नई दिल्ली: चुनाव आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर सामने आई आंतरिक आपत्तियों के बाद कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध तेज करने का ऐलान किया है। पार्टी के मुताबिक, 25 सितंबर को देशभर में प्रदेश कांग्रेस कमेटियां निर्वाचन अधिकारियों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करेंगी। दिल्ली में निर्वाचन सदन के बाहर भी विरोध कार्यक्रम प्रस्तावित है। केरल कांग्रेस ने भी 25 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में लोक भवन तक मार्च की घोषणा की है। विवाद की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के भीतर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डाटाबेस के केंद्रीकरण और कुछ निर्णयों को लेकर जानकारी साझा नहीं किए जाने जैसे मुद्दे शामिल थे।
14 लिखित आपत्तियों से सामने आया विवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कई बार यह सवाल उठाया कि आयोग के नाम से जारी कुछ निर्णयों और संचार के लिए सभी सदस्यों की आवश्यक मंजूरी ली गई या नहीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों आयुक्तों ने मतदाता डाटाबेस के आईटी प्रबंधन और केंद्रीकरण को लेकर चिंता जताई तथा इस संबंध में कैबिनेट सचिव को भी पत्र भेजे। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों की आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और SIR के दौरान मतदाता नामों से जुड़े फैसले भी शामिल थे। हालांकि, इन आंतरिक आपत्तियों का अर्थ आयोग के अंतिम निर्णयों पर अलग-अलग औपचारिक आदेश होना है या नहीं, यह विवाद का अहम हिस्सा बना हुआ है।
आयोग ने कहा- अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए
विवाद पर चुनाव आयोग ने कहा है कि आयोग के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद आयोग ने 14 नोट्स के अस्तित्व, तारीख और सामग्री से इनकार नहीं किया, लेकिन उन्हें निर्णयों के बजाय सुझाव और आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा बताया। आयोग का कहना है कि अंतिम फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से हुए।
कांग्रेस ने की इस्तीफे और जांच की मांग
रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने CEC के इस्तीफे की मांग दोहराई है। पार्टी ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच तथा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग भी उठाई है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता और संस्थागत प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इससे पहले अप्रैल में 73 विपक्षी राज्यसभा सांसदों की ओर से CEC को पद से हटाने के लिए नोटिस दिए जाने की जानकारी दी थी। 24 अप्रैल 2026 को विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में ऐसा नोटिस दिया था।
दिल्ली से राज्यों तक प्रदर्शन की तैयारी
कांग्रेस के अनुसार, 25 सितंबर को देश के विभिन्न राज्यों में निर्वाचन कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। दिल्ली में निर्वाचन सदन को लेकर भी प्रदर्शन की योजना है। भारतीय युवा कांग्रेस ने 23 सितंबर को दिल्ली में CEC के खिलाफ प्रदर्शन किया था। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 25 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में लोक भवन तक मार्च की घोषणा की है। पार्टी के मुताबिक, यह कार्यक्रम देशव्यापी विरोध का हिस्सा होगा। इस बीच, चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। विपक्षी दल आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग का कहना है कि आंतरिक स्तर पर दिए गए सुझावों और अंतिम संस्थागत फैसलों को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।