चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 साल से ज्यादा समय बाद अमेरिकी राजधानी वॉशिंगटन पहुंचे हैं। 23 सितंबर को उनके अमेरिका पहुंचने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुद जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पहुंचे और जिनपिंग तथा उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। अमेरिकी राष्ट्रपति का किसी विदेशी नेता को एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत रूप से रिसीव करना सामान्य प्रोटोकॉल नहीं माना जाता।यह जिनपिंग का 2015 के बाद अमेरिका का पहला स्टेट विजिट है। उनका तीन दिवसीय दौरा 23 से 25 सितंबर तक है। 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत समारोह के साथ ट्रम्प-जिनपिंग की द्विपक्षीय बातचीत होगी और शाम को जिनपिंग तथा पेंग लियुआन के सम्मान में स्टेट डिनर आयोजित किया जाएगा।
ट्रम्प खुद एयरपोर्ट पहुंचे, मेलानिया भी रहीं मौजूद
जिनपिंग के विमान के जॉइंट बेस एंड्रयूज पहुंचने पर डोनाल्ड ट्रम्प और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प ने उनका स्वागत किया। जिनपिंग के साथ उनकी पत्नी पेंग लियुआन भी अमेरिका पहुंची हैं।ट्रम्प का यह कदम इसलिए खास है क्योंकि आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति विदेशी नेताओं का स्वागत व्हाइट हाउस में करते हैं। इस बार ट्रम्प ने एयरपोर्ट पहुंचकर सीधे चीनी राष्ट्रपति का स्वागत किया।
ट्रेड और टैरिफ पर सबसे अहम बातचीत
अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहा ट्रेड और टैरिफ विवाद इस मुलाकात के प्रमुख मुद्दों में है।दोनों देशों ने हाल के महीनों में व्यापार तनाव कम करने की दिशा में बातचीत की है। जिनपिंग के अमेरिका पहुंचने से पहले दोनों देशों ने टैरिफ से जुड़ी मौजूदा व्यापारिक सहमति को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। इसके साथ ही दुर्लभ खनिजों और अन्य रणनीतिक सप्लाई से जुड़े मुद्दे भी बातचीत के एजेंडे में हैं।दोनों पक्षों के लिए चुनौती यह है कि व्यापारिक रिश्तों में स्थिरता लाई जाए, लेकिन साथ ही तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में अपने-अपने हितों की रक्षा भी की जाए।
AI पर पहली बार अलग स्तर की बातचीत
इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI भी अमेरिका-चीन वार्ता का बड़ा मुद्दा है।अमेरिका और चीन के बीच AI तकनीक, सेमीकंडक्टर और अत्याधुनिक कंप्यूटिंग क्षमता को लेकर प्रतिस्पर्धा चल रही है। अमेरिका ने चीन की AI क्षमता को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई हैं और उन्नत चिप्स तथा तकनीक के निर्यात पर कई तरह के नियंत्रण लगाए हैं।दूसरी ओर चीन इन तकनीकी प्रतिबंधों का विरोध करता रहा है और इन्हें तकनीकी तथा व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में बाधा के तौर पर देखता है।
जिनपिंग की यात्रा से पहले न्यूयॉर्क में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में AI सुरक्षा पर संवाद बढ़ाने की संभावना सामने आई थी। अमेरिका ने AI से जुड़े ऐसे सुरक्षा जोखिमों की जानकारी साझा करने के लिए एक तंत्र का प्रस्ताव भी रखा है, जिनका राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर हो सकता है।
ताइवान पर भी बनी रहेगी नजर
अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में ताइवान भी शामिल है।चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान के साथ सुरक्षा संबंध बनाए रखता है और उसे रक्षा सहायता देता रहा है। बीजिंग चाहता है कि वॉशिंगटन ताइवान के मुद्दे पर चीन की स्थिति का सम्मान करे और द्वीप को सैन्य समर्थन देने से बचे।ताइवान का महत्व केवल भू-राजनीतिक नहीं है। यह एशिया के समुद्री व्यापार मार्गों और वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।हालांकि, मौजूदा बैठक में ताइवान को लेकर किसी बड़े समझौते की संभावना या उसके संभावित नतीजे पहले से स्पष्ट नहीं हैं। इसलिए इस मुद्दे पर दोनों नेताओं की बातचीत पर खास नजर रहेगी।
रूस और ईरान से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में
अमेरिका-चीन बातचीत केवल व्यापार और तकनीक तक सीमित नहीं रहने वाली है। चीन के रूस और ईरान के साथ संबंध भी वॉशिंगटन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।अमेरिका चीन की रूस से ऊर्जा खरीद और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को लेकर दबाव डालता रहा है। चीन दूसरी ओर रूस के साथ अपने व्यापार में तीसरे देशों के हस्तक्षेप का विरोध करता है।इसके अलावा मौजूदा अमेरिकी-ईरान तनाव और चीन के ईरान के साथ संबंध भी बातचीत के व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ का हिस्सा हो सकते हैं।
दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच अहम मुलाकात
शी जिनपिंग की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक संबंधों में तनाव कम करने की कोशिश के साथ-साथ तकनीकी और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी जारी है।ट्रेड, AI, दुर्लभ खनिज, ताइवान और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। ऐसे में ट्रम्प और जिनपिंग की बैठक में किन मुद्दों पर सहमति बनती है और किन मामलों में मतभेद कायम रहते हैं, इस पर वैश्विक स्तर पर नजर रहेगी।