लोहाघाट दिल्ली के जंतर-मंतर में नीट पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए कथित लाठीचार्ज के विरोध में लोहाघाट में छात्र-छात्राओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
रोडवेज बस स्टेशन में धरना
छात्र-छात्राएं लोहाघाट के स्टेशन बाजार स्थित वीर कालू सिंह चौराहे पर एकत्रित हुए जहां से उन्होंने विरोध प्रदर्शन करते हुए रोडवेज बस स्टेशन पहुंचकर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्र विरोधी नीतियां किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएंगी। उनका आरोप था कि भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लगातार लीक हो रहे हैं जिससे लाखों युवाओं की मेहनत पर पानी फिर रहा है।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से निराश होकर कई छात्र-छात्राएं आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। इसके बावजूद जब छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे तब उन पर लाठीचार्ज किया गया जिसका वे कड़ा विरोध करते हैं। छात्रों का कहना था कि देश में करोड़ों युवा बेरोजगार हैं और सरकार युवाओं के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की।
कांग्रेस ने दिया समर्थन
इस आंदोलन को एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस ने भी समर्थन दिया। यूथ कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सक्षम अधिकारी ने कहा कि निहत्थे छात्र-छात्राओं पर कथित बर्बर लाठीचार्ज बेहद निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में कई छात्र-छात्राएं गंभीर रूप से घायल हुए। सक्षम अधिकारी ने कहा कि छात्रों के समर्थन में पीएम आवास के बाहर धरना दे रहे कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस का व्यवहार भी निंदनीय है। उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
केंद्र सरकार की आलोचना
वहीं एनएसयूआई नेताओं ने भी घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं का उत्पीड़न किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो छात्र हितों की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे और उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जोरदार ढंग से उठाया।