दिल्ली: दिवाली के मौके पर दिल्ली-NCR में प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। एक तरफ पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को और खराब कर सकता है, वहीं दूसरी तरफ नवंबर की शुरुआत के साथ तापमान में भी गिरावट आने लगी है। ऐसे में लोगों को दिवाली के आसपास प्रदूषण और ठंड, दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा बेहद खराब
दिल्ली में दिवाली से एक दिन पहले यानी 7 नवंबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 365 दर्ज किया गया। यह बेहद खराब श्रेणी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के 59 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 22 जगहों पर AQI 400 के पार पहुंच गया था।इनमें IIT दिल्ली में AQI 440, पंजाबी बाग में 433 और विवेक विहार में 425 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि दिवाली पर पटाखे जलाए जाने से पहले ही राजधानी की हवा सांस लेने के लिहाज से काफी खराब हो चुकी थी।
नवंबर की शुरुआत के साथ गिरने लगा तापमान
प्रदूषण के साथ मौसम में बदलाव भी लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। 7 नवंबर को दिल्ली में अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।वहीं, 8 नवंबर को अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान था। सुबह और रात के समय हल्की ठंड महसूस होने लगी है।मौसम में ठंडक बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में प्रदूषण की समस्या भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में दिल्ली-NCR के लोगों को बदलते मौसम के साथ खराब हवा का सामना करना पड़ सकता है।
ठंड बढ़ने पर क्यों बढ़ जाता है प्रदूषण?
सर्दियों में दिल्ली-NCR की हवा खराब होने के पीछे केवल पटाखे और गाड़ियों का धुआं जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि मौसम की परिस्थितियां भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।तापमान गिरने पर कई बार वायुमंडल में टेम्परेचर इनवर्जन की स्थिति बन जाती है। इस स्थिति में प्रदूषित हवा ऊपर जाने के बजाय जमीन के आसपास ही फंस जाती है।
इसके अलावा हवा की रफ्तार कम होने पर प्रदूषण तेजी से फैलकर कम नहीं हो पाता और एक ही इलाके में जमा होने लगता है। दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं पहले से मौजूद प्रदूषण को और बढ़ा सकता है।
पिछले सालों में भी दिवाली के बाद बिगड़ी दिल्ली की हवा
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि दिवाली के बाद दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर कई बार तेजी से बढ़ा है।
2020: दिवाली के दिन AQI 414 दर्ज किया गया था।
2021: दिवाली के दिन AQI 382 रहा, जबकि अगले दिन बढ़कर 462 पहुंच गया था।
2023: दिवाली के दिन AQI 218 था, लेकिन अगले दिन बढ़कर 358 हो गया।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि पटाखों से निकलने वाला धुआं और मौसम की परिस्थितियां मिलकर प्रदूषण के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं।
दिल्ली के साथ NCR के शहरों में भी बिगड़े हालात
प्रदूषण का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। CPCB के 7 नवंबर के आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में भी हवा की गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में रही।
हरियाणा के प्रमुख शहरों का AQI इस प्रकार रहा
बहादुरगढ़ – 364
गुरुग्राम – 345
फरीदाबाद – 336
सोनीपत – 304
वहीं उत्तर प्रदेश के शहरों में भी प्रदूषण का स्तर काफी अधिक दर्ज किया गया।
नोएडा – 297
गाजियाबाद – 277
ग्रेटर नोएडा – 281
हापुड़ – 307
बुलंदशहर – 283
बागपत – 249
मेरठ – 245
इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली के आसपास के शहर भी प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। खासकर बहादुरगढ़, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और हापुड़ में AQI बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया था।
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत
दिल्ली-NCR में पहले से ही हवा की गुणवत्ता खराब है। ऐसे में दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला अतिरिक्त धुआं लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है।खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।