कोलकाता डेस्क: गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ गणेशोत्सव अब अपने समापन की ओर है। अनंत चतुर्दशी के दिन भक्त भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने के बाद उन्हें विदाई देते हैं। इस साल अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन गणपति विसर्जन किया जाएगा।
25 सितंबर को होगी अनंत चतुर्दशी
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 25 सितंबर को रहेगी। अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा से भी जुड़ा है। इस दिन श्रद्धालु अनंत भगवान की पूजा और व्रत करते हैं, जबकि गणेश भक्त बप्पा को अंतिम पूजा के बाद विसर्जित कर गणेशोत्सव का समापन करते हैं।
गणपति विसर्जन के शुभ मुहूर्त
25 सितंबर को गणपति विसर्जन के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। प्रकाशित पंचांग जानकारी के अनुसार सुबह 6:11 बजे से 10:42 बजे तक, दोपहर 12:13 बजे से 1:43 बजे तक, शाम 4:44 बजे से 6:14 बजे तक और रात 9:14 बजे से 10:43 बजे तक विसर्जन के मुहूर्त बताए गए हैं।
इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक बताया गया है। वहीं, रात 11:07 बजे के बाद भद्रा शुरू होने की जानकारी भी दी गई है। ऐसे में विसर्जन की योजना बनाते समय स्थानीय पंचांग और क्षेत्र के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।
विसर्जन से पहले करें गणपति की पूजा
गणपति विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है। सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद धूप, फूल, अक्षत, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। गणपति बप्पा को मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाकर आरती करें।
परिवार के साथ करें बप्पा की विदाई
पूजा और आरती के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु गणपति बप्पा मोरया के जयकारे लगाते हुए उन्हें विदाई देते हैं। विसर्जन से पहले भगवान गणेश से जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगने और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करने की परंपरा भी है।
अनंत चतुर्दशी पर अनंत भगवान की पूजा
अनंत चतुर्दशी केवल गणेश विसर्जन का पर्व नहीं है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा भी की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धालु व्रत रखते हैं और पूजा के बाद अनंत सूत्र धारण करते हैं। अनंत सूत्र में 14 गांठें होती हैं, जिन्हें 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है।
घर पर विसर्जन करते समय रखें ध्यान
यदि घर पर गणपति विसर्जन किया जा रहा है, तो साफ पानी से भरे बड़े पात्र या टब का इस्तेमाल किया जा सकता है। विसर्जन के बाद प्रतिमा से जुड़े प्राकृतिक अवशेषों को सम्मानपूर्वक निर्धारित स्थान पर रखें। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों वाली प्रतिमाओं के बजाय प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमा का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प माना जाता है।