसी भी इस सूची में शामिल होकर भारत में आधुनिक शहरी परिवहन का नया मॉडल पेश करेगा।