देवास | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गुजरात से लेकर दिल्ली तक सेवा भारतीय जनता पार्टी की शासन व्यवस्था और संस्कारों का मूल भाव रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता कितनी भी बड़ी क्यों न हो, जनसेवा का मार्ग ही मूल आधार रहना चाहिए और इससे कभी विचलित नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी गुरुवार को गुजरात के वडनगर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक निकाली जा रही ‘सेवा संकल्प यात्रा’ में शामिल युवाओं से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद कर रहे थे। अलग-अलग राज्यों के युवा इस यात्रा में शामिल हैं और फिलहाल यात्रा देवास जिले में पहुंची हुई है।
‘सेवा ही शासन व्यवस्था और संस्कारों का मूल भाव’
पीएम मोदी ने कहा कि सेवा के भाव से किया गया काम लोगों के दिलों में लंबे समय तक रहता है। उन्होंने कहा कि राजनीति, चुनाव और शासन व्यवस्था अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के संकल्प को लेकर आगे बढ़ना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब शासन के केंद्र में सेवा का भाव होता है, तो नीतियों के केंद्र में नागरिकों का हित रहता है। प्रधानमंत्री ने प्रतिभागियों से कहा कि उनके आचरण से लोगों को यह संदेश मिलना चाहिए कि सत्ता मिलने के बावजूद उनका मूल रास्ता जनसेवा ही है।
‘जन सेवा से देश सेवा’ जीवन का मूलमंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘जन सेवा से देश सेवा’ उनके जीवन का मूलमंत्र रहा है। उन्होंने कहा कि सेवा भाव से किए गए कार्यों को लोग याद रखते हैं और सेवा करने वाले लोगों को जनता का आशीर्वाद मिलता है। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीबों, महिलाओं, बेटियों, मरीजों और आदिवासियों समेत समाज के विभिन्न वर्गों के लिए चल रही योजनाओं की बुनियाद में सेवा का भाव है।
2047 तक विकसित भारत में युवाओं की अहम भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में युवा पीढ़ी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने यात्रा में शामिल युवाओं से इस लक्ष्य से मजबूती के साथ जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब सेवा का भाव देश की नीतियों का हिस्सा बनता है, तो राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए यही भावना बड़ी प्रेरक शक्ति बनती है।
यात्रा और सेवा भारतीय सामाजिक संस्कारों का हिस्सा
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में यात्रा और सेवा दोनों ही सामाजिक संस्कारों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान की गई विभिन्न यात्राओं का भी उल्लेख किया। यात्रा में शामिल युवाओं से उन्होंने कहा कि लोगों की सेवा को अपना प्रमुख उद्देश्य बनाएं और अपने व्यवहार के माध्यम से सेवा का संदेश दें। उन्होंने ‘सेवा परमो धर्मः’ के भाव के साथ आगे बढ़ने की बात कही।
युवाओं से ‘शक्ति की सप्त धाराओं’ पर संवाद का आह्वान
प्रधानमंत्री ने यात्रा में शामिल प्रतिभागियों से ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समाधानों को समझने और उनसे सीखने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को ‘विविधता में एकता’ के भारतीय दर्शन का संदेश देशभर में पहुंचाना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से यात्रा के दौरान लोगों के बीच ‘शक्ति की सप्त धाराओं’ के बारे में भी चर्चा करने को कहा। प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले से राष्ट्र निर्माण और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़े इस विचार को सामने रखा था।
जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन के 25 साल के अवसर पर यात्रा
‘सेवा संकल्प यात्रा’ का आयोजन प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन और निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया जा रहा है। यात्रा गुजरात के वडनगर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक जा रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान यात्रा में शामिल युवाओं ने प्रधानमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए। मोदी ने प्रतिभागियों से जनसेवा, ग्रामीण अनुभव और विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर संवाद जारी रखने का आह्वान किया।