नई दिल्ली - भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी और उनके लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आडवाणी अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उनका सार्वजनिक जीवन, संगठन के प्रति समर्पण और देश के लिए किया गया योगदान आधुनिक भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत संदेश साझा करते हुए आडवाणी के राजनीतिक, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन के कई पहलुओं का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने मिलकर काम करने की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने भारतीय राजनीति की दिशा को प्रभावित किया। जनसंघ को मजबूत करने से लेकर भारतीय जनता पार्टी के निर्माण तक दोनों नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
दिवाली के दिन जन्मदिन होने को बताया खास संयोग
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह सुखद संयोग है कि लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन के अवसर पर दीपावली का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। प्रभु श्रीराम और दीपों के उत्सव के साथ उनके जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव का जुड़ना इस दिन को और यादगार बनाता है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसी वर्ष भारतीय जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसर भी मनाए जा रहे हैं। पीएम ने कहा कि उन्हें हमेशा आडवाणी का स्नेह, मार्गदर्शन और साथ मिलता रहा है।

मोदी ने आडवाणी को बताया अपना राजनीतिक मार्गदर्शक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में बताया कि सार्वजनिक जीवन के शुरुआती दौर में उन्हें आडवाणी के संपर्क में आने का अवसर मिला था। समय के साथ यह रिश्ता काफी आत्मीय हो गया और आडवाणी उनके लिए अभिभावक की तरह बन गए।
मोदी के मुताबिक, आडवाणी ने उन्हें राजनीति की बारीकियां समझाईं और अलग-अलग परिस्थितियों में मार्गदर्शन दिया। कठिन समय में उनकी सलाह और अनुभव हमेशा सहारा बने। उनकी वैचारिक स्पष्टता, आत्मविश्वास और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता से उन्हें लगातार प्रेरणा मिलती रही है। पीएम ने कहा कि आज भी जब वह आडवाणी से मिलने जाते हैं, तो उनके साथ बिताया समय नई ऊर्जा और उत्साह देता है। इस अवसर पर उन्होंने संस्कृत की पंक्तियों के माध्यम से उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।
विभाजन की पीड़ा से शुरू हुआ संघर्षपूर्ण सफर
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था। वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के दौरान उन्हें अपना घर और परिचित परिवेश छोड़ना पड़ा। सिंध से भारत आने के बाद उन्हें नए सिरे से जीवन की शुरुआत करनी पड़ी।
पीएम मोदी ने लिखा कि इतनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद आडवाणी ने कभी निराशा या कड़वाहट को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। नए सिरे से कुछ खड़ा करने का उनका संकल्प आगे चलकर उनके राजनीतिक जीवन में भी दिखाई दिया। जनसंघ को मजबूत करने और भाजपा के संगठनात्मक विस्तार में उनकी भूमिका इसी प्रतिबद्धता का उदाहरण रही।
जनसंघ से भाजपा तक संगठन को मजबूत बनाने में निभाई भूमिका
आडवाणी ने अपने राजनीतिक जीवन में संगठन निर्माण को प्राथमिकता दी। वर्ष 1967 में वह दिल्ली महानगर परिषद के अध्यक्ष बने। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका बढ़ाई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान पार्टी का विस्तार हुआ और भारतीय राजनीति में उसका प्रभाव बढ़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में 1989 के लोकसभा चुनाव और 1996 में भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने जैसे राजनीतिक पड़ावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने राष्ट्र प्रथम की विचारधारा को महत्व देते हुए पार्टी के कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों को तैयार किया।

आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष
प्रधानमंत्री ने आडवाणी के राजनीतिक जीवन में आपातकाल को एक अहम मोड़ बताया। वर्ष 1975 में देश में आपातकाल लागू होने के दौरान आडवाणी लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं में शामिल थे। इस दौर के अनुभवों का उल्लेख उनकी पुस्तक 'A Prisoner's Scrap-Book' में भी मिलता है। मोदी ने बताया कि आडवाणी ने अपने अनुभवों को लेखन के माध्यम से भी सामने रखा। उनकी पुस्तक में आपातकालीन भारत और जर्मनी में हिटलर के शासनकाल के बीच कुछ समानताओं का जिक्र किया गया है।

सोमनाथ से अयोध्या रथयात्रा का किया विशेष उल्लेख
आडवाणी के राजनीतिक सफर में सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई रथयात्रा को प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा की योजना बनाने, तैयारियों और उसे आगे बढ़ाने के अलग-अलग चरणों में उन्हें भी योगदान देने का अवसर मिला था।
मोदी ने याद किया कि यात्रा के शुभारंभ के समय सोमनाथ में मौजूद रहना उनके लिए यादगार अनुभव था। बिहार में यात्रा के दौरान आडवाणी की गिरफ्तारी का प्रसंग भी उन्होंने साझा किया। उनके मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद गुजरात में भाजपा ने तत्कालीन चिमनभाई पटेल सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। प्रधानमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लंबे संघर्ष और बाद में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को भी अपने लेख में याद किया।

गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में योगदान
प्रधानमंत्री मोदी ने आडवाणी के प्रशासनिक अनुभव की भी चर्चा की। वर्ष 1977 में जनता सरकार के दौरान उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में काम किया।
मोदी ने कहा कि गृह मंत्री के तौर पर आडवाणी ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सुरक्षा बलों के हितों के लिए प्रयास किए। आतंकवाद के खिलाफ उनका रुख स्पष्ट और दृढ़ रहा। उनके प्रशासनिक अनुभव और निर्णय लेने की क्षमता का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया।
राजनीति के अलावा किताबों और सिनेमा से भी था लगाव
आडवाणी के व्यक्तित्व के गैर-राजनीतिक पहलुओं पर भी पीएम मोदी ने विस्तार से लिखा। उन्होंने बताया कि आडवाणी को किताबें पढ़ने का बेहद शौक है। वह अखबारों को भी काफी ध्यान से पढ़ते रहे हैं। इसके अलावा सिनेमा, रंगमंच और इतिहास में उनकी गहरी रुचि रही है।
उनकी पुस्तक 'My Country My Life' में उनके जीवन और राजनीतिक अनुभवों की झलक मिलती है। प्रधानमंत्री ने आडवाणी के सिंधी संस्कृति से जुड़ाव और सिंधु दर्शन पूजा को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका को भी याद किया।
भारत रत्न से सम्मानित हो चुके हैं आडवाणी
लालकृष्ण आडवाणी के लंबे सार्वजनिक जीवन में उनकी पत्नी कमला आडवाणी के योगदान का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों के राजनीतिक सफर में कमला जी हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं और उनका संबल बनीं। देश के लिए उनके योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में केंद्र सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया था।
पीएम मोदी ने की स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आडवाणी के बेहतर स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की। उन्होंने कहा कि आडवाणी जैसे व्यक्तित्व बहुत कम होते हैं, जिनके जीवन में आधुनिक भारत के इतिहास के इतने महत्वपूर्ण अध्याय समाहित हों। मोदी ने अपने और आडवाणी के रिश्ते को याद करते हुए कहा कि आज भी उनसे मुलाकात नई प्रेरणा देती है। उन्होंने कामना की कि आडवाणी इसी तरह अपना स्नेह और मार्गदर्शन देते रहें।