देहरादून झड़ीपानी क्षेत्र में उत्तर रेलवे और स्थानीय भूमिधरों के बीच जमीन को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गहरा गया। उत्तर रेलवे के अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और क्षेत्र में रह रहे लगभग 60 से 70 परिवारों के घरों के बाहर नोटिस चस्पा कर दिए। इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध किया। विरोध के दौरान कई बार स्थानीय निवासियों और रेलवे अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प की स्थिति भी बनी।
मकान खाली करने का दबाव
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उत्तर रेलवे के पास संबंधित भूमि पर स्वामित्व साबित करने के लिए कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। उनका कहना है कि रेलवे अधिकारी हर 15 से 20 दिनों में नोटिस लेकर पहुंच जाते हैं और लोगों पर मकान खाली करने का दबाव बनाते हैं। जबकि यहां रहने वाले परिवारों के पास जमीन की रजिस्ट्री सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं और कई परिवार पिछले 25 से 30 वर्षों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं।
निवासियों का कहना है कि इस भूमि से जुड़ा मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद उत्तर रेलवे लगातार कार्रवाई कर लोगों का मानसिक उत्पीड़न कर रहा है। उनका आरोप है कि जब तक अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आता तब तक इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है।
अधिकारियों का कैमरे में बोलने से इनकार
मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों ने जब उत्तर रेलवे के अधिकारियों से कार्रवाई के संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की तो अधिकारियों ने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का केवल इतना कहना था कि यह कार्रवाई रेलवे संपदा अधिकारी के निर्देशों के तहत की जा रही है।
स्थानीय निवासी मुकुंद सेमवाल ने बताया कि उनका परिवार पिछले 50 से 60 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहा है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित भूमि सरकारी संपत्ति है और अंग्रेजों के शासनकाल से यहां एक चौकी स्थापित थी जहां राजपुर की ओर से आने वाले लोगों से पथकर टोल वसूला जाता था। उनके अनुसार पहले यह संपत्ति उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन थी और राज्य गठन के बाद अब नगर पालिका के अधीन है। इसके बावजूद उत्तर रेलवे इस सरकारी भूमि पर अपना स्वामित्व जता रहा है जिसका स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं।
भूमि विवाद को लेकर स्थिति तनावपूर्ण
फिलहाल झड़ीपानी में भूमि विवाद को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे जबकि उत्तर रेलवे अपने स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ाने की तैयारी में है। मामले पर सभी की निगाहें अब न्यायालय के आगामी फैसले पर टिकी हैं।