एथेंस: उत्तरी ग्रीस के प्राचीन शहर मिइज़ा (Mieza) में पुरातत्वविदों की खुदाई से करीब 2,400 साल पुराने एक विशाल शाही जिमनेजियम के बारे में नई जानकारी सामने आई है। यह परिसर उस ऐतिहासिक स्थल से जुड़ा है, जहां माना जाता है कि महान यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने सिकंदर महान और मैसेडोनियाई राजपरिवार के अन्य युवाओं को शिक्षा दी थी। ग्रीस के संस्कृति मंत्रालय से जुड़े पुरातात्विक शोध के अनुसार, परिसर का निर्माण मैसेडोनिया के राजा फिलिप द्वितीय के शासनकाल के दौरान, चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था। 2024 से चल रही खुदाई में करीब 30 स्ट्रेम्माटा (लगभग 30 एकड़) क्षेत्र में परिसर के विभिन्न हिस्सों की जांच की जा रही है। पुरातत्वविद् डॉ. एंजेलिकी कोट्टारिडी के नेतृत्व में हुए शोध से यहां शिक्षण, शारीरिक प्रशिक्षण और सामाजिक गतिविधियों के लिए विकसित एक बड़े परिसर की तस्वीर सामने आई है।
सिर्फ स्कूल नहीं, शिक्षा और शारीरिक प्रशिक्षण का पूरा परिसर
प्राचीन यूनानी जिमनेजियम केवल पढ़ाई के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह नहीं होते थे। यहां युवाओं को बौद्धिक शिक्षा के साथ शारीरिक प्रशिक्षण भी दिया जाता था। मीज़ा के इस परिसर में पैलेस्ट्रा, स्टेडियम, शिक्षण कक्ष, जल निकासी व्यवस्था और लंबी ढकी हुई गलियां मिली हैं। परिसर की सबसे उल्लेखनीय संरचनाओं में करीब 200 मीटर लंबा ढका हुआ ‘जिस्टोस’ (Xystos) शामिल है। इसका इस्तेमाल युवाओं के व्यायाम और प्रशिक्षण के लिए किया जाता था। परिसर का आकार और इसकी वास्तुकला इसे उस दौर के महत्वपूर्ण शाही जिमनेजियम में शामिल करती है।
पत्थर की बेंच वाले लेक्चर हॉल मिले
हालिया खुदाई में परिसर के पूर्वी हिस्से में ऐसे शिक्षण कक्ष मिले हैं जिनमें पत्थर की बेंच या डेस्क मौजूद हैं। इन संरचनाओं से संकेत मिलता है कि यहां व्यवस्थित तरीके से शिक्षा और चर्चा होती थी। पुरातत्वविदों को यहां दो बड़े भोज कक्ष भी मिले हैं। इन कमरों में खूबसूरत मोजेक फर्श और भोजन के दौरान सोफे या काउच रखने के लिए ऊंचे प्लेटफॉर्म पाए गए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, दोनों कक्षों में करीब 10-10 काउच रखे जा सकते थे। मोजेक फर्श की गुणवत्ता और तकनीक मीज़ा परिसर को मैसेडोनिया के शाही केंद्र एइगाइ (Aigai), आधुनिक वर्जिना के महल से जोड़ती है। वास्तुशिल्प समानताएं भी इस परिसर के शाही संरक्षण में विकसित होने की ओर संकेत करती हैं।
चार स्टाइलस और प्राचीन छात्रों के जीवन के संकेत
खुदाई में चार लेखन स्टाइलस (Styluses) भी मिले हैं। प्राचीन समय में ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल मोम की पट्टियों पर लिखने के लिए किया जाता था। इसके अलावा पुरातत्वविदों को सिक्के, मिट्टी के बर्तन, मूर्तियों के टुकड़े और अन्य वास्तु अवशेष भी मिले हैं। इन वस्तुओं से शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद मिल रही है कि इस परिसर में रहने और प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं की रोजमर्रा की जिंदगी कैसी रही होगी।
क्या यही अरस्तू का स्कूल था?
मिइज़ा का यह जिमनेजियम लंबे समय से अरस्तू और सिकंदर महान की शिक्षा की ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा रहा है। ग्रीक इतिहासकार प्लूटार्क ने सिकंदर के जीवन पर लिखते हुए मीज़ा में उसकी शिक्षा का उल्लेख किया था। पहले इस परंपरा को मीज़ा के निंफों के अभयारण्य के आसपास मौजूद छोटे परिसर से जोड़ा जाता था। अब सामने आए विशाल जिमनेजियम की समयावधि, आकार, वास्तुशिल्प और शिक्षण सुविधाएं इसे अरस्तू के स्कूल के रूप में पहचानने के पक्ष में महत्वपूर्ण पुरातात्विक आधार दे रही हैं। हालांकि, इसे अरस्तू की कक्षा के रूप में जोड़ना अभी भी पुरातात्विक और ऐतिहासिक साक्ष्यों की व्याख्या पर आधारित है, न कि ऐसा कोई शिलालेख मिला है जिसमें सीधे अरस्तू का नाम लिखा हो।
सिकंदर के बचपन की कहानी से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, फिलिप द्वितीय ने अपने बेटे सिकंदर और मैसेडोनियाई कुलीन परिवारों के युवाओं की शिक्षा के लिए अरस्तू को मीज़ा से जोड़ा था। नई खुदाई से सामने आया परिसर इसी ऐतिहासिक परंपरा को पुरातात्विक संदर्भ देता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, आगे की खुदाई और संरक्षण कार्यों से इस परिसर की संरचना और इसके वास्तविक उपयोग को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। मीज़ा में मिले ये अवशेष प्राचीन मैसेडोनिया की शिक्षा, शारीरिक प्रशिक्षण और शाही संस्कृति को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।