हरिद्वार : जिले के लक्सर से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जहां सड़क किनारे कूड़े के ढेर में भारी मात्रा में सरकारी दवाइयां इंजेक्शन वैक्सीन और पशुओं की पहचान में इस्तेमाल होने वाले टैग और टैग लगाने की मशीन मिली है। मामला सामने आने के बाद लकसर निवासी संदीप चौधरी ने जिलाधिकारी हरिद्वार समेत संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर पूरे मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
शिकायतकर्ता ने किया दावा
शिकायतकर्ता का दावा है कि काफी समय बीत जाने के बाद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी जिसमें कथित तौर पर सामने आया कि कूड़े के ढेर में मिली दवाइयां और अन्य सामग्री लक्सर राजकीय पशु चिकित्सालय से संबंधित थीं। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी दवाइयां और वैक्सीन सड़क किनारे कूड़े के ढेर तक कैसे पहुंचीं और शिकायत के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब तक होगी
जहां सड़क किनारे पड़े कूड़े के ढेर में दिखाई दे रही हैं सरकारी दवाइयां इंजेक्शन वैक्सीन और पशुओं की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाले टैग। इसके अलावा यहां टैग लगाने की मशीन समेत बड़ी मात्रा में अन्य सामग्री भी मिली। सरकारी दवाइयां और वैक्सीन इस तरह खुले में कूड़े के ढेर में मिलने की खबर सामने आते ही इलाके में हड़कंप मच गया।
निष्पक्ष जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद लक्सर निवासी संदीप चौधरी ने पूरे प्रकरण की शिकायत जिलाधिकारी हरिद्वार मुख्य पशु चिकित्साधिकारी हरिद्वार और उप जिलाधिकारी लक्सर से की। शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और सरकारी दवाइयों को कूड़े में फेंकने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत के बाद भी लंबे समय तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के जरिए इस मामले से जुड़ी जानकारी मांगी।
दवाईयों को लेकर सवाल
आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर शिकायतकर्ता का दावा है कि सड़क किनारे कूड़े के ढेर में मिली दवाइयां इंजेक्शन वैक्सीन पशु टैग और टैग मशीन लक्सर राजकीय पशु चिकित्सालय से संबंधित थीं। आरटीआई से सामने आई इस जानकारी के बाद अब पूरे मामले को लेकर सवाल और भी गंभीर हो गए हैं। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी दवाइयां सड़क किनारे कूड़े के ढेर तक कैसे पहुंचीं क्या इन दवाइयों को नियमानुसार नष्ट किया गया था या फिर सरकारी सामग्री को बिना किसी प्रक्रिया के खुले में फेंक दिया गया और अगर यह सामग्री लक्सर राजकीय पशु चिकित्सालय से संबंधित थीतो इसके लिए जिम्मेदार कौन है
सरकार की ओर से पशुओं को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं। ऐसे में सरकारी वैक्सीन और दवाइयों का इस तरह सड़क किनारे कूड़े के ढेर में मिलना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह भी है कि जब क्षेत्र में पशुओं के इलाज और टीकाकरण के लिए सरकारी दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं तो आखिर इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां और वैक्सीन इस्तेमाल होने के बजाय कूड़े के ढेर में कैसे पहुंच गईं हालांकि पूरे मामले में दवाइयों को कूड़े में फेंकने के कारण और जिम्मेदारी अभी जांच का विषय है।
चिकित्साधिकारी कैमरे से बचे
वहीं जब इस पूरे मामले को लेकर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी हरिद्वार से सवाल किया गया तो शुरुआत में वह कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। हालांकि मीडिया के सवालों के बाद उन्होंने बताया कि मामला विभाग के संज्ञान में है और पूरे प्रकरण की जांच के लिए जांच टीम का गठन किया गया है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के मुताबिक अपर निदेशक गढ़वाल मंडल की ओर से ज्वाइंट डायरेक्टर की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की गई है। अब जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि सड़क किनारे मिली सरकारी दवाइयां और वैक्सीन वहां तक कैसे पहुंचीं इन्हें किसने फेंका और क्या इस पूरे मामले में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है और जांच के बाद किन-किन अधिकारियों कर्मचारियों पर गाज गिरती है