मानसून के दौरान भागीरथी नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित खतरे को देखते हुए गंगोत्री विधानसभा के हर्षिल-धराली क्षेत्र में चल रहे चैनलाइजिंग एवं डायवर्जन कार्यों का गंगोत्री विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष ने स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बचाव कार्यों में तेजी लाने गुणवत्ता बनाए रखने और सभी कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।
जनप्रतिनिधियों ने संवेदनशील स्थलों का लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों ने भागीरथी नदी के कटाव वाले संवेदनशील स्थलों का जायजा लिया और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि हर्षिल क्षेत्र को नदी कटाव और संभावित आपदा से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से करीब 10 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से चैनलाइजिंग एवं डायवर्जन का कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य नदी के बहाव को नियंत्रित कर आबादी कृषि भूमि तथा क्षेत्र की आधारभूत संरचनाओं को सुरक्षित रखना है।
इस दौरान धराली के स्थानीय ग्रामीणों ने मौके पर चल रहे कार्यों को लेकर नाराजगी भी जताई। ग्रामीणों का कहना था कि निर्माण कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है और कई स्थानों पर सुरक्षा के लिए किए जा रहे इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी और स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आगामी बारिश के दौरान गांव को गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रशासन से की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि निर्माण कार्यों में और तेजी लाई जाए तथा स्थानीय लोगों के सुझावों को भी योजना में शामिल किया जाए ताकि क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
विधायक ने ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थानीय लोगों की चिंताओं को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम तत्काल उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि हर्षिल-धराली क्षेत्र की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में जिला प्रशासन सिंचाई विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियां परियोजना की लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि मानसून के दौरान भागीरथी नदी से उत्पन्न संभावित खतरे को कम किया जा सके और क्षेत्र की जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।