नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में बने मौसम सिस्टम को लेकर सोशल मीडिया पर ‘साइक्लोन अर्नब’ के नाम से कई दावे तेजी से सामने आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि ‘अर्नब’ नाम का चक्रवाती तूफान पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, फिलहाल ऐसा कोई चक्रवाती तूफान मौजूद नहीं है। बंगाल की खाड़ी में बना मौजूदा सिस्टम अभी डीप डिप्रेशन की स्थिति में है। हालांकि इसे चक्रवात का नाम नहीं दिया गया है, लेकिन यह मौसम सिस्टम काफी सक्रिय है और इसके प्रभाव से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रहे नामों के बजाय IMD के आधिकारिक मौसम अलर्ट पर भरोसा करना जरूरी है।
क्या बंगाल की खाड़ी में आया है ‘साइक्लोन अर्नब’?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ‘साइक्लोन अर्नब’ फिलहाल कोई आधिकारिक चक्रवात नहीं है। सोशल मीडिया पर इस नाम से कई पोस्ट और दावे सामने आने के बाद लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी है। IMD की वर्गीकरण प्रणाली के मुताबिक मौजूदा मौसम सिस्टम अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचा है, जहां उसे आधिकारिक तौर पर चक्रवाती तूफान कहा जाए।मौजूदा सिस्टम को IMD ने डीप डिप्रेशन के रूप में वर्गीकृत किया है। इसका मतलब है कि मौसम प्रणाली काफी मजबूत है और इससे भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा हो सकता है, लेकिन इसकी हवा की रफ्तार अभी चक्रवाती तूफान के लिए जरूरी सीमा तक नहीं पहुंची है।
63 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार क्यों है अहम?
मौसम प्रणालियों की श्रेणी तय करने में हवा की रफ्तार बेहद महत्वपूर्ण होती है। IMD के मुताबिक, जब किसी सिस्टम की अधिकतम लगातार हवा की रफ्तार 34 नॉट यानी करीब 63 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक हो जाती है, तब उसे ‘Cyclonic Storm’ की श्रेणी में रखा जाता है। इससे पहले मौसम प्रणाली को उसकी ताकत के हिसाब से डिप्रेशन या डीप डिप्रेशन के तौर पर वर्गीकृत किया जाता है। इसलिए केवल तेज बारिश या तेज हवाओं की वजह से किसी सिस्टम को चक्रवात नहीं कहा जा सकता। उसके लिए निर्धारित वैज्ञानिक मानकों का पूरा होना जरूरी है।
डिप्रेशन और डीप डिप्रेशन में क्या अंतर है?
IMD मौसम प्रणालियों को उनकी हवा की गति और दबाव की संरचना के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखता है।
डिप्रेशन: इसमें अधिकतम लगातार हवा की रफ्तार करीब 31 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक होती है।
डीप डिप्रेशन: इसमें हवा की अधिकतम लगातार रफ्तार करीब 52 से 61 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
साइक्लोनिक स्टॉर्म: जब लगातार हवा की रफ्तार 63 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक हो जाती है, तब सिस्टम को चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखा जाता है।
यानी मौजूदा सिस्टम की ताकत काफी ज्यादा है, लेकिन अभी यह आधिकारिक चक्रवात की सीमा को पार नहीं कर पाया है।
फिर ‘अर्नब’ नाम आया कहां से?
अब सवाल उठता है कि जब कोई आधिकारिक चक्रवात नहीं है तो फिर ‘अर्नब’ नाम की चर्चा क्यों हो रही है? दरअसल, ‘अर्नब’ उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के लिए तैयार की गई चक्रवात नामों की आधिकारिक सूची में शामिल है। यह नाम बांग्लादेश ने दिया है। उत्तर हिंद महासागर में आने वाले संभावित चक्रवातों के नाम पहले से तय किए जाते हैं। भारत समेत इस क्षेत्र के कई देश इन नामों की सूची तैयार करने में योगदान देते हैं। जब कोई मौसम प्रणाली निर्धारित मानकों को पूरा करते हुए चक्रवाती तूफान बनती है, तब सूची के क्रम के अनुसार उसे नाम दिया जाता है। इसलिए ‘अर्नब’ एक सूचीबद्ध नाम है, लेकिन इसका सूची में होना यह साबित नहीं करता कि मौजूदा सिस्टम का नाम अर्नब रख दिया गया है।
नाम नहीं मिला, फिर भी खतरा गंभीर क्यों?
किसी मौसम सिस्टम को चक्रवात का नाम नहीं मिला है, इसका अर्थ यह नहीं है कि वह कमजोर या खतरामुक्त है। डीप डिप्रेशन भी बहुत भारी बारिश और तेज हवाएं पैदा कर सकता है। इससे निचले इलाकों में जलभराव, नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने, पेड़ गिरने और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। खासकर तटीय इलाकों में समुद्र की स्थिति खराब होने पर मछुआरों और समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। भारी बारिश के कारण कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थिति भी बन सकती है।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश में ज्यादा असर
मौजूदा मौसम सिस्टम का प्रभाव उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों में ज्यादा देखने को मिल सकता है। भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना के कारण प्रशासन को भी सतर्क रहने की जरूरत है। कई इलाकों में भारी बारिश के कारण सड़कों पर पानी भरने, पेड़ गिरने और स्थानीय स्तर पर जनजीवन प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
पश्चिम बंगाल पर भी नजर
बंगाल की खाड़ी में बने किसी भी मजबूत मौसम सिस्टम का असर पश्चिम बंगाल के तटीय और आसपास के जिलों में भी देखने को मिल सकता है। सिस्टम की दिशा, ताकत और आगे की गतिविधियों के आधार पर बारिश और हवाओं की तीव्रता में बदलाव हो सकता है। इसलिए पश्चिम बंगाल में रहने वाले लोगों के लिए भी जरूरी है कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे नामों और दावों के बजाय IMD के आधिकारिक मौसम अपडेट पर भरोसा करें।
सोशल मीडिया के दावे से रहें सावधान
मौसम से जुड़ी खबरें सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से फैलती हैं। कई बार किसी संभावित मौसम सिस्टम का नाम पहले से वायरल होने लगता है, जबकि आधिकारिक तौर पर उस सिस्टम को वह नाम मिला ही नहीं होता। ऐसे में 'साइक्लोन अर्नब’ को लेकर फिलहाल यही समझना जरूरी है कि ‘अर्नब’ एक आधिकारिक नामों की सूची में मौजूद नाम है, जबकि मौजूदा सिस्टम को IMD ने डीप डिप्रेशन के रूप में वर्गीकृत किया है। बारिश, हवा और समुद्र की स्थिति से जुड़े अलर्ट के लिए IMD और स्थानीय प्रशासन की जानकारी को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।