इंदौर सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से जुड़ी एक याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने फैसला सुनाया है। अदालत ने MPPSC की लेट फीस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। याचिका में लंबे विलंब से आवेदन करने वाले उम्मीदवारों से ₹25 हजार तक अतिरिक्त शुल्क लिए जाने को आर्थिक रूप से बोझिल बताया गया था। यह मामला सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी (ADPO) पद की परीक्षा के आवेदन से जुड़ा है। याचिकाकर्ता मोहम्मद रिजवान की ओर से दायर याचिका में MPPSC की लेट फीस को संविधान में दिए गए समानता के अधिकार के खिलाफ बताया गया था।
₹500 सामान्य शुल्क, देरी पर अलग-अलग लेट फीस
मामले के अनुसार, MPPSC ने ADPO परीक्षा के लिए आवेदन की सामान्य फीस ₹500 निर्धारित की थी। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद कुछ समय तक अभ्यर्थियों को ₹3 हजार लेट फीस के साथ आवेदन करने की सुविधा दी गई। इसके बाद भी आवेदन नहीं करने वाले और अधिक देरी से फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थियों के लिए ₹25 हजार अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान किया गया था। इसी शुल्क को याचिका में चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता ने आर्थिक बोझ का दिया तर्क
याचिकाकर्ता मोहम्मद रिजवान की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि ₹25 हजार की लेट फीस कई अभ्यर्थियों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ हो सकती है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों पर इसका असर पड़ने की बात याचिका में कही गई। याचिकाकर्ता ने अन्य राज्यों के लोक सेवा आयोगों में लागू लेट फीस का भी उदाहरण दिया। उनका तर्क था कि दूसरे राज्यों में देर से आवेदन करने पर ली जाने वाली फीस की तुलना में MPPSC की निर्धारित राशि काफी अधिक है। इसी आधार पर अदालत से लेट फीस व्यवस्था में राहत देने की मांग की गई थी।
MPPSC ने बताया लेट फीस रखने का कारण
सुनवाई के दौरान MPPSC की ओर से लेट फीस को लेकर अपना पक्ष रखा गया। आयोग ने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी कराने के लिए लेट फीस का प्रावधान किया गया है। आयोग के मुताबिक, अंतिम समय में बड़ी संख्या में आवेदन आने से परीक्षा से जुड़ी प्रशासनिक और प्रक्रिया संबंधी व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसी वजह से आवेदन की समय सीमा के बाद अलग-अलग चरणों में अलग-अलग लेट फीस तय की गई है।
कोर्ट ने प्रशासनिक कारणों को माना
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने MPPSC की दलीलों को स्वीकार किया। अदालत ने माना कि निर्धारित समय सीमा के बाद आवेदन करने पर अतिरिक्त शुल्क लेने की व्यवस्था के पीछे प्रशासनिक कारण मौजूद हैं। कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता समय पर आवेदन नहीं कर पाने का कोई ठोस कारण भी नहीं बता सके। इसके बाद अदालत ने याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया।
अभ्यर्थियों के लिए क्या है इसका मतलब?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद इस मामले में MPPSC की ओर से निर्धारित लेट फीस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर राहत नहीं मिली है। यानी संबंधित परीक्षा के आवेदन में तय समय सीमा के बाद लागू शुल्क व्यवस्था को लेकर दायर इस याचिका को अदालत ने स्वीकार नहीं किया।