नई दिल्ली - कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी एक बार फिर अपने हालिया इंटरव्यू को लेकर चर्चा में हैं। ब्रिटिश अखबार को दिए गए एक इंटरव्यू में उनसे कांग्रेस पार्टी पर गांधी परिवार के लगातार नियंत्रण, भाई-भतीजावाद और नेतृत्व से जुड़े कई सवाल पूछे गए। हालांकि, सोनिया गांधी ने इन सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि पार्टी के नेतृत्व से जुड़ा सवाल कांग्रेस संगठन से ही पूछा जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब उनकी आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' का संपादित अंश भी जारी होने वाला है।
गांधी परिवार के नेतृत्व पर सवाल, सोनिया ने दिया यह जवाब
इंटरव्यू के दौरान सोनिया गांधी से पूछा गया कि आखिर कांग्रेस पार्टी गांधी परिवार के नेतृत्व के दायरे से बाहर क्यों नहीं निकल पा रही है? पार्टी में लंबे समय से एक ही परिवार का प्रभाव बने रहने को लेकर भी सवाल उठाए गए।
इस पर सोनिया गांधी ने कहा कि यह सवाल उनसे पूछने के बजाय पार्टी से पूछा जाना चाहिए। वहीं, जब उनसे नेपोटिज्म यानी भाई-भतीजावाद के आरोपों पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
सोनिया गांधी ने चुनावी राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी के नेता चुनाव लड़ते हैं और कभी जीत हासिल करते हैं तो कभी हार का सामना करना पड़ता है। उनके मुताबिक, चुनाव में जीत और हार सभी राजनीतिक दलों का हिस्सा है।
लगातार चुनावी हार के बीच कांग्रेस की चुनौतियां
कांग्रेस पिछले कुछ वर्षों से कई चुनावों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी देश की राजनीति में एक प्रमुख ताकत के रूप में उभरी है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने कई चुनावी चुनौतियों का सामना किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच भी कांग्रेस के नेतृत्व ढांचे को लेकर चर्चा होती रही है। पार्टी में गांधी परिवार की प्रमुख भूमिका के कारण उस पर परिवारवाद और सीमित नेतृत्व व्यवस्था के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, सोनिया गांधी का मानना है कि कांग्रेस के पास आज भी भारतीय जनता पार्टी के सामने एक मजबूत राजनीतिक विकल्प बनने की क्षमता मौजूद है। पार्टी की विचारधारा और राजनीतिक भूमिका को लेकर उनका भरोसा बरकरार है।
यूपीए सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी रखी बात
इंटरव्यू में सोनिया गांधी से उनके नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दस साल के कार्यकाल को लेकर भी सवाल किए गए। खासतौर पर उस दौरान सामने आए भ्रष्टाचार के विवादों और आरोपों पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई।
इस पर सोनिया गांधी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि जिन मामलों में आरोप सामने आए थे, उनमें संबंधित मंत्रियों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। उन्होंने इस बात को सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के संदर्भ में रखा। गौरतलब है कि यूपीए सरकार ने 2004 से 2014 तक केंद्र में शासन किया था। इस दौरान कई बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद सामने आए थे, जिनका असर कांग्रेस की छवि पर भी पड़ा।
इमरजेंसी को सोनिया गांधी ने बताया गलती
इंटरव्यू का एक महत्वपूर्ण हिस्सा साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल से जुड़ा रहा। सोनिया गांधी ने इस ऐतिहासिक फैसले को गलती माना। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि बाद के समय में इंदिरा गांधी को भी इस निर्णय का एहसास होने लगा था।
सोनिया गांधी ने बताया कि आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी सहज महसूस नहीं करती थीं। उनके मुताबिक, यह फैसला इंदिरा गांधी के मन पर भारी बोझ की तरह था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आपातकाल को लेकर गांधी परिवार के भीतर गंभीर मतभेद और तनाव पैदा हुए थे। उनके इस बयान ने उस दौर के पारिवारिक और राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर एक नई चर्चा शुरू कर दी है।
आत्मकथा के अंश जारी होने से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
सोनिया गांधी का यह इंटरव्यू उनकी आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' के संपादित अंश जारी होने से पहले सामने आया है। ऐसे में उनके राजनीतिक जीवन, गांधी परिवार की भूमिका, यूपीए सरकार और इमरजेंसी से जुड़े विचारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने कुछ सवालों पर स्पष्ट राय रखी, जबकि कांग्रेस में परिवार के प्रभाव और नेपोटिज्म जैसे मुद्दों पर सीधे जवाब देने से परहेज किया। अब उनकी आत्मकथा के सामने आने वाले अंशों पर भी राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर रहेगी।