बिलासपुर | छत्तीसगढ़ में तेंदुओं के संरक्षण और सुरक्षित प्रबंधन को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने वन विभाग से तेंदुओं को रेडियो कॉलर नहीं लगाए जाने और पकड़े गए तेंदुओं की सुरक्षित शिफ्टिंग की नीति पर जवाब मांगा है। मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया गया है।
तेंदुओं को रेडियो कॉलर नहीं लगाने पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वन विभाग से पूछा कि पकड़े गए तेंदुओं की निगरानी के लिए उन्हें रेडियो कॉलर क्यों नहीं लगाए जा रहे हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि पकड़े गए तेंदुओं को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए विभाग की क्या नीति है।
लंबे समय तक कैद में रखने का मुद्दा भी उठा
मामले की सुनवाई में तेंदुओं को लंबे समय तक कैद में रखने का मुद्दा भी सामने आया। इसके साथ ही उनके प्राकृतिक रहवास के आसपास पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया गया।
2022 से लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई
यह मामला वर्ष 2022 से लंबित जनहित याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तेंदुओं के संरक्षण, निगरानी, सुरक्षित शिफ्टिंग और उनके प्राकृतिक रहवास से जुड़े पहलुओं पर वन विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी है। अब PCCF को तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र के माध्यम से अदालत के सवालों का जवाब देना होगा।